मंगलवार, 11 अक्टूबर 2022

मेथी

 मेथी का इस्तेमाल सब्जी से लेकर पराठे तक में किया जाता है। जहां यह खाने में स्वादिष्ट है, वहीं आयुर्वेद के नजरिए से भी इसके कई फायदे हैं। भारत में सदियों से इसके पत्ते और दानों को आयुर्वेदिक औषधि के रूप में प्रयोग किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। वहीं, अगर कोई बीमार है, तो इसे गुण ठीक होने के मदद कर सकते हैं। हां, अगर किसी को कोई गंभीर समस्या है, तो डॉक्टरी इलाज को प्राथमिकता दें। 

मेथी क्‍या है? – 

मेथी एक प्रकार की खाद्य सामग्री है, जिसे कई तरह से आहार में उपयोग किया जा सकता है। जब इसके हरे पत्तों का सेवन सब्जी के रूप में किया जाता है। वहीं, भोजन बनाते समय इसके दानों का भी उपयोग किया जाता है। इसका पौधा दो-तीन फुट लंबा होता है और इसकी फली में छोटे-छोटे पीले-भूरे रंग के सुगंधित दाने होते हैं। भूमध्य क्षेत्र, दक्षिण यूरोप और पश्चिम एशिया में इसकी खेती बहुतायत में होती है। 

मेथी के फायदे

1. मधुमेह से राहत

मधुमेह के मरीजों को खान-पान पर खासतौर से ध्यान देना चाहिए। ऐसे लोग अपनी डाइट में मेथी के दाने शामिल कर सकते हैं। इस बात की पुष्टि करने के लिए एक वैज्ञानिक शोध किया गया, जिसके मुताबिक, मेथी के बीज का सेवन करने से रक्त में शुगर की मात्रा को नियंत्रित किया जा सकता है। साथ ही यह टाइप-2 मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन प्रतिरोध को भी कम करने का काम कर सकता है । वहीं, एक दूसरे शोध के मुताबिक, मधुमेह पर इसका लाभदायक असर इसमें मौजूद हाइपोग्लिसेमिक प्रभाव के कारण हो सकता है। इसे रक्त में शुगर की मात्रा को कम करने के लिए जाना जाता है । इसलिए, सामान्य रक्त शुगर वालों को इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से बचना चाहिए।

2. कोलेस्ट्रॉल के लिए

शरीर में कोलेस्ट्रॉल के बढ़ने से कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। ऐसे में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने के लिए मेथी का उपयोग अच्छा विकल्प साबित हो सकता है। दरअसल, एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, मेथी के दानों में नारिंगेनिन नामक फ्लेवोनोइड होता है। यह रक्त में लिपिड के स्तर को कम करने का काम कर सकता है। साथ ही इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जिस कारण मरीज का उच्च कोलेस्ट्रॉल कम हो सकता है । इसलिए, कहा जा सकता है कि मेथी के बीज के लाभ कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए हो सकते हैं।

3. अर्थराइटिस का दर्द

उम्र बढ़ने के साथ-साथ जोड़ों में सूजन होने लगती है, जिस कारण असहनीय दर्द हो सकता है। इसे जोड़ों का दर्द या फिर अर्थराइटिस कहा जाता है। इससे निपटने के लिए मेथी रामबाण नुस्खा है, जिसे सदियों से इस्तेमाल किया जा रहा है। मेथी में एंटीइंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण पाए जाते हैं। ये गुणकारी तत्व जोड़ों की सूजन को कम करके अर्थराइटिस के दर्द से राहत दिलाने में मदद कर सकते हैं। मेथी में आयरन, कैल्शियम और फास्फोरस भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसलिए, मेथी के औषधीय गुण से हड्डियों व जोड़ों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं, जिससे हड्डियां स्वस्थ व मजबूत रह सकती हैं ।

4. हृदय के लिए

हृदय बेहतर तरीके से काम कर सके, उसके लिए मेथी का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। जो लोग नियमित रूप से मेथी का सेवन करते हैं, उन्हें दिल का दौरा पड़ने की आशंका कम हो सकती है और अगर दौरा पड़ भी जाए, तो जानलेवा स्थिति से बचा जा सकता है। विभिन्न शोधों में पाया गया है मृत्यु दर के पीछे दिल का दौरा एक प्रमुख कारण होता है। यह तब होता है, जब हृदय की धमनियों में रुकावट आ जाती है। वहीं, मेथी के दाने इस स्थिति से बचाने में सक्षम हो सकते हैं। अगर किसी को दिल का दौरा पड़ भी जाए, तो मेथी ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को पैदा होने से रोकने का काम कर सकती है। हृदयाघात के दौरान ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस की स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है। साथ ही मेथी के बीज शरीर में रक्त प्रवाह को संतुलित रखने में सहायक हो सकते हैं, जिस कारण धमनियों में किसी भी प्रकार की रुकावट पैदा नहीं हो सकती । ऐसे में मेथी दाना खाने के फायदे में हृदय को स्वस्थ रखना भी शामिल है।

5. मासिक धर्म में फायदेमंद

महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान असहनीय दर्द से गुजरना पड़ता है। ऐसी स्थिति में मेथी खाने से क्या होता है, अगर यह सोच रहे हैं, तो बता दें कि इस स्थिति में मेथी दाने से बना पाउडर राहत दिलाने में कारगर काम कर सकते हैं। साथ ही मेथी के दाने मासिक धर्म से जुड़ी अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में भी मदद कर सकते हैं। मेथी के दानों में एंटीइंफ्लेमेटरी, एनाल्जेसिक, एंटीस्पास्मोडिक व ड्यूरेटिक गुण पाए जाते हैं। वैज्ञानिक शोधों में इस बात की पुष्टि की गई है कि मेथी के ये गुणकारी तत्व मासिक धर्म में होने वाली हर तरह की पीड़ा से राहत दिलाने का काम कर सकते हैं, जिसे मेडिकल भाषा में डिसमेनोरिया (Dysmenorrhea) कहा जाता है ।  ध्यान रहे कि मासिक धर्म की स्थिति में इसे डॉक्टर की सलाह पर कम मात्रा में ही लेना चाहिए।

6. कैंसर

कैंसर एक घातक रोग है, इसलिए इस समस्या से बचे रहना ही बेहतर है। इसके लिए मेथी के बीज के लाभ नजर आ सकते हैं। एक मेडिकल रिसर्च के अनुसार, मेथी में एंटी कैंसर प्रभाव पाए जाते हैं, जो कैंसर की समस्या को दूर रखने का काम कर सकते हैं । हां, अगर कोई कैंसर से पीड़ित है, तो उसे बिना किसी देरी के डॉक्टर से इलाज करवाना चाहिए।

7. बढ़ता है स्तन-दूध

प्रसव के बाद नवजात के लिए मां के दूध से बेहतर कुछ नहीं होता है। ऐसे में स्तनपान करवाने वाली महिला मेथी या मेथी के बीज से बनी हर्बल चाय का सेवन कर सकती है। स्तन दूध की गुणवत्ता व मात्रा को बढ़ाने के लिए मेथी का सेवन किया जा सकता है । फिलहाल, इस पर और शोध किए जाने की जरूर है, ताकि पता चल सके कि मेथी इस संबंध में किस तरह काम करती है।

8. वजन घटाने के लिए

अगर कोई वजन कम करना चाहता है, तो इसके लिए मेथी का उपयोग सहायक सिद्ध हो सकता है। दरअसल, मेथी शरीर में फैट को जमा होने से रोकने का काम कर सकती है। इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो आहार को पचाने के साथ ही भूख को शांत रखने का काम कर सकता है। इससे वजन को बढ़ने से रोका जा सकता है । इसके अलावा, मेथी में विभिन्न प्रकार के पॉलीफेनॉल्स पाए जाते हैं, जिससे वजन कम हो सकता है । इसलिए, ऐसा कहा जा सकता है कि मेथी खाने के फायदे वजन घटाने के लिए हो सकते हैं।

9. रक्तचाप में सुधार

उच्च रक्तचाप कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकता है, जिनमें हृदय की समस्या भी शामिल है। मेथी के औषधीय गुण इस समस्या को कम करने में मदद कर सकते हैं। एक वैज्ञानिक शोध के मुताबिक, मेथी में एंटीहाइपरटेंसिव प्रभाव पाया जाता है, जो रक्तचाप की समस्या को कम करने का काम कर सकता है ।

10. स्वस्थ किडनी

कई वैज्ञानिक शोधों में इस बात का दवा किया गया है कि किडनी के लिए मेथी फायदेमंद है। मेथी को अपने भोजन में शामिल करने से किडनी अच्छी तरह काम कर सकती है। मेथी के दानों में पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड पाया जाता है, जो किडनी को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करता है। साथ ही यह किडनी के आसपास एक रक्षा कवच का निर्माण करता है, जिससे इसके सेल नष्ट होने से बच जा सकते हैं। 

11. सूजन को कम करने के लिए

सूजन और इससे होने वाली समस्या को दूर करने में मेथी के बीज फायदेमंद हो सकते हैं। दरअसल, मेथी के बीज में लिनोलेनिक और लिनोलिक एसिड पाया जाता है। इस एसिड के पेट्रोलियम ईथर के अर्क में एंटीइंफ्लेमेटरी गतिविधि पाई जाती है, जो सूजन से छुटकारा दिलाने का काम कर सकती है। इस बात का जिक्र हमने ऊपर अर्थराइटिस वाले भाग में भी किया है।  इसलिए, मेथी दाने के फायदे में सूजन से राहत पाना भी शामिल है।

12. टेस्टोस्टेरोन को बढ़ाने के लिए

अगर कोई यह सोच रहा है कि मेथी खाने से क्या होता है, तो यहां हम बता दे कि इसके सेवन से टेस्टोस्टेरोन में वृद्धि हो सकती है। एक शोध के मुताबिक, मेथी के गुण हार्मोनल के रेगुलेशन में उपयोगी माने गए हैं। मेथी शरीर में एस्ट्रोजन के उत्पादन को रोककर टेस्टोस्टेरोन के स्तर को बढ़ाती है। पुरुष के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ने से मांसपेशियों का विकास होता है और शारीरिक क्षमता में वृद्धि होती है ।

13. त्वचा के लिए

मेथी को त्वचा के लिए भी लाभकारी माना जा सकता है।  मेथी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीरिंकल, मॉइस्चराइजिंग और स्किन स्मूदिंग गुण पाए जाते हैं । इसलिए मेथी के लाभ त्वचा पर नजर आ सकते हैं।

14. बालों के लिए

मेथी के उपयोग से बालों का झड़ना रुक सकता है। एक मेडिकल रिसर्च के मुताबिक, मेथी के बीज में प्रोटीन के भरपूर मात्रा पाई जाती है, जो बालों के लिए जरूरी होता है। इससे गंजेपन, बालों का पतला होना और बालों के झड़ने का इलाज करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, मेथी में लेसिथीन भी पाया जाता हैं, जो बालों को प्राकृतिक रूप से मजबूत बनाने के साथ ही मॉइस्चराइज करने का काम कर सकता है। यह रूसी को भी दूर रख सकता है । ऐसे में मेथी पाउडर के फायदे बालों पर नजर आ सकते हैं।

मेथी के पौष्टिक तत्व –

मेथी में कई तरह के पोषक तत्व होते हैं, जिसे समझने के लिए हम एक टेबल का उपयोग कर रहे हैं ।


पोषक तत्व मूल्य प्रति 100 ग्राम

पानी 8.84 g

ऊर्जा 323 g

प्रोटीन 23 g

टोटल लिपिड (फैट) 6.41 g

कार्बोहाइड्रेट 58.35 g

फाइबर 24.6 g

कैल्शियम, Ca 176 mg

आयरन, Fe 33.53 mg

मैग्नीशियम, Mg 191 mg

फास्फोरस, P 296 mg

पोटैशियम, K 770 mg

सोडियम, Na 67 mg

जिंक, Zn 2.5 mg

मैंगनीज, Mn 1.228 mg

सेलेनियम, Se 6.3 µg

विटामिन सी 3 mg

थायमिन 0.322 mg

राइबोफ्लेविन 0.366 mg

नियासिन 1.64 mg

विटामिन बी-6 0.6 mg

फोलेट 57 µg

विटामिन ए, RAE 3 µg

विटामिन ए, IU 60 IU

फैटी एसिड, टोटल सैचुरेटेड 1.46 g

मेथी का उपयोग – 

आयुर्वेद में कहा गया है कि मेथी के दानों की तासीर गर्म होती है। इसका सीधे सेवन करने से फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। इसलिए, मेथी के दानों को कुछ समय के लिए पानी में भिगोकर रखना चाहिए, ताकि उसकी गर्माहट कम हो जाए। इसके बाद मेथी के दानों को प्रयोग में लाना चाहिए।

कब और कैसे करें उपयोग:

मेथी के दानों को एक-दो मिनट के लिए मध्यम आंच पर भून लें और फिर इसे सब्जी या फिर सलाद के ऊपर डाल दें। इसे दोपहर या रात के खाने में इस्तेमाल कर सकते हैं।

एक चम्मच मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर रखें और अगली सुबह एक गिलास पानी के साथ इनका सेवन करें। जिस पानी में मेथी के दानों को भिगोया था, आप सुबह खाली पेट उसका भी सेवन कर सकते हैं।

मेथी के दानों को रातभर पानी में भिगोकर रखने के बाद एक कपड़े में बांधकर रख दें। कुछ दिन ऐसे ही रखने के बाद मेथी के दाने अंकुरित हो जाएंगे। फिर इसका सुबह सेवन किया जा सकता है।

मेथी के पराठे और रोटियां बनाकर इसका सेवन किया जा सकता है। इसके पराठे को सुबह के नाश्ते में लिया जा सकता है।

मेथी दाने की हर्बल चाय भी पी जा सकती है। पानी में मेथी के दाने डालकर उसे उबाल लें। स्वाद के लिए इसमें नींबू और शहद मिला सकते हैं। इसे सुबह और शाम पिया जा सकता है।

कितना करें उपयोग:

मधुमेह जैसी अवस्था में इसे प्रतिदिन 25 से 50 ग्राम तक लिया जा सकता है। फिर भी इसकी सही मात्रा जानने के लिए अपने आहार विशेषज्ञ की सहारा लेना बेहतर होगा ।

मेथी को लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखें? – 

मेथी के हरे पत्तों को फ्रिज में रखकर कुछ दिनों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

इसकी पत्तियों की गिले कपड़े में लपेटकर भी एक-दो दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

अगर मेथी के बीज है, तो इसे एयर टाइट डिब्बे में डालकर सुरक्षित रखा जा सकता है।

मेथी किन-किन लोगों को नहीं खानी चाहिए –

कुछ लोगो को मेथी के सेवन से बचना चाहिए, जो इस प्रकार है:

कम रक्त शुगर के मरीज को मेथी के सेवन से बचना चाहिए, क्योंंकि इसमें हाइपोग्लिसेमिक प्रभाव होता है ।

मेथी में एंटीहाइपरटेंसिव प्रभाव पाया जाता है, जो रक्तचाप को कम कर सकता है । इसलिए, जिनके शरीर का रक्तचाप कम है, उन्हें इसके सेवन से बचना चाहिए।

गर्भवती को इसका सेवन नहीं करना चाहिए। अगर फिर भी उन्हें मेथी खानी है, तो इस संबंध में डॉक्टर से जरूर बात करें।

मेथी के नुकसान 

इसमें कोई दो राय नहीं कि मेथी के दाने सेहत के लिए लाजवाब हैं। इसे अपने भोजन में शामिल करने से कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ हो सकते हैं, लेकिन इतने फायदों के साथ-साथ इसके नुकसान भी हैं। कुछ मामलों में इसके सेवन से कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। मेथी से नुकसान के बारे में यहां हम विस्तार से बता रहे हैं।

दस्त : हालांकि, पाचन तंत्र के लिए मेथी के दाने अच्छे होते हैं, लेकिन कई बार यह दस्त का कारण भी बन जाते हैं। जरूरत से ज्यादा मेथी खाने से पेट खराब हो सकता है और दस्त लग जाते हैं। अगर स्तनपान कराने वाली महिलाओं को इसे खाने से पेट खराब होता है, तो उससे शिशु को भी दस्त लग सकते हैं। इसलिए, ऐसे कोई लक्षण नजर आते ही इसका सेवन बंद कर दें।

गर्भाशय संकुचन : जैसा कि इस लेख में पहले बताया गया है कि मेथी दाने की तासीर गर्म होती है। अगर गर्भवती महिला इसका अधिक सेवन करती है, तो समय से पहले गर्भाशय संकुचन जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। मेथी के दानों में ऑक्सीटोसिन होता है, जो गर्भाशय संकुचन का कारण बनता है। इसलिए, गर्भवती महिलाएं मेथी दाने का सेवन डॉक्टर की सलाह पर ही करें।

एलर्जी : कुछ लोगों को मेथी दाने के सेवन से एलर्जी हो सकती है। यह एलर्जी चेहरे पर सूजन के तौर पर नजर आ सकती है। वहीं, कुछ को शरीर पर रैशेज हो सकते हैं, सांस फूलने जैसी समस्या हो सकती है और कुछ बेहोश तक हो जाते हैं। इसके अलावा, कई लोगों को मेथी के सेवन से छाती में दर्द जैसी शिकायत होने लगती है। यह तासीर में गर्म होती है, इसलिए कुछ लोगों को बवासीर, गैस व एसिडिटी तक की शिकायत हो जाती है । साथ ही अगर कोई किसी बीमारी के लिए दवा खा रहा है, तो वो मेथी के दानों का सेवन करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर ले।

बच्चों के लिए हानिकारक : बच्चों के लिए मेथी दाने को सुरक्षित नहीं माना गया है। यह तो हम पहले ही बता चुके हैं कि इसे खाने से दस्त लग सकते हैं। वहीं, इसकी हर्बल चाय पीना भी बच्चों के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि इससे उनकी मस्तिष्क की क्षमता पर असर पड़ सकता है। इसलिए, बेहतर यही है कि मेथी के सप्लीमेंट्स बच्चों को न दें। अगर देना ही चाहते हैं, तो डॉक्टर की सलाह पर सब्जियों में डालकर दे सकते हैं।


https://www.stylecraze.com/hindi/methi-ke-fayde-upyog-aur-nuksan-in-hindi/




ओरेगेनो

 ओरेगेनो एक गुणकारी पौधा है, जिसका इस्तेमाल विभिन्न प्रकार के व्यंजनों के साथ-साथ आयुर्वेदिक उपचार में भी किया जाता है। इसके पौधे के विभिन्न हिस्सों का उपयोग कई शारीरिक विकारों से राहत पाने के लिए किया जा सकता है । 

ओरेगेनो एक हर्ब है, जिसे हिंदी में अजवायन की पत्तियां कहा जाता है। ओरेगेनो का पौधा लगभग एक से तीन फीट लंबा और दिखने में तुलसी (Basil) और पुदीने के पत्तों जैसा ही होता है । माना जाता है कि दुनिया भर में लगभग 60 ऐसी पौधों की प्रजातियां हैं, जो रंग और स्वाद में ओरेगेनो की तरह ही हैं और इन्हें अक्सर आरेगेनों के नाम से ही जाना जाता है। यह एक गुणकारी पौधा है, इसलिए इसका इस्तेमाल कई शारीरिक समस्याओं से आराम पाने के लिए किया जा सकता है। इसके अलावा, अजवायन की पत्तियों का उपयोग पिज्जा, पास्ता, सूप और सैंडविच जैसे खाद्य पदार्थों का फ्लेवर बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

ओरगेनो के प्रकार – 

ओरेगेनो के कई प्रकार मौजूद हैं, लेकिन मुख्य तीन के बारे में नीचे बताया जा रहा है  :

यूरोपियन ओरेगेनो : इसे वाइल्ड मार्जोरम या विंटर मार्जोरम भी कहा जाता है। ओरेगेनो का यह प्रकार खास तौर पर ग्रीस, इटली, स्पेन, तुर्की और संयुक्त राज्य अमेरिका में पाया जाता है। इसका उपयोग खांसी, सिरदर्द, घबराहट, दांत दर्द, और अनियमित माहवारी आदि से राहत पाने में किया जा सकता है।

ग्रीक ओरेगेनो : इसे विंटर स्वीट मार्जोरम या पॉट मार्जोरम भी कहा जाता है। यह ओरिगैनम हर्केलोटिकम एल (Origanum heracleoticum L) से निकाला गया ओरेगेनो होता है।

मेक्सिकन ओरेगेनो : इस प्रकार को मैक्सिकन मार्जोरम के नाम से भी जाना जाता है। यह खासकर मेक्सिको और आसपास के क्षेत्रों में पाया जाता है और इसका उपयोग मैक्सिकन खाद्य पदार्थों जैसे पिज्जा और बारबेक्यू सॉस में फ्लेवर के रूप में किया जाता है।

ओरेगेनो के फायदे – 

1. हृदय स्वास्थ्य के लिए ओरेगेनो के फायदे

कार्डियोवस्कुलर समस्याएं एक तरह की क्रोनिक इंफ्लेमेटरी परिस्थिति होती हैं, जिसमें कोशिकाओं को स्वस्थ होने में सामान्य से ज्यादा समय लगता है । यह कई वजह से हो सकता है, जैसे धूम्रपान, मधुमेह और इन्फ्लेमेशन। ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो इन्फ्लेमेशन और हृदय रोग के खतरे को कम करते हैं। साथ ही, इसमें कार्डियोप्रोटेक्टिव गुण भी होते हैं, जो हृदय को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं ।

2. कैंसर के खतरे को करे कम

ओरेगेनो की पत्तियों के फायदे कैंसर से बचाव में मददगार हो सकते हैं। ओरेगेनो में थाइमोल, कार्वाक्रोल और कुछ अन्य एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं। ये कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोक सकते हैं और कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं । खासकर, पेट के कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने से रोकने के लिए ओरेगेनो के फायदे कारगर साबित हो सकते हैं। इसमें प्रॉपॉपोटिक प्रभाव (Proapoptotic Effects) होते हैं, जो कैंसर कोशिकाओं को खत्म कर सकते हैं और इनकी मदद से कैंसर का खतरा भी कम हो सकता है । इसके अलावा, इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि ये घरेलू उपचार कैंसर का खतरा कुछ हद तक कम कर सकते हैं, लेकिन ये उसका इलाज नहीं है। ऐसे में कोई इससे ग्रसित हो जाए तो डॉक्टरी इलाज करवाना आवश्यक है।

3. रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाए

ओरेगेनो की पत्तियों के फायदे रोगों से लड़ने क्षमता बढ़ाने में भी मिल सकते हैं। ओरेगेनो में कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे विटामिन-ए, विटामिन-सी और विटामिन-ई । इन तीनों ही विटामिन को प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट माना जाता है। ये विटामिन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। ये शरीर पर फ्री-रेडिकल्स के प्रभाव को कम कर सकते हैं और कोशिकाओं को उनके प्रभाव से बचा सकते हैं । इसके लिए एक गिलास पानी में ओरेगेनो की पत्तियों को उबालकर, उस पानी का सेवन कर सकते हैं। सर्दी-जुकाम या गले में खराश की समस्या में ओरेगेनो की चाय का सेवन भी किया जा सकता है।

4. अवसाद के लिए अजवायन की पत्ती के लाभ

यह जानकर शायद हैरानी होगी कि अवसाद से लड़ने में भी ओरेगेनो के लाभ पाए जा सकते हैं। ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल में मौजूद कारवाक्रॉल (Carvacrol- एक प्रकार का का यौगिक, जो प्राकृतिक एंटीबायोटिक भी है) तत्व एक एंटीडिप्रेसेंट एजेंट की तरह भी काम कर सकता है। लैब में चूहों पर किए गए एक अध्ययन से यह पता चला है कि यह डोपामिनर्जिक प्रणाली (डोपामाइन – एक प्रकार के हॉर्मोन और न्यूरोट्रांसमीटर) पर प्रभाव डालते हैं । डोपामिनर्जिक प्रणाली पर प्रभाव पड़ने से अवसाद के लक्षण कम करने में मदद मिल सकती है ।

5. अपच से आराम

ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल में कई बायोलॉजिकल गुण होते हैं, जैसे एंटीमाइक्रोबियल, एंटी इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेटिव, जो शरीर के लिए फायदेमंद हो सकते हैं। ये आंत को नुकसान पहुंचाने वाले बैक्टीरिया जैसे ई. कोलाई की संख्या को कम करता है और आंत की इम्यून क्षमता को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह आंत की इन्फ्लेमेशन को भी कम करने में मदद कर सकता है , जिससे अपच की समस्या से कुछ हद तक आराम मिल सकता है।


ओरेगेनो एसेंशियल ऑयल में मौजूद एंटीऑक्सीडेटिव गुण आंत के ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके आंत को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं । इसके लिए एक कप पेपरमिंट या लेमन टी में एक या दो बूंद ओरेगेनो ऑयल डालकर, उसका सेवन कर सकते हैं। इस प्रकार ओरेगेनो का तेल अपच की समस्या को कुछ कम कर सकता है, लेकिन इस पर अभी और शोध की आवश्यकता है।

6. पेट दर्द को कम करे

कई बार खान-पान में गड़बड़ी, कब्ज, अपचन, फूड पॉइजनिंग और अन्य कई कारणों की वजह से पेट में दर्द हो सकता है । ऐसे में, ओरेगेनो के फायदे पेट दर्द से आराम पाने के लिए भी उठाए जा सकते हैं। ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल में मोनोटेरेपिक फिनोल (Monoterpenic Phenol) नाम का एक कंपाउंड पाया जाता है, जो पेट दर्द को कुछ हद तक कम करने में मदद कर सकता है । इसके लिए आप एक गिलास पानी या जूस में एक से दो बूंद ओरेगोने का तेल डालकर सेवन कर सकते हैं।

7. जोड़ों के दर्द से आराम दिलाए

अगर कोई जोड़ों के दर्द से पीड़ित हैं, तो ओरेगेनो का पौधा उनके लिए संजीवनी बूटी से कम नहीं है। ओरेगेनो में कारवाक्रोल नाम का मोनोटेरेपिक फिनोल कंपाउंड पाया जाता है। इस कंपाउंड में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो ऑस्टियोअर्थराइटिस (Osteoarthritis) की वजह से जोड़ों में होने वाली सूजन को कम कर सकता है। जोड़ों के दर्द में ओरेगेनो की पत्ते के फायदे को उसकी चाय बनाकर उठा सकते हैं । इसके लिए रोज सुबह एक कप पानी में इसके कुछ पत्ते उबाल लें और उस पानी का सेवन करें। आप चाहें तो ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल से मसाज भी कर सकते हैं।

8. सूजन से आराम

बात जब ओरेगेनो के लाभ की हो तो इसके फायदों में एंटीइन्फ्लामेट्री गुण भी शामिल है और इसके लिए ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। एनसीबीआई द्वारा प्रकाशित शोध में पाया गया है कि इस तेल का उपयोग त्वचा की सूजन को कम करने में मदद कर सकता है। यही नहीं, बल्कि इसमें मौजूद कारवाक्रॉल (Carvacrol) तत्व अल्सर की सूजन को कम करने और उसके घाव को भरने में भी मदद कर सकता है ।

9. मधुमेह के लिए ओरेगेनो की पत्तियों के फायदे

अजवायन की पत्ती के लाभ टाइप 2 डायबिटीज को नियंत्रित करने में भी देखे जा सकते हैं। इस संबंध में लैब में डायबिटिक चूहों पर किए गए शोध के परिणाम सामने आए हैं। माना जाता है कि ओरेगेनो की पत्तियों का अर्क शरीर में ग्लूकोज और इंसुलिन के बढ़े हुए स्तर को नियंत्रित करने में मदद करता है। साथ ही यह लिपिड मेटाबॉलिज्म में भी सुधार कर सकता है और डायबिटीज से ग्रसित लोगों के लिवर व किडनी को भी स्वस्थ रखने में मदद कर सकता है ।

10. जुकाम और बुखार से आराम

जुकाम, बुखार और कॉमन कोल्ड के लक्षणों को कम करने के लिए ओरेगेनो का उपयोग किया जा सकता है। ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल में एंटी इन्फ्लुएंजा गुण होते हैं, जो कॉमन कोल्ड के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही ओरेगेनो का पौधा एंटीवायरल और एंटीबैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जो संक्रमण फैलाने वाले वायरस व बैक्टीरिया से लड़ता है और कॉमन कोल्ड को कम कर सकता हैं ।

11. एनीमिया से राहत दिलाए

शरीर में आयरन की कमी एनीमिया का कारण बनती है। आयरन शरीर में हीमोग्लोबिन का निर्माण करता है, जो एक प्रकार आयरन युक्त प्रोटीन होता है (20)। एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए अजवायन की पत्ती के लाभ देखे जा सकते हैं। ओरेगेनो की पत्तियों में समृद्ध मात्रा में आयरन पाया जाता है, जो आयरन की कमी को पूरा करने में मदद कर सकता है । इसके लिए ओरेगेनो की सूखी पत्तियों को पानी में उबाल कर, उस पानी का सेवन किया जा सकता है।

12. हड्डियों को स्वस्थ रखे

ओरेगेनो के पत्ते के फायदे की बात करें, तो यह हड्डियों को स्वस्थ रखने में लाभदायक साबित हो सकता है। हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। इसमें सबसे ऊपर नाम आता है, कैल्शियम का और ओरेगेनो की पत्तियों में कैल्शियम भरपूर मात्रा में पाया जाता है। इसके अलावा, इसमें और भी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में मदद कर सकते हैं, जैसे मैग्नीशियम, फास्फोरस, पोटैशियम, जिंक, कॉपर और मैंगनीज। इसके साथ ही ओरेगेनो में हड्डियों के लिए लाभदायक विटामिन भी पाए जाते हैं, जैसे विटामिन-सी, विटामिन-ए और विटामिन-के ।

13. त्वचा के लिए ओरेगेनो के लाभ

त्वचा से जुड़े संक्रमण से बचने या अगर संक्रमण है, तो उसके प्रभाव को कम करने के लिए ओरेगेनो के एसेंशियल ऑयल का उपयोग किया जा सकता है। इसमें एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं, जो संक्रमण फैलाने वाले बैक्टीरिया को खत्म करते हैं । साथ ही इसमें एंटी इंफ्लेमेटरी और इम्यूनोमॉड्यूलेटरी (Immunomodulatory) गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा में आई सूजन को कम कर सकते हैं। इसमें एंटी-कैंसर गुण भी होते हैं, जो त्वचा के कैंसर के खतरे से बचाने में मदद कर सकते हैं ।

14. बालों के लिए ओरेगेनो के फायदे

बालों के झड़ने की समस्या से जूझ रहे लोगों के लिए भी ओरेगेनो का उपयोग लाभकारी साबित हो सकता है। शोध में पाया गया है कि ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बालों के झड़ने का एक कारण हो सकता है । जैसा कि हम लेख में पहले भी बता चुके हैं कि ओरेगेनो एक प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम कर सकता है, इसलिए यह कहा जा सकता है कि इसके एंटीऑक्सीडेंट गुण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करके और बालों के झड़ने की समस्या को रोकने में मदद कर सकते हैं ।



ओरेगेनो के पौष्टिक तत्व 

नीचे बताए गए पोषक तत्व ओरेगेनो की पत्तियों (सूखी हुई) के बारे में हैं ।


पोषक तत्व मात्रा प्रति 100 ग्राम

पानी ग्राम

ऊर्जा 265 kcal

प्रोटीन 9 ग्राम

फैट 4.28 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट 68.92 ग्राम

फाइबर 42.5 ग्राम

शुगर 4.09 ग्राम

मिनरल

कैल्शियम 1597 मिलीग्राम

आयरन 36.8 मिलीग्राम

मैग्नीशियम 270 मिलीग्राम

फास्फोरस 148 मिलीग्राम

पोटेशियम 1260 मिलीग्राम

सोडियम 25 मिलीग्राम

जिंक 2.69 मिलीग्राम

कॉपर 0.633 मिलीग्राम

मैंगनीज 4.99 मिलीग्राम

सिलेनियम 4.5 माइक्रोग्राम

विटामिन

विटामिन सी 2.3 मिलीग्राम

थियामिन 0.177 मिलीग्राम

राइबोफ्लेविन 0.528 मिलीग्राम

नियासिन 4.64 मिलीग्राम

विटामिन-बी 6 1.044 मिलीग्राम

फोलेट 237 माइक्रोग्राम

विटामिन-ए, आरएई 85 माइक्रोग्राम

विटामिन-ए, आईयू 1701 आईयू

विटामिन ई (अल्फा टोकोफेरॉल) 18.26 मिलीग्राम

विटामिन-के 621.7 मिक्रोग्राम

लिपिड

फैटी एसिड टोटल सैचुरेटेड 1.551 ग्राम

फैटी एसिड टोटल मोनोअनसैचुरेटेड 0.716 ग्राम

फैटी एसिड टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड 1.369 ग्राम

ओरेगेनो का उपयोग – 

सेहत के लिए ओरेगेनो के फायदे उठाने के लिए नीचे बताए गए तरीकों से इसका उपयोग किया जा सकता है:

ओरेगेनो की चाय बनाई जा सकती है, जिससे ओरेगेनो के पत्ते के फायदे मिल सकते हैं। इसके लिए ओरेगेनो की पत्तियों (ताजी या सूखी) को एक कप पानी में डाल कर उबाल लें। अच्छी तरह उबल जाने के बाद पानी को छान लें और उसका सेवन करें।

अदरक या मसाला चाय में भी ओरेगेनो की कुछ पत्तियां डाली जा सकती हैं।

अजवायन की पत्ती के लाभ उठाने के लिए इसे चिकन, सब्जी, पिज्जा, पास्ता और अन्य व्यंजनों में मसाले की तरह उपयोग किया जा सकता है।

ओरेगेनो की पत्तियों को सूप में डाल कर भी सेवन कर सकते हैं। इसकी पत्तियां सूप को एक अलग फ्लेवर देंगी।

ओरेगेनो का उपयोग ताजा, सूखा और तेल तीनों रूप मे ही किया जा सकता है।

नोट : किसी खास समस्या के लिए ओरेगेनो का उपयोग करने से पहले इसकी उचित मात्रा को लेकर एक बार डायटिशियन या फिर डॉक्टर से परामर्श अवश्य करें।


त्वचा के लिए ओरेगेनो का उपयोग :

सामग्री :

दो बूंद ओरेगेनो ऑयल

दो चम्मच नारियल/जैतून का तेल

रूई

विधि :

एक बाउल में दोनों तेलों को मिला लें।

रूई की मदद से उसे प्रभावित क्षेत्र पर लगाएं।

इस प्रयोग को दिन में दो बार दोहराया जा सकता है।

गर्म पानी में ओरेगेनो ऑयल की चार से पांच बूंदें डालकर, उससे 10 मिनट तक भाप भी ली जा सकती है। भाप को लेते समय सावधानी बरतना जरूरी है।

बालों के लिए ओरेगेनो का उपयोग :

सामग्री :

दो से तीन बूंद ओरेगेनो एसेंशियल ऑयल

तीन से चार चम्मच नारियल/जैतून का तेल

विधि :

एक बाउल में तीन से चार चम्मच नारियल/जैतून का तेल का तेल लें और उसे हल्का गर्म कर लें।

गर्म करने के बाद उसमें दो से तीन बूंद ओरेगेनो एसेंशियल ऑयल मिला लें।

अब इस तेल से लगभग 20 मिनट तक बालों में मसाज करें।

मसाज करने के बाद लगभग 10 मिनट के लिए तेल को बालों में रहने दें।

अंत में शैम्पू लगाकर, बालों को ठंडे पानी से धो लें।

ओरेगेनो का चयन कैसे करे और लंबे समय तक सुरक्षित कैसे रखे?

सूखी ओरेगेनो की जगह अजवायन की ताजी पत्तियों का चयन करें। वो खाने को एक बेहतर फ्लेवर देती हैं।

पत्तियां चुनते समय पीली की जगह हमेशा हरी पत्तियों का चयन करें। साथ ही ध्यान दें कि उनपर कोई दाग न हो।

पत्तियों को लम्बे समय तक ताजा रखने के लिए उन्हें गीले कपड़े में लपेट कर फ्रिज में रखें।

चाहें तो पत्तियों को काटकर, एक हवाबंद डिब्बे में रखकर, फ्रीजर में भी रख सकते हैं।

ड्राई ओरेगेनो पत्तियों को भी हवाबंद डिब्बे में लंबे समय रखा जा सकता है।

ओरेगेनो के नुकसान – 

नियंत्रित रूप से ओरेगेनो का उपयोग करना पूरी तरह सुरक्षित है, हालांकि कुछ मामलों में इसका उपयोग करने से ओरेगेनो के नुकसान उठाने पड़ सकते हैं, जो कुछ इस प्रकार हो सकते हैं :

गर्भावस्था और स्तनपान : गर्भवती और स्तनपान करवाने वाली महिलाओं के लिए ओरेगेनो का सेवन करना नुकसानदायक हो सकता है। माना जाता है कि गर्भावस्था के दौरान ओरेगेनो का ज्यादा सेवन करना गर्भपात का कारण बन सकता है।

रक्तस्राव की समस्या : रक्तस्राव जिसे ब्लीडिंग डिसऑर्डर भी कहा जाता है। इसमें चोट लगने के बाद खून बहना आसानी से बंद नहीं होता। इस समस्या में शरीर में प्लेटलेट्स की मात्रा कम हो जाती है, जिससे त्वचा पर ब्लड क्लॉट नहीं बन पाता और खून बहना बंद नहीं होता। ऐसा होने पर माहवारी, चोट लगने व सर्जरी आदि के दौरान भी सामान्य से अधिक रक्तस्राव होता है । ओरेगेनो का सेवन रक्तस्राव से पीड़ित लोगों की समस्या को बढ़ा सकता है।

एलर्जी : जिन लोगों को लामियासीए (Lamiaceae) के परिवार की औषधियां जैसे बेसिल, लैवेंडर, पुदीना और सेज से एलर्जी होती है, तो उन्हें ओरेगेनो से भी एलर्जी हो सकती है, क्योंकि ओरेगेनो भी इसी परिवार से आता है।

ब्लड शुगर का स्तर : ओरेगेनो का सेवन ब्लड शुगर के स्तर को कम कर सकता है, इसलिए इसका उपयोग नियंत्रित मात्रा में न करने से ओरेगेनो के नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।

पेट खराब : कुछ मामलों में इसका उपयोग नियंत्रित मात्रा में न करने से ओरेगेनो के नुकसान पेट खराब करने में भी देखे गए हैं।

त्वचा पर जलन : ओरेगेनो के तेल को सीधा त्वचा पर लगाना त्वचा पर जलन का कारण बन सकता है, इसलिए इसे हमेशा किसी अन्य ऑयल जैसे नारियल या जैतून के तेल में मिलाकर इस्तेमाल करना चाहिए।

अब आप अच्छी तरह समझ चुके होंगे कि पिज्जा और पास्ता में डालने के अलावा, अजवायन की पत्ती के लाभ आप किस तरह उठा सकते हैं। 

https://www.stylecraze.com/hindi/oregano-ke-fayde-upyog-aur-nuksan-in-hindi/




नैनो करक्यूमिन

नैनो करक्यूमिन: 

एक पूरक जो आपके स्वास्थ्य के लिए अच्छा है

हल्दी को एक जादुई सामग्री के रूप में जाना जाता है। इसमें इतना कुछ है कि यह अकेले ही कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का इलाज करने में मदद कर सकता है। यदि आप सोच रहे हैं कि बिना अधिक मात्रा में हल्दी का सेवन किए हल्दी के सभी लाभों को प्राप्त करने का सबसे अच्छा तरीका क्या है तो यह आपके लिए नैनो करक्यूमिन की खुराक पर विचार करने का समय है।

 Nano Curcumin Extract 

की खुराक में नैनो करक्यूमिन की सही खुराक होती है, ताकि यह आपको दिन में सिर्फ दो खुराक के साथ आपके शरीर के लिए आवश्यक सभी लाभ प्रदान करे। यदि आप सुनिश्चित नहीं हैं कि ये पूरक क्या करते हैं तो आइए नैनो करक्यूमिन की खुराक के अद्भुत लाभों पर एक नज़र डालें।

औषधीय गुणों में उच्च

नैनो करक्यूमिन हल्दी का एक अर्क है। यह उच्च औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है जो कई स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के इलाज के लिए अच्छा काम करता है। इन नैनो करक्यूमिन  में उच्च  गुण होते हैं। इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिलती है। यह त्वचा के टूटने को कम करने में भी मदद करता है।

यदि आप मुंहासों, फुंसियों या त्वचा की एलर्जी से पीड़ित हैं तो इन नैनो करक्यूमिन एक्सट्रेक्ट  के नियमित सेवन से इन समस्याओं को कम करने और अंततः इसका इलाज करने में मदद मिल सकती है। यह आपको सुंदर, चिकनी और स्वस्थ त्वचा पाने में मदद करता है। यह डैंड्रफ के इलाज और खोपड़ी को स्वस्थ रखने में भी वास्तव में अच्छा काम करता है। नैनो करक्यूमिन भी आपकी प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करता है क्योंकि यह बार-बार होने वाली एलर्जी, सर्दी और फ्लू को रोकने का प्रबंधन करता है। 

एंटीऑक्सीडेंट में उच्च

एक और कारण है कि आपको  नैनो करक्यूमिन को सेवन करने के लिए  क्योंकि यह एंटीऑक्सिडेंट में उच्च है। यदि आप सोच रहे हैं कि नैनो करक्यूमिन में ये एंटीऑक्सिडेंट आपके शरीर को कैसे लाभ पहुंचाते हैं, तो आपको पता होना चाहिए कि यह आपके सिस्टम को डिटॉक्सीफाई करने में मदद करता है। यदि आप एक प्राकृतिक प्रणाली की सफाई की तलाश में हैं तो ये पूरक  रास्ता हैं।

हल्दी कैप्सूल करक्यूमिन स्वस्थ लीवर को बढ़ावा देने में भी मदद करता है। ये पूरक स्वस्थ पाचन में सहायता के लिए भी जाने जाते हैं। नैनो करक्यूमिन की खुराक आपके पेट को साफ करने में मदद करती है और यह पेट से संबंधित सभी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करती है। इसमें कब्ज और अनियमित मल त्याग शामिल हैं। कई स्वास्थ्य समस्याओं के मूल कारणों में से एक आमतौर पर एक अशुद्ध या खराब पेट से होता है।

मस्तिष्क स्वास्थ्य को बढ़ावा देता है

तनाव, व्यस्त जीवन शैली और व्यस्त कार्यक्रम आपके स्वास्थ्य पर भारी पड़ने के लिए जाने जाते हैं। यह अक्सर स्मृति समस्याओं और ध्यान और एकाग्रता की कमी की ओर जाता है। जब नजरअंदाज किया जाता है, तो ये समस्याएं और भी बदतर हो जाती हैं और अंततः आपके लिए छोटी-छोटी बातों को याद रखना भी मुश्किल हो जाता है। इससे आपके लिए नियमित कार्यों को निर्बाध रूप से करना मुश्किल हो सकता है। अगर आप चाहते हैं कि आपका दिमाग तेज रहे और आपकी याददाश्त मजबूत रहे तो नियमित रूप से नैनो करक्यूमिन सप्लीमेंट्स का सेवन सबसे अच्छा तरीका है।

ये नैनो करक्यूमिन  कैप्सूल प्रीमियम प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करके बनाए गए हैं। इनमें कोई भराव या रसायन नहीं होता है और यह किसी भी दुष्प्रभाव की चिंता किए बिना लंबे समय तक लेने के लिए इसे सबसे प्रभावी पूरक बनाता है।

चाहे वह आपके स्वास्थ्य को बढ़ावा देना हो, स्वस्थ आंत को बढ़ावा देना हो, अपने मस्तिष्क को तेज रखना हो या केवल स्वस्थ हड्डियों और जोड़ों को बढ़ावा देना हो, नैनो करक्यूमिन हल्दी यह सब करती है। आपके लिए इन सप्लीमेंट्स को लेने का समय आ गया है ताकि आप स्वस्थ और खुश रहें।




सिंहपर्णी

 गाडर्निंग का शौक रखने वाले लोगों के घर में अगर सिंहपर्णी का पौधा मौजूद है, तो समझ लें कि आप बेहद भाग्यशाली हैं। सिंहपर्णी न सिर्फ बगीचे की शोभा बढ़ाता है, बल्कि कई स्वास्थ समस्याओं में भी लाभकारी हो सकता है। 

सिंहपर्णी एक प्रकार का पौधा है, जिसका फूल पीले रंग का होता है। इसका वैज्ञानिक नाम टराक्सेकम ऑफिसिनल (Taraxacum Officinale) है। अंग्रेजी में इसे डैंडेलियन (Dandelion) और लायंस टूथ (Lion’s Tooth) के नाम से जाना जाता है। यह पौधा औषधीय गुणों से भरपूर माना जाता है। यही वजह है कि पारंपरिक चिकित्सा में लंबे समय से इसकी पत्तियां, फूल और जड़ का प्रयोग किया जाता रहा है । माना जाता है सिंहपर्णी का उपयोग शरीर की विभिन्न बीमारियों के उपचार में एक सहायक भूमिका निभा सकता है।

सिंहपर्णी के फायदे – 

 ध्यान रहे सिंहपर्णी किसी बीमारी का इलाज नहीं है, बल्कि यह कई रोगों से बचाव और उसके लक्षणों को कम करने में मददगार हो सकता है।

1. सूजन के लिए सिंहपर्णी के फायदे

सिंहपर्णी के फायदे की बात करें, तो इसमें सूजन कम करने के गुण मौजूद होते हैं। सूजन की वजह से शरीर में कई तरह की परेशानियां जैसे- गठिया, डायबिटीज, एलर्जी और दिल की बीमारी हो सकती है । वहीं, सिंहपर्णी में एंटी-इंफ्लामेटरी यानी सूजन को कम करने वाला गुण मौजूद होता है ।

वहीं, एक अन्य शोध में यह पता चला है कि सिंहपर्णी में पॉलीसैक्राइड होते हैं। पॉलीसैक्राइड एक प्रकार का कार्बोहाइड्रेट होता है। इसमें भी एंटी-इंफ्लामेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण मौजूद होते हैं। सिंहपर्णी के यही गुण शरीर में सूजन की समस्या से काफी हद तक राहत प्रदान कर सकते हैं ।

2. कैंसर से बचाव के लिए सिंहपर्णी के फायदे

कैंसर जैसी समस्या में भी सिंहपर्णी के फायदे देखे जा सकते हैं। एक रिसर्च की मानें, तो सिंहपर्णी में एंटी कैंसर गुण मौजूद होता है । वहीं, एनसीबीआई (नेशनल सेंटर ऑफ बायोटेक्नोलॉजी इनफार्मेशन) की ओर से प्रकाशित एक दूसरे शोध में यह भी पाया गया है कि सिंहपर्णी का अर्क कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने में उपयोगी हो सकता है। यह परीक्षण चूहों पर किया गया है । हालांकि, कैंसर एक गंभीर बीमारी है। इसके लिए समय पर डॉक्टरी इलाज जरूर कराएं।

3. मधुमेह के लिए सिंहपर्णी के गुण

सिंहपर्णी का उपयोग मधुमेह के रोगियों के लिए भी लाभकारी हो सकता है। दरअसल, एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित एक शोध के अनुसार, सिंहपर्णी में एंटी डायबिटिक गुण मौजूद होता है, जो ब्लड शुगर लेवल को नियंत्रित कर टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद हो सकता है । इस आधार पर डायबिटीज के मरीजों के लिए सिंहपर्णी का पौधा लाभकारी हो सकता है।

4. हृदय के लिए सिंहपर्णी के फायदे

हृदय को स्वस्थ रखने के लिए भी सिंहपर्णी का उपयोग किया जा सकता है। एनसीबीआई की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध से इस बात का पता चला है कि सिंहपर्णी की जड़ और पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट के साथ हाइपोलिपिडेमिक यानी कोलेस्ट्रॉल को कम करने वाला प्रभाव पाया जाता है। ये दोनों गुण एथेरोस्क्लेरोसिस से जुड़े ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं ।


एथेरोस्क्लेरोसिस धमनियों (Arteries) से जुड़ी समस्या है, जिसमें धमनियों के अंदर प्लॉक जमने लगता है। धमनियों में जमने वाला प्लॉक आगे चलकर हार्ट अटैक और स्ट्रोक की वजह बन सकता है । ऐसे में हृदय स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए सिंहपर्णी जड़ की चाय का सेवन किया जा सकता है।

5. वजन घटाने के लिए सिंहपर्णी जड़ की चाय

वजन कम करने में सिंहपर्णी जड़ की चाय का सेवन लाभकारी हो सकता है। शोध की मानें, तो खाने से पहले सिंहपर्णी जड़ की चाय के सेवन से गैस्ट्रिक स्राव उत्तेजित करने के साथ वसा व कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद हो सकती है। इतना ही नहीं इसकी पत्तियों में ड्यूरेटिक यानी मूत्रवर्धक प्रभाव भी मौजूद होता है, जो वजन कम करने में सहायक हो सकता है ।

इसके अलावा, एक अन्य शोध की मानें तो सिंहपर्णी में क्लोरोजेनिक नामक एसिड पाया जाता है, जो मोटापे को कम करने में सहायक हो सकता है । ऐसे में माना जा सकता है कि सिंहपर्णी की जड़ें वजन कम करने में लाभकारी हो सकती हैं।

6. हड्डियों के लिए सिंहपर्णी के फायदे

हड्डियों के निर्माण से लेकर, उन्हें मजबूत बनाए रखने के अलावा ऑस्टियोपोरोसिस जैसे हड्डी रोग से बचाए रखने के लिए कैल्शियम सबसे जरूरी पोषक तत्व माना जाता है । वहीं, सिंहपर्णी में कैल्शियम की भरपूर मात्रा पाई जाती है । इस आधार पर कैल्शियम से भरपूर सिंहपर्णी का सेवन हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जा सकता है।

7. लिवर के लिए सिंहपर्णी के फायदे

सिंहपर्णी का उपयोग लिवर को स्वस्थ रखने के लिए भी किया जा सकता है। अध्ययन की मानें तो सिंहपर्णी में हेपाटोप्रोटेक्टिव प्रभाव पाया जाता है, जो लिवर को स्वस्थ रखने और इससे जुड़ी समस्याओं से बचाव करने में मदद कर सकता है । इतना ही नहीं, इसमें लिवर को साफ करने के गुण होते हैं और इसका सेवन शरीर को डिटॉक्सीफाई करने में भी उपयोगी हो सकता है । लिवर को स्वस्थ रखने के लिए सिंहपर्णी चाय का सेवन गुणकारी हो सकता है।

8. रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक

सिंहपर्णी रोग-प्रतिरोधक क्षमता में सुधार कर सकता है। दरअसल जानवरों पर किए गए शोध में इस बात की पुष्टि होती है। शोध में जानवरों के आहार में सिंहपर्णी के अर्क को शामिल करने से उनकी प्रतिरक्षा प्रणाली में सकारात्मक असर देखा गया। ऐसे में माना जा सकता है कि रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में सिंहपर्णी का सेवन मददगार हो सकता है ।

9. एनीमिया में सिंहपर्णी के फायदे

एक शोध में साफतौर से इस बात का जिक्र मिलता है कि घरेलू उपचार के तौर पर सिंहपर्णी का इस्तेमाल सालों से किया जा रहा है । बता दें कि आयरन की कमी एनीमिया के मुख्य कारणों में से एक है । वहीं, सिंहपर्णी में आयरन भरपूर मात्रा में मौजूद होता है । ऐसे में मान सकते हैं कि आयरन युक्त सिंहपर्णी का सेवन एनीमिया की समस्या से बचाव में सहायक हो सकता है।


एक अन्य शोध में एनीमिया के मरीजों को सिंहपर्णी और पीला बंदरगाह यानी येलो डॉक से तैयार टॉनिक पीने की सलाह दी गई है। टॉनिक बनाने के लिए 14 ग्राम लगभग 3 चम्मच दोनों जड़ी बूटियों को चार कप पानी में कम आंच पर उबालना है। जब पानी की एक चौथाई मात्रा रह जाए, तो टॉनिक बनकर तैयार है। एनीमिया के मरीज रोजाना इस टॉनिक के एक से दो चम्मच पी सकते हैं ।

10. रक्तचाप के लिए सिंहपर्णी के फायदे

सिंहपर्णी में पोटेशियम की मात्रा मौजूद होती है । शोध की मानें तो नियमित आहार में पोटेशियम को शामिल करने से रक्तचाप का स्तर कम होने में मदद मिल सकती है। साथ ही ध्यान रहे कि सिर्फ पोटेशियम के कारण ही यह संभव नहीं है। व्यक्ति को बेहतर प्रभाव के लिए आहार में सोडियम (नमक) की मात्रा को भी कम करना होगा । वहीं, अगर किसी को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है, तो वो इसका सेवन डॉक्टर से पूछकर ही करें।

11.कोलेस्ट्रॉल कम करने में सहायक

कोलेस्ट्रॉल कम करने में सिंहपर्णी के फायदे देखे जा सकते हैं। पशुओं पर किए गए एक शोध में इस बात की पुष्टि होती है। शोध में पाया गया कि सिंहपर्णी के सेवन से सेवन एचडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को बढ़ाने और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कम करने में मदद मिल सकती है। ऐसे में सिंहपर्णी का हायपोलिपिडेमिक प्रभाव कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में सहायक हो सकता है । साथ ही ध्यान रहे कि यह शोध जानवरों पर किया गया है, इसलिए यह मनुष्यों पर कितना कारगर साबित होगा इसके लिए अभी सटीक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।

12. त्वचा के लिए सिंहपर्णी के फायदे

सिंहपर्णी के फायदे सिर्फ स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि त्वचा के लिए भी है। खासतौर पर, सिंहपर्णी के पत्ते और फूल सूर्य की हानिकारक किरणों से त्वचा का बचाव कर सकते हैं । इतना ही नहीं वर्षों से इसका उपयोग एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं के लिए भी किया जाता रहा है । हालांकि, इसके उपयोग से पहले एक बार पैच टेस्ट जरूर करें।

सिंहपर्णी के पौष्टिक तत्व – 

सिंहपर्णी में मौजूद पोषक तत्वों के बारे में जानने के लिए नीचे दी गई तालिका से सहायता ले सकते हैं ।

पौष्टिक तत्व प्रति 100 ग्राम

पानी 85.6 ग्राम

एनर्जी 45 केसीएएल

प्रोटीन 2.7 ग्राम

टोटल लिपिड (फैट) 0.7 ग्राम

कार्बोहाइड्रेट, बाय डिफरेंस 9.2 ग्राम

फाइबर, टोटल डायटरी 3.5 ग्राम

शुगर 0.71 ग्राम

कैल्शियम 187 मिलीग्राम

आयरन 3.1 मिलीग्राम

मैग्नीशियम 36 मिलीग्राम

फास्फोरस 66 मिलीग्राम

पोटैशियम 397 मिलीग्राम

सोडियम 76 मिलीग्राम

जिंक 0.41 मिलीग्राम

कॉपर 0.171मिलीग्राम

मैंगनीज 0.342 मिलीग्राम

सेलेनियम 0.5 माइक्रोग्राम

विटामिन सी, टोटल एस्कॉर्बिक एसिड 35 मिलीग्राम

थियामिन 0.19 मिलीग्राम

राइबोफ्लेविन 0.26 मिलीग्राम

नियासिन 0.806 मिलीग्राम

पैंटोथेनिक एसिड 0.084 मिलीग्राम

विटामिन बी-6 0.251 मिलीग्राम

फोलेट, टोटल 27 माइक्रोग्राम

कोलिन, टोटल 35.3 मिलीग्राम

विटामिन ए, आरएई 508 माइक्रोग्राम

विटामिन ए, आईयू 10161 आईयू

लुटिन + जियाजैंथिन 13610 माइक्रोग्राम

विटामिन ई (अल्फा-टोकोफेरोल) 3.44 मिलीग्राम

विटामिन के (फिलोक्विनोन) 778.4 माइक्रोग्राम

फैटी एसिड, टोटल सैचुरेटेड 0.17 ग्राम

फैटी एसिड, टोटल मोनोअनसैचुरेटेड 0.014 ग्राम

फैटी एसिड, टोटल पॉलीअनसैचुरेटेड 0.306 ग्राम

सिंहपर्णी का उपयोग

सिंहपर्णी का उपयोग हम कैसे कर सकते हैं, इससे जुड़े कुछ तरीकों के बारे में हम नीचे जानकारी दे रहे हैं।


सिंहपर्णी का उपयोग करने का सबसे आसान तरीका है, इसे वेजिटेबल सलाद के साथ खाना। इसके लिए सब्जियों की सलाद में सिंहपर्णी की पत्तियां मिलाकर सेवन कर सकते हैं।

सिंहपर्णी का इस्‍तेमाल चाय के रूप में भी किया जा सकता है। इसके टी बैग बाजार या ऑनलाइन आसानी से उपलब्ध हैं।

सिंहपर्णी को उबालने से इसकी कड़वाहट काफी हद तक कम हो सकती है। इसे उबालने के बाद इसे प्याज और लहसुन या सब्जियों के साथ पकाकर खा सकते हैं।

वेजिटेबल सूप बनाते समय सिंहपर्णी को भी शामिल कर सकते हैं।

इसकी जड़, पत्तियों व फूलों को सुखाकर इसका चूर्ण बनाकर सेवन कर सकते हैं।

सिंहपर्णी के सप्लीमेंट का भी सेवन किया जा सकता है, लेकिन इसके पहले किसी विशेषज्ञ से इस बारे में सलाह लेना आवश्यक है।

मात्रा –

एक शोध में कब्ज के लिए सिंहपर्णी टिंचर की 1 से 15 बूंद को पानी में मिलाकर लेने की सलाह दी दई है। वहीं, वाटर रिटेंशन की समस्या में दिन में तीन बार 4 से 10 ग्राम इसकी सूखी पत्तियों से तैयार काढ़ा पीने का जिक्र किया गया है। इसकी खुराक पूरी तरह से व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिती पर निर्भर करती है। इसलिए, इसके सेवन से पहले किसी डॉक्टर या विशेषज्ञ से जानकारी जरूर लें ।


कैसे बनाएं सिंहपर्णी चाय

एक पैन में दो कप पानी डालकर गैस पर रखें।

उसमें 1 से 2 चम्मच कटी हुई सूखी सिंहपर्णी की जड़ डालकर 5 से 10 मिनट के लिए उबालें।

सिंहपर्णी चाय बनकर तैयार है। इसे छान लें।

सामान्य चाय की तरह चुस्की लेते हुए इसका सेवन करें।

सिंहपर्णी से नुकसान 

सिंहपर्णी के फायदे के साथ-साथ इसके कुछ नुकसान भी हो सकते हैं। इसलिए, सिंहपर्णी का उपयोग अगर ज्यादा किया जाए तो नीचे बताए जा रहे नुकसान हो सकते हैं।


अगर किसी व्यक्ति का शरीर संवेदनशील है, तो उसे इसके सेवन से एलर्जी हो सकती है । जिन लोगों को रैगवीड, मैरीगोल्ड और डेजी पौधों से एलर्जी की शिकायत है, उन्हें सिंहपर्णी का सेवन करने से मुंह और गले में खुजली की समस्या हो सकती है ।

अधिक मात्रा में सिंहपर्णी का सेवन डायरिया व गैस की परेशानी का कारण बन सकता है ।

जैसा कि लेख में पहले ही बताया जा चुका है कि इसमें शुगर कम करने की क्षमता होती है, इसलिए अगर कोई मधुमेह की दवा का सेवन करता है, तो उसके साथ सिंहपर्णी का सेवन करने से पहले डॉक्टरी सलाह लें।

अगर किसी व्यक्ति को किडनी की समस्या है तो वो इसका सेवन न करें। इसके अधिक सेवन से किडनी की समस्या हो सकती है। फिलहाल, इस संबंध में और शोध की आवश्यकता है।


https://www.stylecraze.com/hindi/singhparni-ke-fayde-aur-nuksan-in-hindi/



मिल्क थिस्ल


मिल्क थिस्ल का नाम सुनते ही आपके दिमाग में किसी दूध जैसे पदार्थ का ख्याल आता होगा, लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। मिल्क थिस्ल औषधीय गुणों से भरपूर पौधा है। इसके फूल बैंगनी रंग के होते हैं और इसका वैज्ञानिक नाम सिलिबम मेरियानम (Silybum Marianum) है। मिल्क थिस्ल का पौधा मुख्य रूप से यूरोप, एशिया, दक्षिणी रूस और उत्तरी अफ्रीका में पाया जाता है। इसे फूल वाली जड़ी-बूटी भी कहा जाता है । मिल्क थिज्ल के फल और बीज को लिवर और पित्तनली के इलाज के लिए उपयोग किया जा सकता है । इसके अलावा भी यह कई तरह से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है, जिसके बारे में आपको जानकारी दी जाएगी।

मिल्क थिस्ल के फायदे – 

1. लिवर स्वास्थ्य के लिए

लिवर के बेहतरीन स्वास्थ्य के लिए मिल्क थिस्ल का प्रयोग किया जा सकता है। दरअसल, मिल्क के बीज में सिलेमेरिन (Silymarin – पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड) पाया जाता है । इसके अर्क का सेवन लिवर से जुड़ी समस्याओं जैसे हेपेटाइटिस (Hepatitis – लिवर में सूजन की एक स्थिति), सिरोसिस (Cirrhosis – लिवर डैमेज की एक स्थिति) और पित्ताशय (Gallbladder) से बचा सकता है ।

2. किडनी और पित्ताशय के लिए

किडनी और पित्ताशय के उत्तम स्वास्थ्य के लिए भी मिल्क थिस्ल के फायदे देखे जा सकते हैं। किडनी को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी मिल्क थिज़्ल का प्रयोग किया जा सकता है। वहीं, मिल्क थिस्ल के बीज को ऐसा औषधीय मिश्रण बनाने में प्रयोग किया जाता है, जिसे पित्ताशय में होने वाली समस्याओं जैसे पथरी को ठीक करने में इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, यह किस प्रकार किडनी और पित्ताशय को स्वस्थ रखने में मदद करता है, इस पर अभी और वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है।

3. हृदय स्वास्थ्य के लिए

हृदय स्वास्थ्य के लिए भी मिल्क थिस्ल के फायदे देखे जा सकते हैं। ऐसा इसलिए मुमकिन हो सकता है, क्योंकि मिल्क थिस्ल में सिलीमरिन (Silymarin – एक पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड) मौजूद होता है। एक वैज्ञानिक अध्ययन में इस बात की पुष्टि की गई है कि सिलीमरिन हृदय को सुरक्षित रखने में मदद कर सकता है ।

4. डायबिटीज के लिए

डायबिटीज की समस्या और इससे होने वाले जोखिम से बचने के लिए भी मिल्क थिस्ल का प्रयोग किया जा सकता है। दरअसल, मिल्क थिस्ल में एंटी डायबिटिक क्रिया पाई जाती है । एंटी-डायबिटिक गुण के कारण मिल्क थिज़्ल का सेवन न केवल व्यक्ति को डायबिटीज के खतरे से दूर रख सकता है, बल्कि इससे होने वाले जोखिम से बचाने में भी मदद कर सकता है।

5. कैंसर के लिए

कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचने के लिए भी मिल्क थिस्ल का सेवन फायदेमंद हो सकता है। ऐसा इसलिए भी हो सकता है, क्योंकि मिल्क थिज़्ल में एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं। ये गुण कैंसर से होने वाले जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं । वहीं, अगर किसी को कैंसर जैसी समस्या है, तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।

6. हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए

हड्डियों को स्वस्थ रखने के लिए मिल्क थिस्ल का प्रयोग किया जा सकता है। इस मामले में भी मिल्क थिस्ल में मौजूद सिलीमरिन (Silymarin – एक पॉलीफेनोलिक फ्लेवोनोइड) फायेदमंद साबित हो सकता है। विशेषज्ञों के द्वारा किए गए एक वैज्ञानिक अध्ययन के अनुसार, मिल्क थिज़्ल का सेवन करने से उसमें मौजूद सिलीमरिन हड्डियों से जुड़ी विभिन्न तरह की समस्याओं से बचाने में मदद कर सकता है ।

7. मस्तिष्क स्वास्थ्य के लिए

मस्तिष्क स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए भी मिल्क थिस्ल का उपयोग लाभदायक साबित हो सकता है। यहां एक बार फिर से सिलीमरिन का जिक्र होगा। दरअसल, सिलीमरिन का मुख्य घटक सिलिबिनिन (Silibinin) मस्तिष्क विकार जैसे अल्जाइमर (बढ़ती उम्र में भूलने की बीमारी) के कुछ लक्षणों को ठीक कर याददाश्त में सुधार लाने में मदद कर सकता है ।

8. वजन घटाने के लिए

वजन घटाने के लिए भी मिल्क थिस्ल के फायदे देखे जा सकते हैं। इसके लिए ओरल रूप में मिल्क थिस्ल का सेवन किया जा सकता है।  मिल्क थिस्ल में मौजूद सिलीमरिन में ऐसे गुण पाए जाते हैं, जो वजन घटाने में मदद कर सकते हैं । यहां हम स्पष्ट कर दें कि वजन घटाने के लिए घरेलू नुस्खे के साथ-साथ संतुलित आहार व नियमित एक्सरसाइज करना भी जरूरी है।

9. इम्युनिटी बढ़ाने के लिए उपयोगी

इम्युनिटी सिस्टम को मजबूत करने के लिए भी मिल्क थिस्ल के फायदे देखे जा सकते हैं। मिल्क थिस्ल में इम्युनोस्टिम्युलेट्री प्रभाव (Immunostimulatory Effect) पाया जाता है। यह प्रभाव संक्रामक रोगों की स्थिति में इम्यून सिस्टम को बढ़ाने में मदद कर सकता है। अध्ययन में यह भी देखा गया कि मिल्क थिस्ल की खुराक बढ़ाने से इम्यून सिस्टम में भी बढ़ोत्तरी हो सकती है ।

10. पाचन के लिए

पाचन स्वास्थ्य के लिए भी मिल्क थिस्ल के फायदे देखे जा सकते हैं। एक वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, मिल्क थिस्ल का प्राकृतिक रूप से किया गया सेवन पाचन की समस्या को दूर करने का काम कर सकता है। हालांकि, अभी इस पर अधिक वैज्ञानिक शोध की आवश्यकता है कि यह किस प्रकार पाचन को बेहतर बना सकता है ।

11. एजिंग प्रक्रिया को धीमा करता है

जवां दिखने में भी मिल्क थिस्ल के फायदे देखे जा सकते हैं। दरअसल, मिल्क थिज्ल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट गुण फ्री रेडिकल्स से लड़ने का काम कर सकते हैं, जिससे एजिंग की प्रक्रिया धीमी हो सकती है। उम्र बढ़ने के संकेतों को कम करने के लिए मिल्क थिज्ल का सेवन अच्छा तरीका हो सकता है, जिसमें झुर्रियां और फाइन लाइन भी शामिल हैं ।

12. ब्रेस्टफीडिंग के दौरान

ब्रेस्टफीडिंग के दौरान मिल्क थिस्ल का सेवन करने से महिला को कुछ फायदे हो सकते हैं। ब्रेस्टमिल्क की बेहतर आपूर्ति के लिए औषधि के रूप में मिल्क थिस्ल का सेवन किया जा सकता है । दरअसल, मिल्क थिस्ल में सिलिटिडिल (Silitidil) पाया जाता है, जो ब्रेस्फीडिंग के दौरान मां के दूध निर्माण में मदद कर सकता है । यहां हम स्पष्ट कर दें कि कुछ महिलाओं को मिल्क थिस्ल का प्रयोग करने से नकारात्मक परिणामों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए, मिल्क थिस्ल के प्रयोग करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

 मिल्क थिस्ल का उपयोग 

मिल्क थिस्ल का उपयोग निम्न प्रकार से किया जा सकता है।


मिल्क थिस्ल का अर्क के रूप में सेवन किया जा सकता है।

मिल्क थिस्ल के बीज की स्मूदी बनाई जा सकती है।

मिल्क थिस्ल के बीज की चाय बनाकर पी सकते हैं।

मिल्क थिस्ल की पत्तियों को स्नैक्स के रूप में भी खाया जा सकता है।

मिल्क थिस्ल के बीज से निकले हुए तेल को खाने में भी इस्तेमाल कर सकते हैं।

मिल्क थिस्ल फूड सप्लिमेंट को भी डाइट में शामिल कर सकते हैं।

कब खाएं:

 मिल्क थिस्ल का सेवन आप दिन भर में किसी भी समय कर सकते हैं।

कितना खाएं:

 मिल्क थिस्ल की 18mg-500mg मात्रा का प्रतिदिन सेवन किया जा सकता है । हालांकि इसे डाइट में शामिल करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लें।


वैज्ञानिक प्रमाण के बावजूद इसे खाने से पहले आहार विशेषज्ञ से इसकी मात्रा के बारे में जरूर पूछना चाहिए।

मिल्क थिस्ल के नुकसान – 

मिल्क थिस्ल के सेवन से निम्नलिखित दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं, इसलिए इन्हें ध्यान में रखते हुए इसका सेवन करें ।

मिल्क थिस्ल का अधिक मात्रा में किया गया सेवन एलर्जी का कारण बन सकता है ।

ओरल रूप में मिल्क थिस्ल के सेवन से कभी-कभी सिरदर्द की समस्या भी हो सकती है।

इसका सेवन त्वचा पर खुजली, दाने, पित्ती और एक्जिमा की समस्या उत्पन्न कर सकते हैं।

मिल्क थिस्ल के ओरल रूप में सेवन से नपुंसकता की समस्या भी हो सकती है।

ओरल रूप में इसका अत्यधिक सेवन करने से अनिद्रा, दुबर्लता और घबराहट की भी समस्या हो सकती है।

कुछ दवाओं के साथ मिलक थिस्ल का सेवन इंटरैक्ट कर सकता है। इसलिए यदि आप कोई दवा ले रहे हैं तो इसे डाइट में शामिल करने से पहले डॉक्टर से चर्चा करें।

https://www.stylecraze.com/hindi/milk-thistle-ke-fayde-aur-nuksan-in-hindi/



All well capsule

All well capsule-

 Each Veg Capsules Contains: 500mg.


Moringa Leaf Ext 80 mg.

Milk thistle Ext. 30mg.

Dandelion Ext. 30mg.

Nano Curcumin Ext. 25mg.

Black Pepper 2mg.

Oreagno Leaf 30mg.

Fenugreek Ext. 40mg.

Shilajeet Ext.30 mg.

 Red Clove 5mg.

Pomegranate 30mg.

Sea buckthorn 35mg.

Catuba 25mg.

Bardock 25mg.

Ginkgo Biloba 30mg.

Spriluna 30mg.

Rose marry Ext. 25mg.

 Amla Ext. 28mg.



रविवार, 9 अक्टूबर 2022

 मेरा एक दोस्त है , शादीशुदा हैं। दो वर्ष पहले  शादीशुदा न था। तब मुझसे सलाह मांगने आए था कि शादी करनी है।

मैंने उनको समझाया भी था कि जल्दी न करो, थोड़े दिन साथ रह लो, एक-दूसरे से परिचित हो जाओ, फिर कर लेना । पर बड़ी जल्दी में थे। प्रेम साधारणतः पागलपन जैसा होता है। नहीं, हम तो सदा एक-साथ रहेंगे। देरी क्या करनी है! कल क्या छोड़ना- शादी कर ली, ...

अब दो साल में एक-दूसरे से ऊब गए, फिर आए। अब वे कहते हैं किसी तरह हमारा छुटकरा करवा दें। तो मैंने कहा कि पहले भी तुमने न मानी। तब भी जल्दी की, अब भी जल्दी मत करो। छुटकारे की इतनी जल्दी क्या है? तुम ऐसा करो कि दोनों अलग-अलग दो-चार महीने के लिए हो ही जाओ।

पति को गोआ भेज दिया। दूसरे सप्ताह वापस हाजिर कि अकेले मन नहीं लगता। पत्नी के बिना नहीं रह सकते।

मैंने कहा पहले भी तुमने भूल की थी, अब अगर तुम्हारा तलाक करवा दिया होता ? तीन दिन अलग रहे, फिर हाजिर। 

 साथ नहीं बनता । अब हम साथ नहीं रह सकते, दूसरे के साथ नहीं रह सकते! अपने से ऊबते हो, दूसरे को पकड़ते हो। दूसरे को पकड़ते हो, दूसरे से ऊब जाते हो। 

*जब अपने से ही ऊब जाते हो तो दूसरे से कैसे न ऊबोगे । * *

 थोड़ा सोचो, अब अपने से ही मन नहीं भरता, तो दूसरे से क्या खाक भरेगा !

जब तुम अपने को ही इतना प्रेम नहीं कर पाते कि अपने संग रह सको, तो तुम किसको इतना प्रेम कर पाओगे कि उसके संग रह सको...?

जो व्यक्ति अपने साथ रहना सीख गया, उसकी ज्योति जग गयी ।  अब वह किसी की तलाश में नहीं हैं। कोई न आए तो मजे में है, कोई आए तो मजे में है। अकेला हो तो उतने ही मजे में है, जितना पूरे संसार में हो तो मजे में है।

“तू करता वहीं है जो तू चाहता है। होता वहीं है जो मैं चाहता हूं। इसलिए तू वो कर जो मैं चाहता हूं। फिर होगा वहीं जो तू चाहता है।” मनुष्य की इच...