रविवार, 2 अक्टूबर 2022

रसभरी

 Raspberry को 'रसभरी' भी कहा जाता है। यह एक बारहमासी फल है, जो स्वाद में लाजवाब होता है और कई रंगों में पाया जाता है जैसे – लाल, काले और बैंगनी। रास्पबेरी की सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसमें लगभग सभी फलों से ज्यादा एंटीऑंक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। रास्पबेरी में फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। इसके अलावा यह विटामिन-B, विटामिन C, मैंगनीज, फोलिक एसिड, तांबा और आयरन का भी अच्छा स्रोत है। इसमें बाकी फलों के मुकाबले ज्यादा मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो स्वास्थ के लिए कई तरह से फायदेमंद होता है।

रास्पबेरी एक रसदार फल होता है, जो गुलाब परिवार से संबंधित है।  इसमें भरपूर मात्रा में विटामिन-C और अन्य जरूरी पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जिस कारण यह बहुत ही गुणकारी फल माना जाता है। 

रास्पबेरी फ्रूट खाने के 5 फायदे : 

1. इम्यूनिटी को मजबूत करने के लिए खाएं रास्पबेरी

स्वादिष्ट रास्पबेरी खाने से शरीर की रोग प्रतिरोध क्षमता मजबूती के साथ बढ़ती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट बीमारियों से लड़ने वाले सेल्स को मजबूती प्रदान करता है।

2. वजन कम करने के लिए खाएं रास्पबेरी

बढ़ते वजन से परेशान लोगों को रास्पबेरी फल का सेवन जरूर करना चाहिए। इसमें मौजूद फाइबर और मैंगजीन शरीर का वजन कम करने में सहायक हैं। वजन कम करने का यह स्वादिष्ट और कारगर उपाय है।

3. आंखें की स्वास्थ्य के लिए खाएं रास्पबेरी

रास्पबेरी खाने से शरीर में विटामिन-A की कमी दूर होती है, जिससे आंखें तंदरुस्त रहती हैं। जिससे लम्बे समय तक व्यक्ति को दूर तक क्लीयर देखने में किसी भी तरह की समस्या नहीं आती।

4. हेल्दी हार्ट के लिए खाएं रास्पबेरी

रास्पबेरी खाने से दिल से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम रहता है। इसमें मौजूद एंथोसायनिन दिल की बीमारियों से जुड़ी सभी प्रकार की सूजन और अन्य खतरों को कम करने के लिए बहुत हद तक कारगर है।

5. झुर्रियों को हटाने के लिए खाएं रास्पबेरी

रास्पबेरी झुर्रियों को दूर करने में मदद कर सकता है। ये हानिकारक सूरज की किरणों से त्वचा की रक्षा करता है। 1 कप सादा दही और 2 कप ताजा रास्पबेरी को मिक्स करें, फिर जब तक मिश्रण पूरी तरह से चिकना नहीं हो जाता है, तब तक इसे मिक्स करते रहें। अपने पूरे चेहरे पर इस मिश्रण को लगाएं और 15 मिनट तक लगाकर रखें। फिर इसे गुनगुने पानी से धो लें। ऐसा करने से आपकी झुर्रियां धीरे-धीरे दूर हो जाएंगी।

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एल्डरबेरी क्या है?

 एल्डरबेरी क्या है?

एल्डरबेरी सबसे ज्यादा दवाइयों में इस्तेमाल होने वाले पौधों में से एक है। इसका वानस्पातिक नाम सैम्बूकस (Sambucus) है। देखने में ये बिल्कुल जामून जैसी लगती है। सदियों से अमेरीका के लोग एल्डरबेरी का इस्तेमाल इंफेक्शन को दूर करने के लिए करते आ रहे हैं। प्राचीन मिस्त्र के लोग इसका उपयोग त्वचा की रंगत सुधारने और घाव भरने के लिए करते हैं। एल्डरबेरी पेड़ के फूल और पत्तियों में भी ओषधीय गुण होते हैं। इसके फूल कैरोटीन, टैनिक, पैराफिन और कोलीन जैसे तत्वों का स्त्रोत हैं।

एल्डरबेरी के फूलों और पत्तियों को दर्द से राहत, सूजन और पसीना उत्पन्न करने के लिए प्रयोग किया जाता है। सूखी बेरी और जूस को इन्फ्लूएंजा, संक्रमण, स्कायटिका, सिरदर्द, दांत दर्द और हृदय दर्द के इलाज के लिए अच्छा माना जाता है। बेरी को पकाकर जूस, जैम, चटनी, पाई और वाइन भी बनाई जाती है।


एल्डरबेरी का उपयोग किसलिए किया जाता है? 

एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर

इसमें भरपूर मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो कोल्ड और कफ (सर्दी-जुकाम) को दूर करने के साथ इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने का काम करते हैं। कुछ लोग एल्डरबेरी को कोल्ड, फ्लू, स्वाइन फ्लू के लिए लेते हैं। इसे एचआईवी, एड्स के इलाज में और इम्यून सिस्टम को मजबूत करने के लिए भी लिया जाता है।

दर्द को करे दूर

एल्डरबेरी साइनस के कारण होने वाले दर्द, पैरों में दर्द, नर्व पेन और क्रॉनिक फटिग सिंड्रोम से भी राहत दिलाता है। इसका उपयोग आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें।

न्यूट्रिएंट्स से भरपूर

एल्डरबेरी विटामिन सी, डायटरी फाइबर, फिनोलिक एसिड, फ्लेवानोल और एंथोस्यानिस का अच्छा स्त्रोत है। यानी इसके सेवन से आपको ये सभी चीजें एक साथ मिल जाएंगी।

हृदय के अच्छे स्वास्थ्य के लिए

एल्डरबेरी दिल और रक्त वाहिका जो शरीर में रक्त का परिवहन करती हैं दोनों को स्वस्थ रखने में मदद गार है। कई शोधों में भी ये निष्कर्ष निकला है कि इसके जूस को पीने से खून में से फैट कम होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करता है। इसके अलावा, इसमें फ्लेवोनोइड और एंथोसायनिन जैसे कम्पाउंड भी होते हैं जो रक्तचाप को कम कर दिल संबंधित परेशानियों से कोसों दूर रखते हैं।

स्किन और बालों के लिए 

एल्डबेरी में एंटी एजिंग और फ्री रेडिकल फाइटिंग प्रॉपर्टीज होती हैं, जो स्किन को नैचुरल डिटॉक्सिफाई करता है। इससे स्किन पर किसी तरह के ब्रेकआउट, पिंप्ल और निशान नहीं होते हैं। ये दो मुंह बालों से लेकर स्कैल्प पर कोई परेशानी को दूर करने भी मददगार है। साथ ही बालों की ग्रोथ में भी सुधार करता है।

कब्ज के लिए 

एल्डरबेरी और दूसरी सामग्री के साथ बनाई गई चाय कब्ज की परेशानी से राहत दिलाता है।

इन बीमारियों में भी है मददगार

इसमें कैंसर-रोधक गुण होते हैं जो कैंसर से लड़ने में मदद करते हैं।

शरीर में मौजूद खतरनाक बैक्टीरिया से लड़ने में मददगार है।

यूवी रेडिएशन से कवच प्रदान करता है।

सही से यूरिन होना।

साइनस के दर्द में राहत।

साइटिका के भयानक दर्द को करे दूर।

कब्ज की समस्या को दूर करता है।

पित्ताशय की बीमारियों को।

मधुमेह के मरीजों के लिए लाभदायक ।

गुर्दे की सूजन को कम करता है।

त्वचा पर पड़ने वाली झुड़ियों से बचा जा सकता है।

स्किन से जुड़ी परेशानी दूर हो सकती है।

कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायक होता है।

कार्डियोवेस्कुलर डिजीज से बचने में है सहायक।

कैसे काम करता है एल्डरबेरी

एल्डरबेरी में हेमेग्लुटिनिन प्रोटीन (Haemagglutinin protein) होता है, जो कोशिकाओं में प्रवेश होकर वायरस को फैलने से रोकता है। अगर संक्रमण होने के बाद इसका सेवन किया जाए तो यह वायरस को फैलने से रोकता है। इससे इन्फ्लूएंजा के लक्षणों की अवधि भी कम होती है।

उपयोग

कितना सुरक्षित है एल्डरबेरी का उपयोग? 

एल्डरबेरी हमारे स्वास्थ्य के लिए वरदान की तरह है लेकिन, इसे सावधानी से लेना भी बहुत जरूरी है वरना यह आपके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है। एल्डरबेरी के जूस का लगातार 12 हफ्ते तक सेवन करना काफी हद तक सेफ है। इस बारे में कोई वैज्ञानिक जानकारी नहीं है कि अगर इसे लंबे समय तक लिया जाए तो ये कितना सुरक्षित है।

एल्डरबेरी की पत्तियां और कच्चा फल हानिकारक हो सकता है।।

प्रेग्नेंट महिलाएं और ब्रेस्ट फीडिंग कराने वाली महिलाएं इसका सेवन न करें।

जिन लोगों को पेट संबंधित परेशानी है वो भी इसे खाने से बचें।

अगर किसी को इसके सेवन से स्किन पर रैशेज और सांस लेने में दिक्कत हो रही है वो भी इसे एवॉइड करें। हो सकता है उन्हें इससे एलर्जी हो।

अगर आप किसी दूसरी दवाइयों का सेवन कर रहे हैं तो इसे लेने से पहले एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें। ये दवाइयों के प्रभाव को कम या बदल सकता है।

अगर आप ऑटोइम्यून बीमारियों या कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स से ग्रसित हैं तो भी इसका सेवन न करें।

नैचुरल चीजों को ऐसा सोचकर कि ये नुकसान नहीं करेगी इनका सेवन अधिक मात्रा में ना करें।

साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि सभी नैचुरल चीजें सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं होती हैं। इनका उपयोग भी आयुर्वेदिक एक्सपर्ट की सलाह पर ही करें।

एल्डरबेरी से मुझे क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

वैसे तो इसका सीमित मात्रा में सेवन करने से कोई नुकसान नहीं हैं, लेकिन इसे अधिक मात्रा में खाने से कुछ साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसे-

डायरिया की समस्या हो सकती है

पेट दर्द होने की संभावना बनी रहती है

जी मचलाना

रैशेज की समस्या

सांस लेने में दिक्कत होना

इन परेशानियों के साथ-साथ अन्य परेशानी भी हो सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से संपर्क करें। ये लक्षण किसी दूसरी कंडिशन के भी हो सकते हैं। इस बात का भी ध्यान रखें।

एल्डरबेरी की सही खुराक क्या है?

वैज्ञानिक अनुसंधान में निम्नलिखित खुराक का अध्ययन किया गया है-

फ्लू में एक चम्मच एल्डरबेरी जूस को तीन से पांच दिन तक पी सकते हैं। अगर आप एल्डरबेरी लोजेंज ले रही हैं तो 175 मिलीग्राम की टैबलेट को दो दिन तक चार बार लें।

हर्बल सप्लिमेंट्स की खुराक हर मरीज के लिए अलग होती है। ये मरीज की उम्र, सेहत और स्वास्थय पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लिमेंट्स हमेशा सेफ नहीं होते हैं। इसलिए हमेशा इन्हें लेने से पहले एक बार डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

उपलब्ध

एल्डरबेरी का उपयोग आंतरिक और बाहरी दोनों तरह से किया जाता है।

सिरप

लोशन

तरल अर्क

कैप्सूल

पाउडर

रिसर्च के अनुसार इसे कच्चा नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे शारीरिक परेशानी हो सकती है।

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नेट पर उपलब्ध जानकारी 



माका रूट

 माका रूट 

एक क्रूसिफेरस सब्‍जी माका- जिसके पौधे का मुख्‍य खाद्य हिस्‍सा इसकी जड़ होती है, जो कि जमीन के अंदर कंद के रूप में बढ़ता है। माका पौधे में 12 से 20 पत्तियां होती हैं। माका रूट विभिन्‍न प्रकार के रंग की हो सकती हैं जैसे लाल, बैंगनी, क्रीम, पीला या काला। यह 10 से 14 से.मी. लंबा और 3-5 सेमी चौड़ा हो सकता है। माका ठंडी जलवायु में अच्‍छी तरह से विकास करता है।

उपयोग

माका रूट पाउडर का उपयोग विभिन्‍न व्‍यंजनों में मिलाकर किया जा सकता है। अपने औषधीय गुणों के कारण माका ने अपनी विशेष पहचान बना ली है जो कि यौन स्‍वास्‍थ्‍य (Sexual health) को बढ़ावा देने के लिए उपयोग किया जाता है। माका रूट के और भी कई स्‍वास्‍थ्‍य लाभ हैं।माका रूट के औषधीय गुण और इनसे प्राप्‍त होने वाले स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के बारे में जानिए:

यौन इच्‍छा को बढ़ाने में

बांझपन (Infertility) को दूर करने

रक्‍तचाप कम करने में

ऊर्जा और सहनशक्ति को बढ़ाए

मनोदशा को सुधारने में

पुरुष प्रजनन क्षमता को बढ़ाए

रजोनिवृत्ति के लक्षणों को दूर करे

मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य के लिए

स्तंभन दोष को दूर करे

सेक्‍स ड्राइव बढ़ाए

डिप्रेशन को कम करने में

त्‍वचा के लिए लाभकारी

माका सबसे शक्तिशाली सुरक्षित सुपरफूड माना जाता है। यह कई लोगों के लिए मुख्य आहार होता है। यह ऊर्जा बढ़ाता है और इसमें मौजूद पोषण हड्डियों को मजबूत करते हैं।माका रुट के फायदे अनेक हैंऔर यह जड़ी-बूटी के रूप में भी उपयोग में आता है।

माका रूट कैसे काम करता है?

विटामिन और खनिजों की अच्‍छी मात्रा माका में मौजूद रहती है। माका की जड़ों में कार्बोस अच्‍छी मात्रा में होता है और इसमें वसा की मात्रा बहुत ही कम होती है। इस औषधीय जड़ में फाइबर के साथ-साथ आवश्‍यक विटामिन और खनिज (vitamins and minerals) जैसे विटामिन-सी, कॉपर और आयरन भी अच्‍छी मात्रा में होते हैं। इसके आलावा इसमें फैटी एसिड और एमिनो एसिड जैसे केमिकल्स होते हैं। फिर भी, यह कैसे काम करता है, इस बारे में ज्यादा अध्ययन मौजूद नहीं है। इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए आप किसी हर्बल विशेषज्ञ या फिर किसी डॉक्टर से संपर्क करें।

सावधानियां और चेतावनी

निम्नलिखित परिस्थितियों में इसका इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर या हर्बलिस्ट से सलाह लें:

यदि आप प्रेग्नेंट या ब्रेस्टफीडिंग करा रही हैं। दोनों ही स्थितियों में सिर्फ डॉक्टर की सलाह पर ही दवा खानी चाहिए।

यदि आप अन्य दवाइयां ले रही हैं। इसमें डॉक्टर की लिखी हुई और गैर लिखी हुई दवाइयां शामिल हैं, जो मार्केट में बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के खरीद के लिए उपलब्ध हैं।

यदि आपको माका के किसी पदार्थ या अन्य दवा या औषधि से एलर्जी है।

यदि आपको कोई बीमारी, डिसऑर्डर या कोई अन्य मेडिकल कंडिशन है।

यदि आपको फूड, डाई, प्रिजर्वेटिव्स या जानवरों से अन्य प्रकार की एलर्जी है।

माका का इस्तेमाल करने से पहले इसके खतरों की तुलना इसके फायदों से जरूर की जानी चाहिए। इसकी अधिक जानकारी के लिए अपने हर्बलिस्ट या डॉक्टर से सलाह लें।

माका कितना सुरक्षित है?

आमतौर पर भोजन में पाए जाने वाली माका की मात्रा ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित है। इसे दवा के रूप में अनुशंषित रूप में- ३ ग्राम प्रतिदिन की मात्रा में,उपयोग करना भी ज्यादातर किस्सों में सुरक्षित है।

विशेष सावधानियां और चेतावनी

अपने औषधीय गुणों और स्‍वास्‍थ्‍य लाभों के कारण माका को आमतौर से सुरक्षित माना जाता है, लेकिन अधिक मात्रा में इसका सेवन करने से कुछ नुकसान हो सकते हैं।


ताजा माका:

जानकारों का मानना है कि ताजा माका का इस्तेमाल करने से स्‍वास्‍थ्‍य में प्रतिकूल प्रभाव हो सकता है। इसलिए इसका सेवन करने से पहले इसे उबालने (boiling) की सलाह दी जाती है।


थायरॉइड:

यदि आपको थॉयराइड है तो आपको माका के सेवन से बचना चाहिए।


गर्भावस्था और स्तनपान:

गर्भवती और स्‍तनपान कराने वाली महिलाओं को माका जड़ का सेवन करने से पहले अपने डॉक्‍टर से संपर्क करना चाहिए।


अन्य दवा:

यदि आप किसी विशेष प्रकार की दवाओं का सेवन कर रहे हैं, तो माका रूट का सेवन करने से पहले स्‍वास्‍थ्‍य सलाहकार से जरूर संपर्क करें।


ब्रैस्ट कैंसर, गर्भाशय का कैंसर, डिम्बग्रंथि का कैंसर,गर्भाशय के एंडोमेट्रियोसिस और गर्भाशय फाइब्रॉइड जैसी हॉर्मोन सेंसेटिव स्थिति:

माका के कुछ एक्सट्रैक्ट एस्ट्रोजन की तरह काम करते हैं। यदि आपको इनमे से कोई भी ऐसी बीमारी है, जो एस्ट्रोजन के संपर्क से और बिगड़ सकती है, तो माका का उपयोग न करें।


साइड इफेक्ट्स

माका से मुझे क्या साइड इफेक्ट्स हो सकते हैं?

उच्च मात्रा में और रोजाना साबुत माका लेने से थायरॉइड पर प्रतिकूल असर हो सकता है।

हालांकि, हर किसी को ये साइड इफेक्ट हो ऐसा जरूरी नहीं है, कुछ ऐसे भी साइड इफेक्ट हो सकते हैं, जो ऊपर बताए नहीं गए हैं। अगर आपको इनमें से कोई भी साइड इफेक्ट महसूस हो या आप इनके बारे में और जानना चाहते हैं, तो नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।


रिएक्शन


आपकी अन्य मौजूदा चिकित्सा स्थिति या दवा पर माका का क्या प्रभाव हो सकता है, इस बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। यदि आप किसी दवा के साथ माका का प्रयोग करना चाहते हैं, तो अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें।



डोसेज


आप इसे किसी पूरक की तरह किसी भी मात्रा में उपयोग कर सकते हैं जैसे कि खाने में ऊपर से डालकर, दलिया, बेक्‍ड मील या अन्‍य प्रकार के खाद्य पदार्थों में वैकल्पिक रूप से इसका उपयोग कर सकते हैं।

औषधीय उपयोग के लिए इसकी निश्चित खुराक निर्धारित नहीं की गई है। हालांकि,अध्‍ययनों द्वारा ज्ञात होता है कि सामान्‍य रूप से माका को प्रतिदिन 1.5-5 ग्राम तक सेवन किया जा सकता है।

इस हर्बल सप्लिमेंट की खुराक हर मरीज के लिए अलग हो सकती है। आपके द्वारा ली जाने वाली खुराक आपकी उम्र, स्वास्थ्य और कई चीजों पर निर्भर करती है। हर्बल सप्लिमेंट हमेशा सुरक्षित नहीं होते हैं। इसलिए सही खुराक की जानकारी के लिए हर्बलिस्ट या डॉक्टर से चर्चा करें।

उपरोक्त जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हो सकती। इसका इस्तेमाल करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या हर्बलिस्ट से सलाह लें।


माका किन रूपों में आता है?

माका रुट का पाउडर

कैप्सूल

दवा

पीला माका 

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नेट पर उपलब्ध जानकारी 





जिनसेंग

जिनसेंग 

जीनस पैनाक्स (genus panax) नामक पौधे की जड़ को जिनसेंग कहा जाता है। इसका स्वाद कड़वा और मसालेदार होता है। यह पौधा अरिलियासी (Araliaceae) परिवार से संबंध रखता है। बताया जाता है कि दुनिया में जिनसेंग की करीब 11 प्रजातियां मौजूद हैं।  मुख्य रूप से जिनसेंग के पांच प्रकार अधिक चलन में हैं, जिन्हें एशियाई जिनसेंग, अमेरिकी जिनसेंग, साइबेरियाई जिनसेंग, भारतीय जिनसेंग व ब्राजील जिनसेंग के नाम से जाना जाता है। जिनसेंग एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है 

जिनसेंग के फायदे 

जिनसेंग एक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी होने के कारण यह शरीर पर कई तरह के लाभ पहुंचा सकती है, जिनमें यह शामिल है:

1. ऊर्जा के स्तर में सुधार

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित एक वैज्ञानिक शोध की मानें, तो जिनसेंग एक बेहतरीन एनर्जी बूस्टर के तौर पर काम कर सकता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्व थकान जैसे विकारों को दूर कर शरीर में ऊर्जा का संचार कर सकते हैं। इसलिए, इसका उपयोग उन लोगों के शारीरिक और मानसिक सुधार के लिए किया जा सकता है, जिनमें एनर्जी की कमी के कारण निर्जीवता का एहसास पैदा हो जाता है । अभी इस संबंध में कम ही वैज्ञानिक अध्ययन हुआ है, इसलिए शारीरिक कमजोरी के मामले में इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

2. कैंसर में लाभकारी

जिनसेंग के उपयोग से कैंसर की समस्या से बचा जा सकता है। साथ ही यह कैंसर के कुछ लक्षण से भी राहत दिलाने का काम कर सकता है। इससे जुड़े एक वैज्ञानिक शोध में दिया हुआ है कि इसके उपयोग से कैंसर की स्थिति में होने वाले थकान से राहत मिल सकती हैं। यह वैज्ञानिक शोध एनसीबीआई की साइट पर उपलब्ध है । वहीं, एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, जिनसेंग में एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं, जो कैंसर से बचाने का काम कर सकता है । साथ ही जिनसेंग कैंसर का कोई सटीक इलाज नहीं है। इसलिए, अगर किसी को कैंसर है, तो डॉक्टरी इलाज को मान्यता दें।

3. वजन घटाने में मददगार

वजन घटाने के लिए भी जिनसेंग को इस्तेमाल में लाया जा सकता है। इसमें एंटी-ओबेसिटी गुण होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि जिनसेंग शरीर में पाचन क्रिया को मजबूत बनाने का काम कर सकता है। साथ ही यह शरीर पर अतिरिक्त वसा को चढ़ने नहीं देता और वजन घटाने में लाभकारी सिद्ध होता है । 

4. डायबिटीज में मिलता है आराम

खाना खाने से दो घंटे पूर्व 3 ग्राम जिनसेंग का सेवन भोजन के बाद टाइप-2 डायबिटीज के रोगी में बढ़ने वाली रक्त शर्करा की मात्रा को कंट्रोल कर सकता है। वहीं, कुछ मामलों में यह भी पाया गया है कि भोजन से पहले जिनसेंग का सेवन करने से कोई फर्क नहीं पड़ता है। दूसरी तरफ विशेषज्ञों का मानना है कि अलग-अलग जिनसेंग उत्पादों के प्रभाव भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। इसका कारण उनमें पाए जाने वाले रसायन हैं, जिन्हें जिनसिनोसाइड्स कहा जाता है ।

5. यौन रोग में सुधार

एनसीबीआई की वेबसाइट पर पब्लिश एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, जिनसेंग के गुण यौन शिथिलता में मददगार साबित हो सकते हैं । इसलिए, इसे हर्बल वियाग्रा भी कहा जाता है। बता दें कि इसमें जिनसिनोसाइड्स मौजूद होता है, जो नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को बढ़ाकर लिंग में रक्त प्रवाह को बढ़ावा दे सकता है। साथ ही कामेच्छा को भी प्रेरित कर सकता है। वहीं, कुछ शोध से इस बात का भी प्रमाण मिलता है कि जिनसेंग को पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन (पुरुषत्व बढ़ाने वाला हार्मोन) के स्तर को गति देने के लिए भी उपयोग में लाया जा सकता है ।

6. मानसिक क्षमता का विकास

शोधकर्ताओं के मुताबिक, जिनसेंग का उपयोग इंसान में दिमागी क्षमता को बढ़ावा दे सकता है । वहीं, एक शोध में पाया गया है कि इसकी सहायता से अल्जाइमर के लक्षण यानी याददाश्त कमजोर होने की बीमारी को भी काफी हद तक सुधारा जा सकता है । यहीं कारण है कि जिनसेंग के लाभ मानसिक विकास के लिए हो सकते हैं।

7. तनाव को करता है मुक्त

जिनसेंग के लाभ तनाव मुक्ति के लिए भी हो सकते हैं। इस संबंध में किए गए एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि यह तनाव को कम कर दिमागी क्षमता के विकास को बढ़ा सकता है । इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि तनाव के घरेलू इलाज के रूप में भी इसका उपयोग किया जा सकता है।

8. प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार

एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित जिनसेंग को लेकर किए गए शोध में शोधकर्ताओं ने इस बात का भी पता लगाया है कि इसका उपयोग कई संक्रामक बीमारियों से निजात दिलाने में कारगर साबित हो सकता है। दरअसल, जिनसेंग में इम्युनोस्टिमुलिटरी प्रभाव पाए जाते हैं, जो रेजिस्टेंस बूस्टर की तरह काम कर सकता है। इससे संक्रामक बीमारियों को फैलाने वाले वायरस के खिलाफ लड़ने के लिए शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ावा मिल सकता है ।

9. बुढ़ापा की समस्या को कम करने के लिए

जिनसेंग के गुण में एक खासियत यह भी है कि इसे बुढ़ापे की समस्याओं को कुछ हद तक कम करने वाली औषधि के रूप में जाना जाता है। इस संबंध में हुए एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, जिनसेंग में एंटी एजिंग प्रभाव होते हैं, जो समय से पहले बढ़ते उम्र के लक्षण को आने से रोक सकते हैं। साथ ही जिनसेंग का सूजन प्रतिरोधक गुण उम्र बढ़ने के साथ होने वाले त्वचा संबंधी विकार जैसे- झुर्रियां, दाग-धब्बे और बेजान त्वचा पर कुछ असरदार साबित हो सकता है। इसका उपयोग त्वचा की समस्या को कम करने के लिए बेहतर माध्यम साबित हो सकता है ।

10. सूजन से लड़ने में सक्षम

जिनसेंग के फायदे में एक चमत्कारी फायदा यह भी शामिल है कि यह इंफ्लेमेशन यानी सूजन से जुड़ी समस्या को कम करने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रेड जिनसेंग में पाए जाने वाले यौगिकों में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो इंफ्लेमेशन की समस्या से निजात दिला सकते हैं ।

11. फेफड़े का कार्य

फेफड़ों से जुड़ी कई समस्या एक तरह का इंफ्लेमेटरी विकार हो सकता है, जिससे छुटकारा पाने में जिनसेंग मददगार हो सकता है। दरअसल, इसमें जिनसेनोसाइड्स गुण पाए जाते हैं, जो एंटी इंफ्लेमेटरी के रूप में काम कर सकते हैं। इससे लंग्स की समस्या से राहत मिल सकती है ।

12. मासिक धर्म से जुड़ी समस्याओं में कारगर

मासिक धर्म के दौरान महिलाओं में तनाव और पेट में होने वाली पीड़ा के लिए रेड जिनसेंग बेहतर आयुर्वेदिक उपचार साबित हो सकता है। इस संबंध में किए गए वैज्ञानिक शोध के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि जिनसेंग के गुण इतने खास हैं कि इसके सेवन से महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान होने वाली तकलीफों में भी राहत मिल सकती है। वहीं, शोध के दौरान इसके सेवन से किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव देखने को नहीं मिला ।

13. बालों का रखे ख्याल

जिनसेंग में पाए जाने वाले खास यौगिक बालों के विकास और स्वस्थ स्कैल्प को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकते हैं। जिनसेंग में पाए जाने वाले जिनसेनोसाइड्स बालों को झड़ने से बचाते हैं और उनकी जड़ों को मजबूती प्रदान करने का काम कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, जिनसेंग के प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर करने वाले गुण बालों के स्वास्थ्य को बरकरार रखने में मददगार साबित हो सकते हैं

जिनसेंग में पाए जाने वाले सभी पोषक तत्व 

पोषक तत्व मात्रा प्रति 100 G

ऊर्जा 100 kcal

कार्बोहाइड्रेट 20 g

शुगर 20 g

जिनसेंग का उपयोग – 

जिनसेंग के चमत्कारी फायदों का लाभ पाने के लिए इसे उपयोग करना बेहद ही आसान है। जिनसेंग पाउडर, जड़ और कैप्सूल के रूप में उपलब्ध है, जिसे कई तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं। इनमें से कुछ के बारे में नीचे बता रहे हैं।

कैसे और कब करें सेवन:

जिनसेंग पाउडर या जड़ की चाय बनाकर सुबह या शाम को पी सकते हैं।

जिनसेंग को काफी बनाने के लिए भी उपयोग कर सकते हैं, जिसे सुबह की शुरुआत या शाम में सेवन कर सकते हैं।

इसे चिकन सूप बनाने में भी इस्तेमाल किया जाता है, जिसे ब्रेकफास्ट या शाम के स्नैक के साथ ले सकते हैं।

जिनसेंग पाउडर का सेवन किया जा सकता है।

इसे कैप्सूल के रूप में भी ले सकते हैं।

कितना करें सेवन: 

इसकी दिनभर में 2 से 3 ग्राम मात्रा ली जा सकती है, लेकिन इसे एक साथ न लेकर दिनभर में 3 से 4 बार लिया जा सकता है। बता दें कि इसका निरंतर 3 से 4 सप्ताह तक उपयोग किया जा सकता है। वहीं, इसके सेवन की निरंतरता इस बात पर भी निर्भर करती है कि इसे किस उपयोग के लिए लिया जा रहा है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञों की सलाह आवश्यक है ।


जिनसेंग का चयन कैसे करें और लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें?

कई लोगों के लिए जिनसेंग का चयन और उसे लंबे समय तक सुरक्षित रखना एक बड़ा टास्क बन जाता है। इसलिए, हम उनके लिए कुछ आसान टिप्स दे रहे हैं।

जिनसेंग का चयन:

जिनसेंग की जड़ अधिक सुखा न हो।

इसके जड़ में अधिक जगह पर गांठें नहीं होनी चाहिए।

जिनसेंग में जगह-जगह पर कट न लगा हो।

इसमें दाग धब्बे न लगे हों।

अगर कोई जिनसेंग पाउडर खरीदना चाह रहा है, तो उसे विश्वसनीय दुकान से खरीदें, क्योंकि इसका नकली पाउडर भी बाजार में उपलब्ध है। इसे खरीदते समय एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। वहीं, इसे हमेशा एयरटाइट डिब्बे में रखना चाहिए।

जिनसेंग के नुकसान 

आइए, नजर डालते हैं उन स्थितियों पर जिनमें जिनसेंग के नुकसान होने की आशंका सबसे ज्यादा होती है ।

कुछ मामलों में जिनसेंग का उपयोग दुष्परिणामों को प्रदर्शित कर सकता है, जैसे- सिरदर्द, पाचन और नींद से संबंधित समस्याओं का होना। यह जिनसेंग के नुकसान में शामिल है।

गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिला को यह औषधि लेने से बचना चाहिए। उन पर जिनसेंग के नुकसान नजर आ सकते हैं।

हाई बीपी और हृदय संबंधी बीमारियों से ग्रस्त व्यक्ति बिना डॉक्टर की सलाह के जिनसेंग का सेवन न करें।

अगर कोई शुगर की दवा ले रहा है, तो उसे जिनसेंग का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह पर ही करें। हो सकता है कि इसके सेवन से ब्लड शुगर काफी कम हो जाए।

जिनसेंग के साथ किसी अन्य दवा या खाद्य पदार्थ का सेवन न करें।

जिनसेंग ऐसी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है, जिसके सेवन से शरीर को स्वस्थ रखा जा सकता है। यहीं नहीं जिनसेंग के फायदे भी कई हो सकते हैं, जिसके बारे में हमने ऊपर लेख में बताया है। हां, अगर कोई गंभीर समस्या से जूझ रहा है, तो इसका सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी लेनी चाहिए। 

आधार 

नेट पर उपलब्ध जानकारी 




मैंगोस्टीन क्या है?

मैंगोस्टीन (Mangosteen) 

मैंगोस्‍टीन (Mangosteen) एक फल है। जिसका वैज्ञानिक नाम गार्सिनिया मैंगोस्टाना (Garcinia mangostana) है। यह एक उष्णकटिबंधीय फल है जिसका स्वाद थोड़ा खट्टा-मीठा होता है। मैंगोस्टीन (Mangosteen) को फलों की रानी भी कहा जाता है। यह बैंगनी रंग का होता है। इसे दूसरे नामों से भी जाना जाता है। हिंदी में इसे मैंगोस्टीन कहा जाता है। तेलुगु में ‘इवारुममिडी’ (Ivarumamidi) कहते हैं, बंगाली में ‘काओ'(Kao), मलयालम में ‘कट्टम्पी'(Kaattampi), कन्नड़ में ‘मुरुगला हन्नू’, गुजराती में ‘कोकम’ के नाम से जाना जाता है। मैंगस्‍टीन सेहत के लिहाज से अच्छा फल है। इसमें सभी प्रकार के पोषक तत्‍व और खनिज पदार्थ पाए जाते है। मैंगोस्टीन ब्लड प्रेशर, कैंसर को रोकने और कोलेस्‍ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए इसका प्रयोग किया जाता है। इसके फल के साथ पपड़ी, टहनी और छाल का उपयोग औषधि के रूप में किया जाता है।

यह फल मुख्य रूप से दक्षिण पूर्व एशिया और भारत मे केरला राज्य मे पाया जाता है। इसका पेड़ 6 मीटर से लेकर 25 मीटर तक लंबा हो सकता है। इसके फल का इस्तेमाल मिठाई बनाने के लिए भी किया जाता है।

ये कैसे काम करता है?

मैंगोस्टीन (Mangosteen) में टैनिन पाया जाता है। टैनिन डायरिया के इलाज में काम आता है। वहीं, इसमें जैनथोंस पाया जाता है, जिसमें एंटीबायोटिक, एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं। इसलिए इसका प्रयोग यूरेनरी ट्रैक इंफेक्शन के इलाज में भी किया जाता है। पारंपरिक चिकित्सा में इस पौधे के अनेक भागो का इस्तेमाल किया जाता है। जो स्किन इंफेक्शन, घाव, पेचिश, टीबी, कैंसर, गठिया रोग और आंत से जुड़ी समस्याओं के इलाज में मददगार होता है। इसके साथ ही, इस फल का इस्तेमाल इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाने और मेंटल हेल्थ को बेहतर बनाने के लिए भी किया जाता है।

इसके अलावा, कुछ लोग इस फल को सीधा स्किन से जुड़ी समस्याओं जैसे एग्जिमां के लिए भी इस्तेमाल करते हैं। आमतौर पर इसका इस्तेमाल मिठाई बनाने और जाम बनाने के लिए किया जाता है। हालांकि, आप इसका इस्तेमाल हेल्थ ड्रिंक के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है। इससे बनाए गए जूस को मार्केट में “जैंगो जूस” के नाम से बेचा जाता है। कुछ मार्केटर्स का दावा है कि जैंगो जूस दस्त, मासिक धर्म की समस्याओं, मूत्र पथ के संक्रमण, टीबी और अन्य कई प्रकार का इलाज कर सकता है। हालांकि, इन बातों की पुष्टि करने के लिए अभी कोई उचित अध्ययन नहीं हुए हैं।

कैंसर की रोकथाम में मददगार हो सकता है

इस फल के रस, प्यूरी या छाल का इस्तेमाल कैंसर के उपचार के लिए प्रभावी होता है। 

 इसके अलावा मैंगोस्टीन (Mangosteen) में पोषक तत्वों की भरमार है। एक कप मैंगोस्टीन (Mangosteen) में ये पोषक तत्व पाए जाते हैं।

कैलोरी : 143

कार्बोहाइड्रेट : 35 ग्राम

फाइबर : 3.5 ग्राम

फैट : 1 ग्राम

प्रोटीन की मात्रा : 1 ग्राम

विटामिन-सी : 9% RDI (Recommended Daily Intake)

विटामिन-बी9 : 15% RDI

विटामिन-बी1 : 7% RDI

विटामिन-बी 2 : 6% RDI

मैगनीज : 10% RDI

कॉपर : 7% RDI

मैग्नीशियम : 6% RDI

उपयोग

इसका उपयोग किस लिए किया जाता है?

मैंगोस्टीन का उपयोग (Mangosteen) कई तरह के रोगों में किया जाता है। इसमें सबसे ज्यादा एंटी-ऑक्‍सीडेंट पाए जाते हैं। इसमें प्राकृतिक रूप से पॉलीफेनोल (polyphenol) पाया जाता है जो जैंथोन के नाम से जाना जाता है। मैंगोस्‍टीन (Mangosteen) में जेन्‍थोन्‍स-एल्‍फा मैंगोस्‍टीन और गामा मैंगोस्‍टीन होते हैं। ये तनाव को कम करने के काम आता है। ये एंटीऑक्‍सीडेंट शरीर को कई प्रकार के इंफेक्शन से बचाते हैं। साथ ही हृदय रोग, सर्दी और कैंसर का रिस्क कम करने में मदद करता है। इसके अलावा मैंगस्टन इन समस्याओं के लिए भी फायदेमंद होता है :

पेचिश

डायरिया

यूरेनरी ट्रैक इंफेक्शन (UTIs)

सूजाक (Gonorrhea)

थ्रश (Thrush)

एक्जिमा (Eczema)

पीरियड्स में अनियमितता (Menstural Disorder)

अल्‍जाइमर रोग (Alzheimer’s Disease)

मसूड़ों संबंधी समस्‍या

मैंगोस्टीन (Mangosteen) कैसे खाएं?

मैंगोस्टीन (Mangosteen) हर जगह नहीं मिलता है। यह एक मौसमी फल है और यह सिर्फ गर्मियों में होता है। इसलिए इसकी उपलब्धता काफी सीमित है। आपके इसे विशेष एशियाई बाजारों से खरीद सकते हैं। ये जमे हुए या डिब्बे में बंद रूपों में भी बाजार में मौजूद है। मैंगस्टन का छिलका चिकना और गहरे बैंगनी रंग का होता है। जो खाने योग्य नहीं होता है। इसे आप चाकू के जरिए आसानी से हटा सकते हैं। इसके अंदर सफेद और रसदार गूदा होता है। आप गूदे का सेवन कर सकते हैं।

सावधानियां और चेतावनियां

मैंगोस्टीन का उपयोग करना पूरी तरह सुरक्षित है। मैंगोस्टीन के फायदे एक नहीं बल्कि अनेक हैं। बस इसे गर्भवती महिला और कुछ विशेष दवाओं का सेवन करने वालों को खाने से बचना चाहिए। इसके अलावा, ज्यादा मात्रा में इस फल का सेवन करने से आपको पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को मैंगोस्टीन (Mangosteen) से एलर्जी भी हो सकती है। वहीं, गर्भवती महिलाओं द्वारा सेवन करने से भ्रूण को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए अगर आप इस फल का सेवन कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर या हर्बलिस्ट से बात जरूर कर लें।

मैंगोस्टीन का उपयोग कितना सुरक्षित है?

मैंगोस्टीन (Mangosteen) का प्रयोग हर उम्र के लोगों के लिए सुरक्षित है। लेकिन, इसका मतलब ये नहीं है कि इसका सेवन ज्यादा से ज्यादा किया जाए। निश्चित मात्रा का सेवन आपके लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इसलिए सेवन से पहले डॉक्टर या हर्बलिस्ट की राय ले लें।

साइड इफेक्ट्स

मैंगोस्टीन (Mangosteen) का अधिक सेवन करने से कुछ साइड इफेक्ट्स भी सामने आए हैं :

पाचन संबंधी समस्‍याएं

दस्‍त या पेट दर्द की समस्‍या

रक्त के थक्के बनने की प्रक्रिया को धीमा कर सकते हैं

मैंगोस्टीन (Mangosteen) के साथ मुझ पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?

मैंगस्टीन में एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है। यदि आप कीमोथेरेपी ले रहे हैं तो दवाओं के साथ इसका सेवन आपके शरीर पर प्रभाव डाल सकता है। इसके अलावा, हिस्टामिन रोधी (anti-histamines) दवाओं के साथ इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए।

डोसेज

मैंगोस्टीन (Mangosteen) की सही खुराक क्या है?

मैंगोस्टीन (Mangosteen) की खुराक के बारे में कोई खास वैज्ञानिक साक्ष्य नहीं है। लेकिन, इसका सेवन उम्र, स्वास्थ्य स्थिति आदि के आधार पर करना चाहिए। इसलिए आप अपने डॉक्टर या हर्बलिस्ट से बात कर के ही मैंगोस्टीन का सेवन करें।

उपलब्ध

मैंगोस्टीन (Mangosteen) निम्न रूपों में उपलब्ध हैः

जूस

फल

डिब्बे में बंद टुकड़े

आधार

नेट पर उपलब्ध जानकारी।



बुधवार, 28 सितंबर 2022

वह केवल मेरे मजे ले रहा था...

इस बात में कोई दो राय नहीं कि टीनएज में हम अक्सर प्यार में पड़ जाते हैं। किसी के संग दो-चार मुलाकातों में ही हम उसे अपना जीवनसाथी बनाने का सपना देखने लगते हैं। लेकिन कुछ चीजें ऐसी भी होती हैं, जिन पर हमारा कभी ध्‍यान नहीं जाता। यह चीजें न केवल हमें एक वक्त के बाद समझ आती हैं बल्कि कभी-कभार हमारे पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं रहता।

'वह केवल मेरे मजे ले रहा था... काश! 30 की होने से पहले मुझे पता चल पाती ये बातें, तो मेरा दिल नहीं टूटता।'

जीवन में अगर हमें सब कुछ पहले ही पता चल जाता, तो शायद कभी किसी का दिल नहीं टूटता। ऐसा इसलिए क्योंकि कुछ चीजें हम उम्र के साथ-साथ अपने अनुभवों से ही सीखते हैं। हमारे अनुभव न केवल हमें एक सफल व्‍यक्ति के रूप में विकसित होने में मदद करते हैं बल्कि इनसे हमें जिंदगी में आगे बढ़ने के तौर-तरीके भी पता चलते हैं। मेरा यह अनुभव प्‍यार से संबंधित था। मैं एक ऐसे शख्स के जाल में फंस गई थी, जिसने मुझे बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। मैं उससे बहुत ज्यादा प्यार करती थी। मैंने कभी नहीं सोचा था कि वह मेरे साथ इतना बुरा भी कर सकता है।

मैं हमेशा से ही उसकी हरकतों से अंजान थी। ऐसा इसलिए क्योंकि मैं बुरी तरह उसके प्‍यार में दीवानी थी। लेकिन आज जब मैं मैच्‍योर हो गई हूं, तब जाकर मुझे एहसास होता है कि मैंने बेकार में ही उस पर अपना वक्‍त जाया किया। हालांकि, इसमें मेरी गलती भी नहीं है। ऐसा इसलिए क्योंकि 30 साल से कम उम्र की लड़कियाें के साथ अक्‍सर ऐसा हो जाता है। मेरी कहानी से शायद उन लड़कियाें को थोड़ी मदद मिल सकती है।

वह मुझे बहुत प्यार करता था। जब भी मैं रोती थी, मुझ पर बहुत लाड लड़ता था। यह सब कुछ मेरे लिए एक ब्यूटीफुल ड्रीम की तरह था। मैंने बस देखा कि मैं उसके प्‍यार में बहुत बदल गई थी। मैं पहले से ज्यादा खुश रहने लगी थी। इस दौरान जो एक चीज मैं नहीं देख पाई, वो यह कि वह बिल्कुल भी एक व्यावहारिक व्‍यक्ति नहीं था।

दरअसल, जब आप किसी से प्‍यार करते हैं, तो आप चाहते हैं कि वह हमेशा आपके साथ रहे। लेकिन कहते हैं ना कि प्‍यार अंधा होता है। प्‍यार में सोचने समझने की शक्ति कमजोर हो जाती है। मेरे साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ।

वह हर डेट पर मुझे सरप्राइज देता था। मेरी पसंद का शो देखता था, मेरी पसंद उसके लिए सबसे पहले थी। वह मुझसे मिलने के लिए ऑफिस के बाद अपने घर से 20 मिनट दूर बस से उतरता था। मुझे लगता था कि यही मेरा ड्रीम मैन है।

जब अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल में थी, तब मुझे ऐसा लगता था कि मेरी शेक्सपियर वाली लव स्‍टोरीज सच हो रही हैं। लेकिन मैं नहीं जानती थी कि यह सब केवल दिखावा है, जो वक्त के साथ बदल जाएगा। सच कहूं तो वह केवल मेरे मजे ले रहा था।

मुझे आज भी अच्छे से याद है कि जब मैं उसे डेट कर रही थी, तो मैं बहुत ज्यादा सिंपल कपड़े पहनती थी। हालांकि, वह बहुत पैसे वाला था। उसके पास न केवल अपना घर-मकान था बल्कि उसका समाज में रूतबा भी अच्छा खासा था। ऐसे में जिस दिन मैंने उसे बताया कि हम किराए के फ्लैट में रहते हैं, वह आदमी मुझे दो दिन में ही छोड़कर भाग गया।

उस दिन मुझे समझ आया कि ऐसे लोग भले पांडा की तरह क्‍यूट दिख सकते हैं। लेकिन यह आपके जीवन में धीमे जहर की तरह होते हैं। वह हर समय आपके साथ प्‍यारा व्‍यवहार करते हैं। उनके अंदर आपको मैच्‍योरिटी जरा भी नहीं दिखती। ऐसे लोगों से बचना चाहिए। इन लोगों के बारे में हम तब तक नहीं जान पाते, जब तक की हम 30 के न हो जाएं।

कोई आदमी आपसे प्यार कर सकता है, लेकिन जरूरी नहीं कि वह जीवनभर आपको खुश रख सके। सच्‍चे प्‍यार के अलावा भी जीवन में बहुत कुछ होता है। एक बार जब आप 30 के हो जाते हैं और थोड़ी मैच्‍योरिटी आ जाती है, तब आपको पता चलता है कि आप कितने बेवकूफ थे।

अगर वह कहे कि उसके जीवन का मकसद आपको खुश रखना है और आपकी बाहों में मरना है, तो उसके प्यार में पागल न हो जाएं। उससे उसकी महत्‍वकांक्षाओं के बारे में भी बात करें। अगर वह इन मुद्दों पर बात नहीं करता है, तो समझ लें कि वास्‍तव में आपने जीवन में बहुत गलत आदमी को चुन लिया है।

Authored by Tina 

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मंगलवार, 27 सितंबर 2022

द्वारका

 परमात्मा श्रीकृष्ण आनन्द स्वरूप हैं। निराकार आनन्द ही नराकार श्रीकृष्ण के रूप में प्रकट हुआ है। श्रीकृष्ण की सारी लीला आनन्दमय है। श्रीकृष्ण की कथा जब कभी सुनें, तब आनन्द आता है। प्रभु का दर्शन जब भी करो, तब नया ही आनन्द मिलता है। श्रीकृष्ण का स्मरण जब करो, तब नया ही आनन्द मिलता है।

कंस जब तक जीवित था, तब तक व्यासजी ने भागवत में उसकी रानियों का नाम नहीं दिया था। उसके मरने के बाद उनका नाम दिया गया है।  कंस की दो रानियों का नाम है अस्ति और प्राप्ति । अस्ति और प्राप्ति का पति कंस है। अस्ति अर्थात् बैंक में इतना रुपया जमा है। प्राप्ति का अर्थ है कि इस वर्ष इतने रुपये आने वाले हैं। यह सुख मुझे मिला है और यह सुख मुझे भोगना है। सभी जानते हैं कि आत्मा इस शरीर से भिन्न है। इसलिए आत्मा का आनन्द भी भिन्न होना चाहिए। फिर भी मनुष्य का अधिकाँश जीवन शरीर और इन्द्रिय का सुख भोगने में ही बीतता है। सुख की इच्छा तो सभी को होती है, किन्तु मनुष्य सच्चे सुख का विचार नहीं करता। यही कंस का स्वरूप है। कंस के मरने के बाद उसकी दोनों रानियाँ अपने पीहर चली गईं। उन्होंने अपने पिता जरासन्ध को मथुरा की सारी घटनायें बता दीं। जरासन्ध ने श्रीकृष्ण को अपना बैरी मान लिया। जरासन्ध ने तेईस अक्षौहिणी सेना एकत्र कर मथुरा पर चढ़ाई कर दी। प्रभु ने बलरामजी से कहा कि बड़े भाई, आप जरासन्ध को मारिए मत। श्रीकृष्ण के कहने से बलरामजी ने जरासन्ध को नहीं मारा। फिर भी उसकी सारी सेना का विनाशकर डाला। जरासन्ध घर गया और कई अक्षौहिणी सेना लेकर फिर युद्ध करने आया। प्रभु ने उसे पराजित किया और उसकी सेना का विनाश किया। इस प्रकार जरासन्ध सत्रह बार पराजित हुआ। इस उत्तरार्ध में जरासन्ध के साथ किए गए युद्ध का वर्णन अच्छी तरह किया गया है। उनचासवें अध्याय में पूर्वार्ध पूरा हुआ है।

तुम्हारे जीवन में उनचास वर्ष पूरा होने पर जरासन्ध लड़ने आयेगा। भोजन न पचना, आँख से अच्छी तरह न दिखाई देना, थकावट लगना ही जरासन्ध की सेना है। जिस समय लोग सौ वर्ष जीवित रहते थे उस समय पचास वर्ष तक पूर्वार्ध और उसके बाद का समय उत्तरार्ध था। अब लोग सौ वर्ष जीवित नहीं रहते। पैंतीस-चालीस वर्ष की उम्र से उत्तरार्ध शुरू हो जाता है। उत्तरार्ध में बहुत सावधान रहना चाहिए। सत्रह बार जरासन्ध यांनी बीमारी आती है। उससे रक्षा होने पर अठारहवीं बार जरासन्ध काल यवन को लेकर लड़ाई करने आता है। उस समय शरीर छोड़ना ही पड़ता है। अन्त में श्रीकृष्ण मथुरा छोड़कर चले जाते हैं।

भागवत की कथा अनेक तरह से कही जाती है। जरासन्ध काल यवन से मैत्री करता है और उससे कहता है कि तुम मथुरा जाओ। फिर बाद में मैं मथुरा आऊँगा। काल-यवन ने मथुरा पर चढ़ाई कर दी। उसके बाद जरासन्ध भी आने वाला था। प्रभु ने बलरामजी से कहा कि अब क्या किया जाएगा? बलरामजी ने कहा कि जरासन्ध को सत्रह बार हराया, फिर भी वह लड़ने आया है। ये लोग मथुरा में शान्ति से नहीं रहने देंगे। मुझे तो आनर्त (गुजरात) देश में जाकर रहना है। उसी समय रेवत की पुत्री के साथ बलामजी का विवाह हो गया। बलरामजी को इस विवाह में आनर्त-ओखा मण्डल का राज्य दहेज में मिला था। बलरामजी ने वहाँ रहने की इच्छा प्रकट की और मथुरा छोड़ना चाहा। प्रभु ने कहा कि आप बड़े भाई हैं। आपकी इच्छा यदि वहाँ रहने की है तो मैं भी वहीं रहने आऊँगा। उन्होंने विश्वकर्मा को बुलाया और समुद्र के मध्य एक नगरी बनाने की आज्ञा उन्हें दी। देवताओं ने अपनी सारी सम्पत्ति श्रीकृष्ण को अर्पण कर दी । समुद्र के मध्य सुवर्ण नगरी की रचना की गई।

 उसमें बड़े-बड़े बाड़े (घेरे) बनाए गए थे। यादवों को उसमें से बाहर निकलने के लिए जल्दी रास्ता नहीं मिला। वे बार-बार पूछने लगे। 'द्वार कहाँ है? द्वार कहाँ है?' इसलिए उसका नाम द्वारका पड़ा।  इस प्रकार श्रीकृष्ण ने मथुरा नगरी छोड़ दी। जरासन्ध जब अन्तिम बार युद्ध करने आया, तब श्रीकृष्ण द्वारका पहुँच चुके थे। द्वारका ब्रह्मविद्यापुरी है। जिस प्रकार समुद्र का अन्त नहीं है, वैसे ही ब्रह्म का अन्त नहीं है। इसीलिए परमात्मा को अनमा कहते हैं। समुद्र में स्थित द्वारका ब्रह्मविद्या स्वरूप है। द्वार का अर्थ दरवाजा और 'का' अर्थ ब्रह्म परमात्मा है। 

 इसके प्रत्येक द्वार में भगवान् विराजमान हैं। हम सब लोग यदि द्वारका जाकर रहने लगें, तो वहाँ कितनी भीड़ होगी? तीर्थ में रहना अच्छा है; किन्तु प्रभु ने तुम्हें रहने के लिए जो घर दिया है, उसे तीर्थ तुल्य पवित्र बनाओ तो अधिक अच्छा है। अपना घर ऐसा पवित्र रखो कि वहाँ कोई आए तो उसका मन शुद्ध हो और उसे भगवान् की भक्ति करने की भावना पैदा हो अपने घर को तीर्थ बनाने की कोशिश करो, जिसके प्रत्येक स्थान पर भगवान् विराजमान हों। शरीर रूपी घर में इन्द्रिय रूपी  दरवाजे हैं भगवान् को अपने शरीर में रखो। अपनी आँख में श्रीकृष्ण को रखो, कान में श्रीकृष्ण को रखो। जिस इन्द्रिय से भक्ति नहीं होती उससे जाने अनजाने पाप होता है। जो अपनी सभी इन्द्रियों से भक्ति करता है उसकी बुद्धि में ज्ञान का प्रकाश होता है। पुस्तकों से प्राप्त ज्ञान समय बीतते भूल जाता है; किन्तु अन्दर से प्राप्त किया गया ज्ञान स्थायी होता है। इसलिए अपनी एक-एक इन्द्रिय से भक्ति करो। जो ब्रह्मरूप हो जाता है, उसे काल-यवन भी नहीं मार सकता।

यादवों को द्वारका में छोड़कर श्रीकृष्ण ने काल-यवन से युद्ध करने के लिए प्रस्थान किया । ब्रह्मा ने काल-यवन को वरदान दिया था कि तुमको कोई ऐसा व्यक्ति नहीं मार सकेगा जिसने यदुकुल में जन्म लिया हो। प्रभुजी ने ब्रह्माजी का वरदान सफल किया। युद्ध में काल-यवन की जीत हुई और श्रीकृष्ण की हार हुई। परमात्मा ने लीला की। वे रण छोड़कर भागे। काल-यवन ने श्रीकृष्ण का पीछा किया। उसने प्रभु से कहा, 

"लोग तुमको मानते हैं, लेकिन मुझे विश्वास है कि तुम डरपोक हो। । तुम रण छोड़कर जा रहे हो।" 

काल यवन ने 'रणछोड़, रणछोड़' कहकर पुकारा। इसलिए उनका नाम रणछोड़राय पड़ गया। श्रीकृष्ण ने भागते-भागते गिरनार पर्वत में स्थित मुचकुंद ऋषि की गुफा में प्रवेश किया। उस समय राजर्षि मुचकुंद सो गये थे। श्रीकृष्ण ने उनके शरीर पर अपना पीताम्बर उढ़ा दिया। काल यवन इसके बाद वहाँ पहुँचा। मुचकुंद ने राजऋर्षिको श्रीकृष्ण मानकर जोर से लात मारी। मुचकुंद ऋषि ने अपनी आँखें खोलीं। मुचकुंद ऋषि को यह वरदान था कि जो तुम्हारी निद्रा भंग करे उस पर यदि तुम्हारी दृष्टि पड़े तो वह जलकर भस्म हो जाए। फलस्वरूप मुचकुंद ऋषि की नजर पड़ते ही काल-यवन जलकर भस्म हो गया। इसके बाद मुचकुंद ऋषि को द्वारकानाथ का दर्शन हुआ। मुचकुंद महाराज ने परमात्मा की स्तुति की।

मुचकुंद महाराज ने अपनी स्तुति में वर्णन करते हुए कहा, 

"मनुष्य की दशा सर्प के मुँह में स्थित मेढ़क जैसी है। सर्प के मुँह में जो मेढ़क होता है उसका आधा शरीर सर्प के मुख में होता है। वह एक-दो मिनट में ही काल का कौर बनने वाला होता है। ऐसे समय यदि मेढ़क के ऊपर कोई मक्खी फड़कती हुई आई हो, तो वह उसे खाने का प्रयत्न करता है।"

 "पचास वर्ष की उम्र पूरी होते ही मनुष्य का शरीर काल के मुख में पड़ जाता है, फिर भी उसे भक्ति की ओर प्रेरणा नहीं होती और वह विषयों में लगा लिपटा रहता है। यह जीव कितना गाफिल है? यदि किसी को कहीं बाहर जाना हो तो वह दो-तीन दिन पहले तैयारी करता है कुछ लोग तो दो-चार महीने पहले से तैयारी करते हैं। आश्चर्य है कि प्रभु के घर जाने का निश्चय होने पर भी कोई उसकी तैयारी नहीं करता। यह कथा सुनने के बाद आप लोग हर रोज थोड़ी तैयारी करते रहें। इस में घबराने की आवश्यकता नहीं। अभी बहुत देर है । फिर भी थोड़ी-थोड़ी तैयारी करने की आवश्यकता है। देश के बदलने के साथ-साथ उसका सिक्का भी बदलता रहता है। इसलिए यहाँ का सिक्का वहाँ नहीं चल सकता मनुष्य अपने जीवन काल में मरने की तैयारी नहीं करता। इसीलिए उसे अंत काल में बहुत पछताना पड़ता है। मुचकुन्द महाराज ने कहा है, 

"मुझे गर्गाचार्य का सत्संग प्राप्त हुआ है। आज मैं आपका दर्शन कर कृतार्थ हो गया हूँ। आप मुझे अपनी भक्ति दीजिए।"

 प्रभु ने कहा कि जिसने जवानी में विलासी जीवन गुजारा है उसे शेष जीवन में अनन्य भक्ति नहीं मिलती, अपितु उसका सारा जीवन विलास में बरबाद हो जाता है। यदि वह वृद्धावस्था में भक्ति करे तो उसका दूसरा जन्म सुधरता है। हाँ, उसे एक ध्यान होना होता है। बद्री केदार में जाकर वहाँ एक ध्यान करो वहीं शरीर छोड़ दो।" 

मुचकन्द महाराज ने बद्री केदार जाकर अपना शरीर छोड़ा। वे कलियुग में नरसिंह मेहता के रूप में पैदा हुए। प्रभुने मुचकुन्द ऋषि को सद्गति दी।

इसके बाद श्रीकृष्ण मथुरा पहुँचे। उनसे जरासंध अठारहवीं बार युद्ध करने आया। उसने ब्राह्मणों को यह कहकर धमकाया कि यदि मेरी हार होगी तो मैं तुम्हारा कत्ल कर दूँगा । प्रभु ने लीला की जरासंध की जीत हुई और श्रीकृष्ण की हार हुई जरासंध प्रभु के पीछे-पीछे उन्हें मारने के लिए दौड़ा। उस समय श्रीकृष्ण प्रवर्षण पर्वत पर पहुँचे। यदि तुम्हारे पीछे भी जरासंध दौड़े तो तुम भी प्रवर्षण पर्वत पर जाओ। जहाँ ज्ञान और भक्ति की नित्य वर्षा होती है वही सात्विक भूमि प्रवर्षण पर्वत है। पचास-पचपन वर्ष हो जाने के बाद विलासी लोगों से दूर रहना। क्योंकि उनका संग मन को दुर्बल बनाता है। समाज में रहकर मनुष्य होना सरल है, किन्तु विलासी लोगों का साथ कर मन को पवित्र रखना कठिन है।

 इक्यावन, बावन, सत्तावन का अर्थ यह होता है कि अब 'वन' में जाओ। इस जीवन में बहुत सावधान रहो।  अधिक नहीं तो प्रतिदिन नियमपूर्वक प्रभु का इक्कीस हजार जप करो। एक घंटे में नौ सौ साँस ली जाती है। चौबीस घंटे में २१,६०० साँस ली जाती है। प्रति साँस पर जप करने की आवश्यकता है। नियम से इक्कीस हजार जप करो। 'श्रीराम', 'श्रीकृष्ण' जैसा दो तीन अक्षरों का मन्त्र हो तो एक घण्टे में चार-पाँच हजार मन्त्र बोला जा सकता है। ऐसा एक आसन पर पाँच घण्टा बैठने पर पूरा होगा। जब पुत्र विवाहित हो गया और घर में पुत्र- वधू आ गई तो यह समझना कि अब तुम्हारा गृहस्थाश्रम पूरा हो गया वानप्रस्थाश्रम शुरू हो गया अब तुम्हें वन में जाने की आवश्यकता है। कुछ वृद्धाएँ ऐसी होती हैं जो मरते समय तक चाभी का गुच्छा अपनी बहू को नहीं देतीं और बहू को यह इच्छा होती है कि यदि सासु को कुछ हो जाए तो अच्छा। पुत्र के विवाहित हो जाने के बाद सावधान होकर रहना। घर में रहना हो तो भले रहो; किन्तु विवेकपूर्वक रहो, सादा भोजन करो और सतत भक्ति करो। ऐसा भाव रखो कि मेरा घर भगवान् के चरणों में है। मुझे अब यह घर छोड़ना है।

मन घर में रहने से नहीं बिगड़ता, किन्तु वह घर पर अधिक ममता रखने से बिगड़ता है।' सतत भक्ति करने से मरण सुधरेगा। भक्ति करने से जरासंध के त्रास से यानी जन्म और मरण के संकट से छूट सकोगे। प्रभु का नाम जप सतत करने की बहुत आवश्यकता है। बिना जप के पाप की आदत नहीं छूटती। यज्ञ करने से पुण्य बढ़ता है, किन्तु पाप नहीं छूटता। पाप करने की आदत इस जीव को जन्म-जन्मान्तर से पड़ी है। एक स्थान पर शान्ति से बैठकर जप करने पर ही पाप छूटता है। बिना जप के वासना का विनाश नहीं होता। छः महीने जप करके देखोगे और अनुभव करोगे कि मेरा मन अब पहले की अपेक्षा कुछ सुधरा है। मन्त्र जप करने से पाप कुछ कम होगा और तुम्हारी आत्मा यह कहेगी कि अब तुझे भक्ति का रंग लगा है। इस प्रकार प्रभु ने जगत् को प्रवर्षण पर्वत पर जाने का उपदेश दिया है। 


श्री डोंगरेजी महाराज 

हरिओम सिगंल 






“तू करता वहीं है जो तू चाहता है। होता वहीं है जो मैं चाहता हूं। इसलिए तू वो कर जो मैं चाहता हूं। फिर होगा वहीं जो तू चाहता है।” मनुष्य की इच...