गुरुवार, 1 जनवरी 2026

रेसिपी और टिप्स

सालों साल चलने वाला सत्तू बनाने का तरीका, स्टोरिंग टिप्स भी जानें

Bihari Sattu Ingredients: सत्तू आपकी सेहत के लिए कितनी फायदेमंद है ये तो आप जानती ही हैं, लेकिन क्या आप ये जानती हैं कि सत्तू का पाउडर कैसे बनाया जाता है? आइए इस लेख में जानते हैं।  

What Is Sattu Powder Made Of: गर्मियों में अक्सर हम खाने-पीने की ऐसी चीजें तलाशते हैं, जिनका सेवन करने से हमें ठंडक और ताजगी महसूस हो। ऐसा इसलिए क्योंकि बढ़ते तापमान को देखते हुए खुद को अंदर से ठंडा रखना भी बहुत जरूरी है।

इसके लिए हम घर पर कई सारे समर ड्रिंक्स बनाते हैं, जिन्हें पीकर हमें एनर्जी भी मिले और गर्मी से राहत भी मिले जैसे- सत्तू की ड्रिंक्स। यही वजह है कि मार्केट में सत्तू कई वैरायटी के मिलते हैं, लेकिन देसी गांव वाले सत्तू के बात ही कुछ और होती है।

अगर आप चाहें तो घर पर सत्तू तैयार कर सकते हैं, इसके लिए आपको बस नीचे बताए गए स्टेप्स और टिप्स को फॉलो करना होगा।

गर्मियों में राहत देंगे सत्तू के ये रिफ्रेशिंग ड्रिंक्स, स्वाद ऐसा हर रोज पीने की होगी चाहत


क्या आपको पता है चने के आटे में नींबू का रस मिलाने से क्या होगा? गर्मी से राहत पाने के लिए बनाएं सत्तू की रेसिपीज

सत्तू एक तरह का सूखा पाउडर है, जिसे चने की दाल से तैयार किया जाता है। इसके साथ भुने हुए जौ और चने को पीसकर भी दरदरा पिसा जाता है। हालांकि, सत्तू को सिर्फ भुने हुए चने से भी बनाया जा सकता है। कई लोग जौ का सत्तू भी खाना पसंद करते हैं, जिसमें काली मिर्च भी मिलाई जाती है।


स्वास्थ्य के लिए लाभकारी, सत्तू एक ऐसा आहार है जो बनाने में बहुत ही सरल और सस्ता व्यंजन है। सत्तू को व्यंजनों को बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है। (सत्तू से बनी ये 3 रेसिपी)

सत्तू पाउडर में क्या-क्या मिलाया जाता है? (Best Sattu Kaise Banate Hain)

अगर आप घर पर सत्तू बना रहे हैं, तो आपको चने की दाल, अनाज, जौ, काजू, बादाम, बाजरा और गेहूं की जरूरत पड़गी। ऐसा इसलिए क्योंकि सत्तू को इन तमाम अनाज को सूखा भूनकर तैयार किया जाता है।


हालांकि, सबका सत्तू बनने का तरीका अलग-अलग होता है जैसे- ओडिशा में सत्तू या चटुआ काजू, बादाम, बाजरा, जौ और चने को सूखा भूनकर और बारीक आटा पीसकर बनाया जाता है।

सत्तू पाउडर का तरीका

सामग्री

चना दाल- 1 किलो

गेहूं- आधा किलो

जौ- 200 ग्राम

बादाम- 100 ग्राम

काजू- 100 ग्राम

बाजरा- 50 ग्राम

विधि

सत्तू का पाउडर बनाने के लिए सबसे पहले सभी अनाज को एक बाउल में निकालकर रख दें।

फिर अनाज को साफ करें और पानी से अच्छी तरह से धो लें।

फिर सूखने के लिए छोड़ दें और जब अनाज सूख जाए, तो कड़ाही में हल्की आंच पर भुन लें।

आप इसे देसी घी या फिर मक्खन के साथ भी भून सकते हैं।

जब चने की दाल से खुशबू आने लगे, तो गैस बंद कर दें। (घर पर बनाएं चना दाल के टेस्टी चिप्स)

फिर हल्का ठंडा होने के बाद किसी भारी चीज से इन्हें दरदरा पीस लें।

इसे जरूर पढ़ें-पराठे से लेकर ड्रिंक्स तक, गर्मियों में सत्तू से बनाएं ये बेहतरीन रेसिपीज

सत्तू को सालों-साल स्टोर करने के हैक्स (How to Get Rid of Weevils)

जब भी सत्तू को स्टोर करें तो कंटेनर में लौंग डाल दें। इससे कीड़े नहीं लगेंगे और ये हमेशा फ्रेश भी रहेंगे।

सत्तू को फ्रेश रखने के लिए नीम के पत्तों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

आप कंटेनर के अंदर नीम के पत्तों को कपड़े में बांधकर भी रख सकते हैं।

इन्हें हमेशा साफ डिब्बे में स्टोर करें, जिसमें मॉइस्चर बिल्कुल भी नहीं आए।

अगर आपके पास स्टोर करने की जगह नहीं है, तो आप कम क्वालिटी में ही खरीदें।

इन्हें कभी भी प्लास्टिक या फिर जूट के बैग में स्टोर न करें। (जूट बैग को साफ करने का तरीका)

उम्मीद है कि आपको सत्तू बनाने का तरीका समझ में आ गया होगा। अगर आपको कोई और सामग्री को लेकर कंफ्यूजन है तो हमें नीचे कमेंट करके जरूर बताएं। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़े रहें हरजिदंगी से।

रविवार, 14 दिसंबर 2025

 



मौन के उस पार

अध्याय 1 : खोया हुआ मन

सचिन को यह एहसास सबसे पहले उसकी चुप्पी से हुआ।
वह पहले भी कम बोलता था, पर अब उसकी ख़ामोशी में विचार नहीं, थकान थी।
ऐसी थकान, जो शब्दों से नहीं उतरती।

परिवार वालों ने इसे समय की मार समझा।
किसी ने उसके भीतर झाँकने की कोशिश नहीं की—
सबने बस यही चाहा कि उसकी ज़िंदगी फिर से “सामान्य” हो जाए।

यही सोच भावना को लेकर आई।

भावना पहली नज़र में किसी कहानी की नायिका नहीं लगती थी—
न असाधारण सुंदरता,
न बनावटी मुस्कान।
पर उसकी आँखों में एक ठहराव था,
जैसे उसने जीवन को देखा हो, जिया हो, और उससे कुछ सीख भी ली हो।

पहली मुलाक़ात में दोनों ने ज़्यादा बात नहीं की।
सचिन ने सवाल नहीं पूछे,
भावना ने खुद को सिद्ध करने की कोशिश नहीं की।

यह रिश्ता जल्दबाज़ी में नहीं बना।
धीरे-धीरे, बातचीत के छोटे-छोटे क्षणों में
एक सहमति पनपी—
कि दोनों एक-दूसरे से झूठ नहीं बोलेंगे।

एक शाम, जब बातचीत सामान्य थी,
भावना ने अचानक कहा—

“सचिन, एक बात है जो मुझे साफ़ करनी चाहिए।”

सचिन ने उसकी ओर देखा।
उस नज़र में जिज्ञासा नहीं थी,
सिर्फ़ तैयारी थी—
सच सुनने की।

भावना ने बताया कि उसके जीवन में पहले कोई था।
एक गहरा रिश्ता।
जो सामाजिक स्वीकृति के अभाव में टूट गया।

उसने यह भी स्वीकार किया
कि कुछ भावनाएँ पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं—
वे बस दब जाती हैं।

कमरे में एक लंबा मौन छा गया।

सचिन ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
न आश्चर्य,
न निर्णय।

फिर उसने कहा—

“हर इंसान का कोई न कोई अतीत होता है।
मुद्दा यह नहीं कि वह था क्या,
मुद्दा यह है कि आज तुम कहाँ खड़ी हो।”

भावना ने राहत की साँस ली।
शायद पहली बार
किसी ने उसे उसके अतीत के कारण नहीं,
उसके वर्तमान के कारण देखा था।

यहीं से
यह कहानी शुरू होती है।

यह प्रेम की कहानी नहीं है—
यह आकर्षण, स्वीकृति और आत्मसंघर्ष की कहानी है।

यह उस मन की कहानी है
जो सब कुछ पाकर भी
कभी-कभी किसी और दिशा में खिंच जाता है।

और यह उस व्यक्ति की कहानी है
जो प्यार को अधिकार नहीं,
जिम्मेदारी मानता है।

सचिन नहीं जानता था
कि आने वाला समय
उसकी समझ,
उसके प्रेम
और उसके आत्मसम्मान—
तीनों की परीक्षा लेने वाला है।

पर एक बात वह साफ़ जानता था—

अगर वह किसी के साथ चलेगा,
तो अँधेरे में नहीं


📘 अध्याय 1 समाप्त



 



मौन के उस पार

एक मनोवैज्ञानिक उपन्यास

लेखक: (काल्पनिक)


भूमिका

यह उपन्यास प्रेम की नहीं,
आकर्षण की गलतफहमी की कथा है।

यह उस सच की कहानी है जहाँ
देह की हलचल को मन प्रेम समझ लेता है,
और समझदारी के बावजूद
मन बार-बार उसी भ्रम की ओर खिंचता है।

यह किसी को दोषी ठहराने का प्रयास नहीं—
यह मानव मन को समझने की एक कोशिश है।


अध्याय 1 : खोया हुआ सचिन

सचिन भीतर से शांत था,
पर उसकी खामोशी में थकान थी।
परिवार ने उसे “सामान्य” बनाने के लिए
भावना को चुना।

भावना सरल थी,
पर उसके भीतर एक अधूरा अध्याय था।


अध्याय 2 : सच का स्वीकार

भावना ने राहुल के बारे में बताया।
सचिन ने अतीत नहीं खोदा—
उसने वर्तमान की ईमानदारी को चुना।

यहीं से यह रिश्ता
सामान्य विवाह से अलग हो गया—
यह समझदारी का समझौता था।


अध्याय 3 : विवाह — एक चेतन निर्णय

यह प्रेम-विवाह नहीं था,
यह जागरूकता-विवाह था।

दोनों जानते थे—
यह रिश्ता तभी टिकेगा
जब सच छुपाया नहीं जाएगा।


अध्याय 4 : इच्छा और स्मृति

राहुल का अचानक आना
भावना के भीतर
एक पुरानी स्मृति जगा गया।

यह प्रेम नहीं था—
यह देह की याद थी।

भावना ने सीमा चुनी,
और रात को सचिन को सब बताया।


अध्याय 5 : पुरुष की भूमिका

सचिन का निर्णय महत्वपूर्ण था।
वह नहीं चाहता था कि भावना छुपे,
क्योंकि छुपाव
स्त्री को असुरक्षित बना देता है।

यहाँ सचिन पति नहीं,
संरक्षक और साथी बनता है।


अध्याय 6 : आकर्षण बनाम प्रेम

राहुल से मिलना
भावना के भीतर उत्तेजना जगाता था,
पर हर बार उसके बाद
एक खालीपन आता।

सचिन के साथ उसे
सुरक्षा, सम्मान और पूर्णता मिलती थी।

यहीं उपन्यास का
मनोवैज्ञानिक केंद्र है:

स्त्री कभी-कभी आकर्षण को प्रेम समझ लेती है,
जबकि वह सिर्फ़ देह की प्रतिक्रिया होती है।


अध्याय 7 : समय का अंतर

राहुल का आना सीमित था,
छुपा हुआ था,
डर से भरा हुआ।

सचिन का साथ निरंतर था—
हर सुबह, हर रात, हर बीमारी, हर डर में।


अध्याय 8 : द्वंद्व

भावना स्वयं से लड़ती रही।

उसे समझ आने लगा कि
जिसे वह “चाह” समझ रही है
वह सिर्फ़ अधूरी उत्तेजना है।

और प्रेम?
वह तो स्थिर होता है।


अध्याय 9 : सचिन का प्रेम

सचिन ने कभी रोका नहीं,
पर कभी छोड़ा भी नहीं।

यह पुरुष-स्वामित्व नहीं था—
यह परिपक्व प्रेम था।


अध्याय 10 : भावना का आत्मबोध (अंतिम अध्याय)

भावना ने एक रात
अपने आप से सच कहा—

“मैं प्रेम में थी ही नहीं।
मैं केवल उस एहसास की आदी थी
जो अधूरा था, इसलिए तीव्र था।”

“सचिन के साथ मुझे जो मिला
वह शांति थी—
और शांति उत्तेजना से शांत होती है,
पर गहरी होती है।”

उसने राहुल को अंतिम बार
मन में विदा किया—
बिना नफ़रत, बिना लालसा।


उपन्यास का अंतिम वाक्य

“आकर्षण तेज़ होता है,
प्रेम गहरा।
और जो गहरा हो,
वही जीवन बनता है।”


यह ai से लिखवा हुआ है। अगर ठीक समझों तों यह उपन्यास लिख लो।

शनिवार, 6 दिसंबर 2025



⭐ 

रामशरण का एक ही बेटा था—अमन।
छोटा सा घर, बड़ी मुश्किलें, लेकिन पिता–बेटे का प्यार इतना गहरा कि दुनिया की कोई ताकत उसे हिला नहीं सकती थी।

अमन शहर में रहकर नौकरी करता था।
हर रात वीडियो कॉल पर कहता—
“पापा, बस एक साल और… फिर आपको अपने साथ ले आऊँगा।”

रामशरण हँसकर जवाब देते—
“तू खुश है ना? मुझे किसी और चीज़ की जरूरत नहीं।”

अमन उनके जीने का कारण था।
उनकी हर धड़कन, हर उम्मीद उसी से बंधी हुई थी।


एक दिन… खबर आई।

शाम के वक्त गाँव में फोन आया—
आवाज़ काँप रही थी।

“काका… अमन का सड़क एक्सीडेंट हो गया है। हालत बहुत गंभीर है। शायद…”

वाक्य पूरा भी नहीं हुआ था कि रामशरण के हाथ से फोन छूट गया।
उन्हें लगा जैसे किसी ने उनकी छाती में घूंसा मार दिया हो।

गाँव की पगडंडी पर चलते हुए उनके होंठ बस एक ही बात दोहरा रहे थे—

**“बाप तब नहीं मरता, जब उसकी उम्र खत्म होती है…

बाप तब मरता है… जब उसको बेटे के मरने की खबर मिलती है।”**

उनकी आँखें सूख चुकी थीं।
दिल से आवाज़ नहीं निकल रही थी।
कदम कांप रहे थे।
पर वो भाग रहे थे—उसी शहर की ओर, जहाँ उनका बेटा मौत से लड़ रहा था।


अस्पताल में…

जब रामशरण पहुँचे, डॉक्टर बोले—
“हम कोशिश कर रहे हैं… लेकिन संभावना कम है।”

रामशरण बेटे के बेड के पास बैठ गए।
अमन ऑक्सीजन मास्क में था, चेहरे पर चोटें, शरीर पर पट्टियाँ।

रामशरण ने उसके हाथ को पकड़कर धीरे से कहा—
“बेटा… तू नहीं जाएगा।
तेरे बिना मेरा कौन है?”

एक बूढ़े बाप के शब्द कमरे की हवा तक हिला रहे थे।

उन्होंने रोते हुए कहा—

**“अगर तुझे कुछ हो गया…

तो समझ लेना, मैं तो उसी पल मर जाऊँगा।
क्योंकि बाप की मौत उम्र से नहीं होती…
बेटे की खबर से होती है…”**

उनकी आवाज़ टूट गई।


चमत्कार…

कई घंटे बाद, अमन की उँगली हल्की सी हिली।
मशीन की बीप बदली।
डॉक्टर तुरंत अंदर आए।

धीरे-धीरे अमन ने आंखें खोलीं।

“पा…पा…”
उसकी कमजोर आवाज़ सुनते ही रामशरण की आँखों में जीवन लौट आया।

उन्होंने बेटे को सीने से लगाया और फूट-फूटकर रो पड़े।

“तू जिंदा है… तो मैं भी जिंदा हूँ, बेटा।”


अंत…

घर लौटते वक्त, रामशरण सोच रहे थे—

उम्र तो बहुत पहले की गुजर चुकी थी…
पर आज जान वापस आई है।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती,
बल्कि एक सच्चाई छोड़ जाती है—

**“बाप की मौत सांस रुकने से नहीं होती…

बाप तब मरता है,
जब उसे बेटे के मरने की खबर मिलती है।”**



रविवार, 30 नवंबर 2025

अंधेरों से लड़कर उजाले तक — जीवन की सच्ची कहानी

“मैं जिंदगी के उन हालातों से भी गुजरा हूं, जहां लगता था—मरना अब जरूरी हो गया।”
शायद यह पंक्ति पढ़कर कई दिल अचानक ठहर जाते हैं, क्योंकि हर इंसान, किसी न किसी मोड़ पर, ऐसी ही किसी खाई के किनारे खड़ा हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि कुछ लोग वहाँ टूट जाते हैं… और कुछ लोग वहीं से दोबारा जीना सीख लेते हैं।

जब ज़िंदगी मुश्किल लगने लगे

कभी-कभी जीवन एक ऐसे मोड़ पर ले आता है जहाँ साँस लेना भी बोझ लगता है। हालात इतने भारी हो जाते हैं कि लगता है, अब आगे बढ़ने की कोई वजह ही नहीं बची।
लेकिन सच यह है कि इन्हीं पलों में हमारी सबसे बड़ी ताकत पैदा होती है।

टूटना हार नहीं—नई शुरुआत का संकेत है

पेड़ तब ज़्यादा मजबूत होता है जब आंधी उसे झकझोरती है। बिल्कुल वैसे ही, इंसान भी तब और गहराई से अपने भीतर की शक्ति पहचानता है जब जिंदगी उसे गिराने की कोशिश करती है।
आपका टूटना आपकी समाप्ति नहीं… आपके नए रूप का जन्म होता है।

सबसे अंधेरी रात के बाद ही सूरज निकलता है

ज़िंदगी की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यह कभी एक जैसी नहीं रहती।
जिस दिन लगता है कि अब सब खत्म हो गया—दरअसल वही दिन हमारी नयी शुरुआत का पहला कदम होता है।
बस, एक पल और रुककर… एक कोशिश और करके… इंसान चमत्कार कर सकता है।

आप बच गए—क्योंकि आप अभी अधूरे हैं

अगर आपने ऐसे वक्त पार किए हैं जहाँ जीना मुश्किल हो गया था, तो याद रखिए—
आप आज तक इसलिए बचे हैं, क्योंकि आपकी कहानी अभी पूरी नहीं हुई है।
आपका सफर अभी बाकी है।
आपके सपने अभी पूरे होने हैं।
और आप उन अनगिनत लोगों के लिए उम्मीद बनेंगे, जो आज उसी अंधेरे में भटक रहे हैं जहाँ कभी आप थे।

निष्कर्ष: आप जितना सोचते हैं, उससे कहीं ज़्यादा मजबूत हैं

ज़िंदगी कभी आसान नहीं रही और न रहेगी। पर हाँ—आप हर तूफान से बड़े हैं।
अगर आपने वो दिन देखे हैं जहाँ मरना ज़रूरी लगा… तो आज वही अनुभव आपको हर मुश्किल में जीतना सिखाएगा।

आप बचे हैं, इसलिए नहीं कि किस्मत मेहरबान थी, बल्कि इसलिए कि आप लड़ने लायक थे।
और लड़ने वाले कभी हारते नहीं—वे इतिहास बनाते हैं।



बुधवार, 19 नवंबर 2025

गायत्री मंत्र

 गायत्री मंत्र की सही पाठ-विधि, लाभ, सावधानियाँ और कुछ व्यावहारिक सुझाव सरल व वैज्ञानिक-दृष्टि से समझाए गए हैं।


🌼 गायत्री मंत्र

“ॐ भूर् भुवः स्वः
तत् सवितुर् वरेण्यं
भर्गो देवस्य धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात् ॥”


१️⃣ पाठ (जप) की विधि

(A) मंत्र जप से पहले

  • सुबह सूर्योदय के समय उत्तम, परन्तु दिन में किसी भी शांत समय जपा जा सकता है।
  • स्नान कर लें (यदि संभव न हो तो कम से कम हाथ-मुंह धो लें)।
  • शांत, स्वच्छ स्थान चुनें।
  • आसन पर बैठकर रीढ़ सीधी रखें।

(B) मंत्र जप के नियम

  • उच्चारण स्पष्ट और धीमी गति से करें।
  • मन में (मानसिक जप), धीमे स्वर में (उपांशु) या आवाज में (वाचिक)— कोई भी विधि ठीक है।
  • सामान्यत: जपसंख्या—
    • 108 जप (1 माला) साधारण नियम
    • 21, 51 या 108 बार प्रातः-संध्या
  • यदि सूरज की ओर ध्यान कर सकें तो अच्छा, पर अनिवार्य नहीं।

२️⃣ आचार्य परंपरा में शुद्ध उच्चारण (सरल रूप में)

  • भूर् = भूर्र
  • भुवः = भुवः
  • स्वः = स्वः (स्व: ह्विसर्ग के साथ)
  • वरेण्यं = व-रे-ण्यम्
  • धीमहि = धी-म-हि
  • प्रचोदयात् = प्र-चो-द-यात्

(गलत उच्चारण से दोष नहीं लगता, पर सही उच्चारण से प्रभाव गहरा होता है।)


3️⃣ मंत्र के आध्यात्मिक व मनोवैज्ञानिक लाभ

आध्यात्मिक / पारंपरिक लाभ

  • बुद्धि, विवेक, स्मृति व ज्ञान का विकास
  • मानसिक शुद्धि व विचारों की सकारात्मक दिशा
  • आत्मबल, धैर्य व आत्मविश्वास में वृद्धि
  • नकारात्मक शक्तियों/विचारों से रक्षा
  • शुभ संकल्पों की पूर्ति में सहायता

मनोवैज्ञानिक व वैज्ञानिक दृष्टि से लाभ

(1) ध्वनि-कंपन प्रभाव
गायत्री मंत्र की संरचना 24 अक्षरों पर आधारित है—
यह धीमी गति से जपने पर मस्तिष्क के कॉर्टेक्स और पैरासिम्पेथेटिक सिस्टम को शांत करता है।

(2) श्वास-नियंत्रण
जप के साथ समान गति की श्वास लेने से

  • तनाव हार्मोन कम होते हैं,
  • एकाग्रता बढ़ती है,
  • हृदय गति नियंत्रित होती है।

(3) सकारात्मक संकल्प और मानसिक स्वास्थ्य
नियमित मंत्र-जप ध्यान जैसी स्थिति बनाता है, जिससे

  • चिंता कम होती है,
  • मन में स्थिरता आती है,
  • नींद बेहतर होती है।

४️⃣ आचरण एवं सावधानियाँ

✔ क्या करें

  • जप करते समय शरीर व मन को शांत रखने का प्रयास।
  • जल्दबाजी न करें—मंत्र को “महसूस” करते हुए जपें।
  • यदि उच्चारण में गलती हो रही है तो मानसिक जप कर सकते हैं।
  • जप के बाद कुछ क्षण शांत बैठकर ध्यान करें।

✘ क्या न करें

  • क्रोध, तनाव या जल्दबाजी में जप न करें।
  • जप को दिखावे या सिद्धि के लिए न करें।
  • बहुत ऊँची आवाज़ में जप न करें—स्वर सहज होना चाहिए।
  • भोजन के तुरंत बाद जप न करें (यदि करना हो तो धीमे और सहज जप करें)।

५️⃣ अतिरिक्त सुझाव (यदि आप नियमपूर्वक करना चाहें)

  • “ॐ” का विस्तार 3–4 सेकंड में करें, बाकी मंत्र सामान्य गति में।
  • सूर्योदय के समय 5 मिनट सूर्य की कोमल किरणों की ओर देखकर (आँखें मींचकर) जप प्रभावी माना गया है।
  • प्रतिदिन 10–15 मिनट भी पर्याप्त है।

यदि आप चाहें तो मैं—

  • संक्षिप्त PDF बना सकता हूँ,
  • आपकी दिनचर्या के अनुसार जप-सारणी बना दूँ,
  • या सही उच्चारण का ऑडियो मार्गदर्शन भी टेक्स्ट के रूप में दे सकता हूँ।

क्या आप इनमें से कुछ चाहेंगे?

https://chatgpt.com/share/6993f298-f078-800b-8163-d376dbfbe921