मंगलवार, 22 अगस्त 2023

परमात्मा की भक्ति

मनुष्‍य है एक द्वंद्व। प्रकाश और अंधकार का; प्रेम और घृणा का। यह द्वंद्व अनेक सतहों पर प्रकट होता है। यह द्वंद्व मनुष्‍य के कण-कण में छिपा है। राम और रावण प्रतिपल संघर्ष में रत है। प्रत्‍येक  व्‍यक्‍ति कूरुक्षेत्र में ही खड़ा है। महाभारत कभी हुआ और समाप्‍त हो गया, ऐसा नही, जारी है। हर नए बच्‍चे  के साथ फिर पैदा होता है।

इसलिए कूरुक्षेत्र को गीता में धर्मक्षेत्र कहा है, क्यों कि वहां निर्णय होता है। धर्म और अधर्म का। प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति के भीतर निर्णय होना है धर्म अधर्म का। प्रत्‍येक व्‍यक्‍ति के भीतर निर्णायक घटना घटने को है। इसलिए आदमी को कहीं राहत नहीं। कुछ भी करे, राहत नहीं। क्‍योंकि भीतर कुछ उबल रहा है। भीतर सेनाएं बंटी खड़ी है। क्‍या होगा परिणाम, इसकी चिंता होती है।

और चिंता के बड़े कारण हैं। क्योंकि घृणा के पक्ष में बड़ी फौजें हैं। घृणा के पक्ष में बडी शक्तियाँ हैं। महाभारत में भी कृष्ण की सारी फौजें कौरवों के साथ थी, केवल कृष्ण, निहत्थे  पांडवों के साथ थे। वह बात बड़ी सूचक है। ऐसी ही हालत है। संसार की सारी शक्तियाँ अँधेरे के पक्ष में है। संसार की शक्तियाँ यानी परमात्मा की फौजें। परमात्मा भर तुम्हारे पक्ष में है, निहत्था। भरोसा नहीं आता कि जीत अपनी हो सकेगी। विश्वास नहीं बैठता कि निहत्थे परमात्मा के साथ विजय हो सकेगी।

कृष्ण ही अर्जुन के सारथी थे, ऐसा नहीं, तुम्हारे रथ पर भी जो सारथी बनकर बैठा है वह कृष्ण ही है। प्रत्येक के भीतर परमात्मा ही रथ को सँभाल रहा है। लेकिन सामने विरोध में दिखायी पड़ती है बड़ी सेनाएँ, बड़ा विराट आयोजन। अर्जुन घबडा गया था। हाथ-पैर थरथरा गये थे। गांडीव छूट गया था। पसीना-पसीना हो गया था। अगर तुम भी जीवन के युद्ध में पसीना-पसीना हो जाते हो, तो आश्चर्य नहीं। हार निश्चित मालूम पड़ती है, जीत असंभव लगती है।

इस द्वंद्व में ठीक-ठीक पहचान लेना जरूरी है--कौन तुम्हारा मित्र है और कौन तुम्हारा शत्रु है। यही महाभारत की प्रथम घड़ी में अर्जुन ने कृष्ण से कहा था, मेरे रथ को युद्ध के बीच में ले चलो, ताकि मैं देख लूँ कौन मेरे साथ लड़ने आया है, कौन मेरे विपरीत लड़ने को खड़ा है? किससे मुझे लड़ना है? साफ-साफ समझ लूँ कि कौन साथी-संगी है, कौन शत्रु है?

और युद्ध के मैदान पर जितनी आसान बात थी यह जान लेना, जीवन के मैदान पर इतनी आसान नहीं। वहाँ शत्रु-मित्र सम्मिलित खड़े हैं। वहाँ जहाँ प्रेम है, वहीं घृणा भी दबी हुई पड़ी है। जहाँ करुणा है, उसी के साथ क्रोध भी खड़ा है। सब मिश्रित है। कुरुक्षेत्र के उस युद्ध में तो चीजें साफ थीं, सेनाएँ बँट गयी थीं, बीच में रेखा थी, एक तरफ अपने लोग थे, दूसरी तरफ विरोधी लोग थे, बात साफ थी किसको मारना है, किसको बचाना है। लेकिन जीवन के युद्ध में बात इतनी साफ नहीं है, ज्यादा उलझन की है। तुम जिसको प्रेम करते हो, उसी को घृणा भी करते हो। जिसको चाहते हो और सोचते हो कि जरूरत पड़े तो जान दे दूँ, किसी दिन उसी की जान लेने का मन भी होने लगता है। जिस पर करुणा बरसाते हो, कभी उसी पर क्रोध भी उबल पड़ता है। सब उलझा है। धागे एक-दूसरे में गुँथ गये हैं। जन्मों-जन्मों की गुत्थियाँ हैं। इस बात को ठीक से समझना होगा। तुम्हारे भीतर अंधकार को अलग छाँटना होगा, प्रकाश को अलग। वह जो उपनिषद के ऋषि ने परमात्मा से प्रार्थना की है : हे प्रभु, मुझे अंधकार से प्रकाश की ओर ले चल,'तमसो मा ज्योत्तिर्गमय' उसी से शुरुआत होती है साधना की।

बहुत बार भूल हो जाती है। तुम शत्रु को पोषण देते रहते हो। मित्र को जहर दे देते हो। कई बार मित्र शत्रु जैसा मालूम पड़ता है। क्योंकि कई बार मित्र सच और कठोर बातें कह देता है; और कई बार शत्रु चालबाजी कर जाता है, मीठी खुशामद करता है और मित्र जैसा लगता है।

प्रेम परमात्मा है, यही भक्ति का सार है। तो अगर परमात्मा को खोजना है, तो जो-जो तुम्हारे भीतर प्रेमपूर्ण है, उससे मैत्री करो। और जो-जो तुम्हारे भीतर द्वेषपूर्ण, उससे अ- मैत्री करो। ख्याल रखना, मैं कह रहा हूँ,अ-मैत्री। जानकर, सोचकर। अ-मैत्री का अर्थ शत्रुता मत समझ लेना। इसलिए अ-मैत्री कह रहा हूँ, नहीं तो शत्रुता ही कहता। क्योंकि जिससे तुमने शत्रुता बनायी, उससे भी एक तरह की मैत्री बन जाती है, संबंध बन जाता है। शत्रुता संबंध है। उससे नाता-रिश्ता हो जाता है। उसके और तुम्हारे बीच धागे जुड़ जाते हैं। इसलिए जानकर अ-मैत्री शब्द का उपयोग कर रहा हूँ। अमैत्री को अर्थ इतना ही है, उसकी उपेक्षा करो। उस पर ध्यान मत दो। पड़ा रहने दो एक कोने में, रहे तो, उसमें रस न लो।

रस लो प्रेम में! उँडेलो अपनी सारी जीवन ऊर्जा प्रेम के पौधे पर। प्रेम का बिरवा ही तुम्हारी तुलसी हो। उसी पर चढ़ाओ दीप। उसीपर समर्पित करो अपना जीवन। उसी की जड़ों को पुष्ट करो। इतना-सा भी ध्यान मत दो घृणा पर, द्वेष पर, क्रोध पर, देखो भी मत, क्योंकि देखने में भी ऊर्जा प्रवाहित होती है।

तुमने ख्याल किया, ध्यान ऊर्जा है। तुम जिस पर ध्यान देते हो, उसी को ऊर्जा मिलने लगती है। इसीलिए तो छोटे बच्चे तुम्हारे ध्यान के लिए इतनी आकांक्षा करते हैं। तुमने कह रखा है बच्चों को कि घर में मेहमान आ रहे हैं, शोरगुल मत करना, शांत बैठना, एक कोने में बैठकर खेलते रहना। मेहमान नहीं आए थे। तो बच्चे एक कोने में खेल ही रहे थे, तुमने क्या कह दिया कि मेहमान आ गये है, अब बच्चे कोने में नहीं खेल सकते। बीच-बीच में खड़े हो जाते हैं, आकर बताने, कि माँ, यह देखो, कि पिता, यह देखो। क्या कारण होगा? शोरगुल मचाने लगते हैं। ध्यान चाहते हैं।

तुम्हारा सारा ध्यान मेहमान पर जा रहा है। स्वभावत:। बच्चों को इसमें ईर्ष्या होती है। ध्यान भोजन है। अब तो मनोवैज्ञानिक इस सत्य को स्वीकार करते हैं कि माँ अगर बच्चे को दूध दे दे और ध्यान न दे, सिर्फ दुध दे दे उपेक्षा से, सुला दे, उठा दे, निपटा दे काम, जैसे नर्स निपटा देती है, तो बच्चे की आत्मा पंगु रह जाती है। सिकुड़ जाती है। ध्यान चाहिए। इसलिए जब तुम्हें कोई ध्यान देता है, तुम पर ध्यान देता है, तुम प्रफुल्लित होते हो, आनंदित होते हो। डसीलिए तो तुम लोगों के मंतव्यों का इतना विचार करते हो कि लोग मेरे संबंध में क्या सोचते हैं। और क्या कारण होगा? क्या पड़ी है तुम्हें कि लोग क्या सोचते हैं! सोचते रहें! लेकिन डर है कि कहीं ऐसा न हो कि ध्यान देना बंद कर दें। मैं राह से निकलूँ और कोई जयरामजी भी न करे! तो मर जाऊँगा। तो भूखा रह जाऊँगा। कहीं किसी तल पर कोई कमी रह जाएगी। राह से निकलूँ तो कम-से-कम लोग जयरामजी करें; लोग पहचानें कि मैं कौन हूँ। कितनी पीड़ा होती है तुम्हें जब तुम्हें कोई भी नहीं पहचानता कि तुम कौन हो! तब कितना तुम बता देना चाहते हो, बैंड़बाजा बजाकर कि मुझे पहचानो कि मैं कौन हूँ, कि मैं भी यहाँ हूँ।

उपेक्षा बड़ा कष्ट देती है। तुम चकित होओगे, यद्यपि चकित होना नहीं चाहिए, अगर जीवन का निरीक्षण करोगे तो तुम उस आदमी को माफ कर सकते हो जिसने, तुम्हें घृणा की, लेकिन उस आदमी को माफ नहीं कर सकते जिसने तुम्हारी उपेक्षा की। दुश्मन माफ किया जा सकता है, क्योंकि दुश्मन ने चाहे घृणा भले की हो लेकिन ध्यान तो दिया ही, तुम्हारा चिंतन तो किया ही, तुम्हारे बाबत विचार की तरंगें तो उठीं ही, लेकिन उपेक्षा! तुम गुजरे और किसी ने इस तरह देखा नहीं, जैसे कोई गुजरा ही नहीं, तुम कभी माफ न कर पाओगे।

ध्यान भोजन है। ध्यान से चीजें परिपुष्ट होती हैं। इसलिए मैं कह रहा हूँ, शत्रुता नहीं, अ-मैत्री। सिर्फ मित्रता तोड़ लो, बस इतना काफी है। मित्रता तोड़कर शत्रुता न बना लेना, नहीं तो यह फिर नये ढंग से मित्रता हो गयी, शीर्षासन करती हुई मित्रता, मगर यह मिलता ही है।

और अक्सर ऐसा हो जाता है कि तुम शत्रु के संबंध में ज्यादा सोचते हों--मित्र के संबंध में कौन सोचता है। मित्र तो मित्र है ही, सोचना क्या है। शत्रु के सबंध में सोचते हो।

प्रेम से मैत्री, द्वेष से अ-मैत्री। सारी ऊर्जा को प्रेम के बिरवे पर डाल दो। बढ़ने दो उसे, खिलने दो उसे, फूल आने दो। वही बिरवा भक्ति का प्रारंभ है। उसमें ही तुमने पूरी जीवन ऊर्जा डाली, तो एक दिन भक्ति बनेगी। और जहाँ भक्ति है, वहाँ भगवान है।

सत्य की खोज में निकले व्यक्ति को अक्सर द्वेष पकड़ लेता है। तुमने अक्सर लोग देखे होंगे--तुम देख सकते हो मंदिरों में, गुफाओं में, आश्रमों में बैठे हुए--उनके जीवन का मूल आधार परमात्मा का प्रेम नहीं है, संसार की घृणा है। परमात्मा को पाने के लिए ऐसी आतुरता नहीं है, जितनी आतुरता संसार छोड़ने की है। गलती हो गयी। शुरू से ही गलत कदम उठ गया, गलत दिशा में उठ गया। प्रभु को पाने से संसार छूट जाता है। संसार छोड़ना भी नहीं पड़ता, बीच बजार में खड़े-खड़े छूट जाता है। आदमी कमलवत हो जाता है। जल में होता है और जल छूता नहीं। वह और बात।

लेकिन एक आदमी इसी चिंता में पड़ा रहता है कि धन से कैसे छुटकारा हो, पद से कैसे छुटकारा हो, पत्नी-बच्चों से कैसे छुटकारा हो, माया-मोह से कैसे छूटूँ, इस आदमी ने अनजाने द्वेष का ही पोषण किया। यह संसार का द्वेष है। हालाँकि यह कहेगा कि मैं परमात्मा का खोजी हूँ, लेकिन इसकी जीवनगति की आधार-शिला द्वेष पर रखी है। यह संसार का द्वेषी है। संसार के द्वेष को ही यह परमात्मा का प्रेम कह रहा है, यह बात गलत है, यह बात सच नहीं है।

ऐसा समझो कि तुम कमरे में बैठे हो, उस कमरे से तुम्हें द्वेष है, तुम उस कमरे से मुक्त होना चाहते हो, तुम ऊब गये हो, तुम परेशान हो गये हो; तुमने बड़ा विषाद झेला उस कमरे में, बड़े उदास क्षण देखे, बड़े नर्क अनुभव किये, उस कमरे ने तुम्हें सिवाय दुःस्वप्नों के कुछ भी नहीं दिया है, वहाँ की एक-एक चीज रत्ती-रत्ती तुम्हारे अतीत की दुर्घटनाओं की स्मृति से भरी है, जिस तरफ आँख उठाते हो, वहीं पीड़ा छूती है; जो चीज छूते हो, उसीके साथ कुछ पुरानी ग्रंथियाँ बँधी हैं, वहाँ का सब विषाक्त हो गया है, तुम उस कमरे के प्रति घृणा से भरे हो, तुम कहते हो मुझे बाहर जाना है, लेकिन तुम्हें बाहर जो धूप है उससे कोई प्रेम नहीं है, और बाहर जो फूल खिले हैं सतरंगे, उनमें तुम्हें कुछ रस नहीं है; और बाहर वृक्षों पर जो पक्षियों ने गीत गाए, उनसे तुम्हें कुछ लेना-देना नहीं है, न तुम्हारे जीवन में धूप के इस काव्य का कोई अर्थ है, और न फूलों का, और न पक्षियों का, तुम इस घर से मुक्त होना चाहते हो, क्या इसको तुम धूप का प्रेम कहोगे? खुले आकाश का प्रेम कहोगे? हरे वृक्षों का लगाव कहोगे? इसको सौंदर्य की कोई अनुभूति कहोगे? यह आदमी अगर किसी क्षण, किसी तरह जो कि बहुत असंभव है, इस कमरे से छूट जाए--असंभव इसलिए कहता हूँ कि जिसका इतना घृणा का संबंध जुड़ा है इस कमरे से, वह छूट न पाएगा। जो कमरे से इतना डरा है, वह छूट कैसे पाएगा! भयभीत कभी नहीं छूट पाता।

और समझ लो, संयोग वश, छूट जाए, निकल भागे, तो भी यह कमरा इसका पीछा करेगा। यह जहाँ बैठेगा, आँख बद करेगा, कमरे की ही याद आएगी। क्योंकि उस कमरे के साथ इतना न्यस्त-भाव जुड़ गया है। यह तो कमरे से निकल जा सकता है लेकिन कमरा इससे नहीं निकलेगा। जहाँ बैठेगा, किसी और कमरे में बैठेगा, उसकी दीवाल भी इसी कमरे की याद दिलाएगी। न तो इसे धूप दिखायी पड़ेगी, न धूप में उड़ते हुए बादल दिखायी पड़ेंगे। यह उनके लिए आया ही नहीं है। इसकी आने की प्रेरणा ही गलत है।

फिर एक दूसरा आदमी है, जिसको इस कमरे से न कुछ विरोध है, न कोई लगाव है, उपेक्षा है। लगाव हो, तब तो छोड़ ही नहीं सकता इस कमरे को। द्वेष हो, तब भी नहीं छोड़ सकता, क्योंकि द्वेष भी लगाव ही है, विकृत हो गया लगाव, फट गया लगाव। जैसे दूध फट जाता है। है तो दूध ही, लेकिन स्वाद खट्टा हो गया, पीने योग्य न रहा। है तो दूध ही, फट गया। लगाव फट जाता है तो उसे हम द्वेष कहते हैं।

जिस आदमी का न तो लगाव है इस कमरे से, न द्वेष है इस कमरे से, अ-लगाव है, अ-मैत्री है--रहे तो कोई हर्जा नहीं है, इसी कमरे में सोया रहे तो कोई हर्जा नहीं, इस कमरे का विचार नहीं उठता, चला जाए तो कोई खास, इस कमरे से चले जाने में ही कोई मोक्ष नहीं मिल जानेवाला है।

यह आदमी धूप के प्रेम से भरा है। यह फूलों की गंध इसे पुकार रही है, इसे खुला आकाश निमंत्रण दे रहा है। इसकी प्रीति है खुले से, स्वतंत्रता से, मुक्ति से, जहाँ बाधा नहीं दीवालों की, जहाँ असीम है। यह विराट में उत्सुक है।

ये दोनों आदमी इस कमरे से बाहर निकलेंगे, और अगर तुम इन दोनों को निकलते देखो तो तुम्हें कुछ भेद दिखायी न पड़ेगा। लेकिन बड़ा भेद है, महाभेद है। पहला, कमरे से निकल रहा है, लेकिन कमरा उसके भीतर रहेगा। दूसरा, कमरे में कभी था ही नहीं, अ-मैत्री थी। शत्रुता भी नहीं थी, मित्रता भी नहीं थी। मित्रता, शत्रुता, दोनों का अभाव था। विरक्ति थी, वैराग्य था। यह आदमी निकल रहा है, ये दोनों आकर धूप में खड़े हो जाएँगे, पहला आदमी जो कमरे से द्वेष के कारण निकल आया है, अब भी कमरे की ही याद से भरा होगा, उसकी आँखों पर एक पर्दा पड़ा होगा, धूप उसे दिखायी न पड़ेगी। उसकी आँखों में अभी भी अँधेरा होगा। कमरा उसे घेरे है। कमरा एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है। यह जो आदमी कमरे के प्रति कोई लगाव नहीं रखता, विरोध भी नहीं रखता, इसकी आँखें खुली हैं, कोई पर्दा नहीं है, इसे सूरज मोह लेगा, यह नाचेगा धूप में। यह आनंदमग्न होगा। इसके जीवन में रसधार बहेगी।

तो पहली बात, साफ-साफ समझ लेना जरूरी है कि जो भी तुम्हारे भीतर प्रेम का तत्व है, वही परमात्मा की पहली किरण है। तुम्हारे भीतर जो भी द्वेष का तत्व है, वही बाधा है। द्वेष से अ-मैत्री साधो, प्रेम से मैत्री साधो।

द्वेष का अर्थ होता है, घृणा, क्रोध, नकारात्मक वृत्तियाँ। विरोध, निषेध, नकार, विध्वंस, विनाश। द्वेष मिटाना चाहता है। और मिटाने वाली किसी भी प्रवृत्ति से बहुत ज्यादा आंदोलित हो जाना खतरनाक है। क्योंकि जब तुम मिटाते हो, तो तुम भी मिटते हो। बिना मिटे मिटा नहीं सकते हो। जो हत्या करता है, वह आत्महत्या भी कर रहा है। जो दूसरे को दुख पहुँचाता है, वह अपने दुख के बीज बो रहा है। जो दूसरों को नरक में ढकेल रहा है, वह स्वयं भी नरक की सीढ़ियाँ उतर रहा है। उसे पता हो, पता न हो, यह और बात। लेकिन दुनिया में विध्वंस करके कोई सृजन को उपलब्ध नहीं होता। मिटानेवाला खुद मिट जाता है। जो दूसरों के लिए गड्ढे खोदता है, एक दिन अचानक पाता है, उन्हीं गड्ढों में खुद गिर गया है।

सृजन सृजनात्मक है। दोहरे अर्थो में। जब तुम एक गीत रचते हो, तो एक तरफ तो गीत रचा जाता है, दूसरी तरफ गीतकार रचा जाता है। गीत के रचने में ही तो गीतकार का जन्म है। जब एक माँ से एक बच्चा पैदा होता है, तो तुम यह सोचते हो, बच्चा पैदा हुआ, बस इतना ही सोचते हो? माँ पैदा हुई, ऐसा नहीं सोचते? तो तुम भूल गये। तुमने बात पूरी नहीं देखी। यह बच्चा पैदा होना एक पहलू है, दूसरी तरफ यह स्त्री कल तक माँ नहीं थी, आज से माँ है, यह दूसरा पहलू है। और ध्यान रखना, एक स्त्री में और एक माँ में बड़ा फर्क है। स्त्री स्त्री है, सिर्फ संभावना है। बीज और वृक्ष में फर्क करोगे या नहीं करोगे? ऐसे ही स्त्री और माँ का फर्क है।

माँ है, स्त्री में फूल आ गये, फल आ गये। स्त्री फलवती हुई। जब तक स्त्री माँ नहीं है, तब तक कुछ खाली-खाली होता है। तब तक कुछ भराव हुआ नहीं। तब तक पात्र रिक्त है। उसका गर्भ रिक्त है, तो पात्र रिक्त है। जब स्त्री गर्भवती होती है तो उसमें एक अनूठा सौंदर्य और प्रसाद झलकने लगता है। गर्भवती स्त्री को चलते देखा? गर्भवती स्त्री के चेहरे पर गरिमा देखी? गर्भवती स्त्री के चेहरे से झलकती आभा देखी? वही आभा, जो वृक्ष फलवान होकर प्रगट करता है। ऐसे ही कोई जब गीत लिखता है, एक तरफ गीत रचा जाता है, दूसरी तरफ गीतकार रचा जाता है। जब कोई मूर्ति रचता है, इधर मूर्ति बनती है, उधर मूर्तिकार बनता है। जब कोई वीणा पर संगीत को जन्म देता है, इधर संगीत का जन्म होता है, उधर वीणावादक का जन्म होता है।

सृजन दोहरा है, जैसा विध्वंस दोहरा है। प्रेम सृजनात्मक ऊर्जा है। द्वेष विध्वंसक ऊर्जा है। द्वेष की प्रतीक-प्रतिमाएँ, जैसे एडोल्फ हिटलर। प्रेम की प्रतीक-प्रतिमाएँ, जैसे कृष्ण, जैसे बुद्ध, जिनके जीवन में करुणा और प्रेम के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं; वे अपने परम फल को उपलब्ध हो गये हैं। उन्होंने परम संपदा पा ली।

हिटलर का जीवन रिक्त है। हिटलर एक खंडहर है। मिटाने में कोई और हो भी नहीं सकता, खंडहर ही होगा। कुछ और हो भी नहीं सकता।

तो ख्याल रखो, द्वेष सूत्र है तुम्हारे भीतर नकारात्मकता का। नर्क का द्वार है द्वेष। फिर तुम किससे द्वेष करते हो, इससे बहुत फर्क नहीं पड़ता। तुम संसार से द्वेष करो तो भी वह द्वेष है। और जो संसार से द्वेष करता है, वह परमात्मा को कभी पा न सकेगा, क्योंकि परमात्मा परम विधायकता का नाम है। नकार से तुम कैसे विधायक पर पहुँचोगे? नहीं कहकर तुम कैसे हाँ को पाओगे? यह असंभव है। नहीं की ईंटों को रखते-रखते तुम हां का मंदिर न बना पाओगे। न की ईंटों को रख-रख कर तुम नर्क ही निर्मित करोगे।

इसलिए द्वेष से आंदोलित मत होना। आंदोलित प्रेम से होना। और फिर मैं तुमसे कह दूँ-संसार के प्रेम में पड़ा हुआ आदमी भी बेहतर है उस आदमी से जो संसार के द्वेष में पड़ गया है। माना कि संसार का प्रेम क्षुद्र का प्रेम है, क्षणभंगुर का प्रेम है, बहुत दुख लाएगा, लेकिन कम-से-कम प्रेम तो है। क्षणभंगुर ही सही, लेकिन विधायक तो है। और जो आदमी संसार के द्वेष में पड़ गया है, यह आदमी और भी उपद्रव में पड़ गया है। द्वेष इसे घेर लेगा। धीरे-धीरे द्वेष का अंधकार इसे पकड़ लेगा। यह कितनी ही प्रार्थनाएँ करे और पूजाएँ करे, इसकी सब प्रार्थनाएँ व्यर्थ हैं, और इसकी सब पूजाएँ व्यर्थ हैं। द्वेष से प्रार्थना उठती ही नहीं। द्वेष में प्रार्थना का अंकुर आता ही नहीं।

भक्त कहता है--संसार से द्वेष नहीं, परमात्मा से राग। यह भक्ति की आधार शिला है। तथाकथित ज्ञानी और तपस्वी कहता है संसार से द्वेष। फर्क दोनो की भाषा का है। ज्ञानी और तपस्वी कहता है--विराग, संसार से विराग, भक्त कहता है--प्रभु से राग। भक्त विधायक है।

भक्ति ने मनुष्य के मनोविज्ञान को बहुत गहराई से पकड़ा है। द्वेष करनेवाले बहुत मिल जाएँगे, क्योंकि द्वेष सस्ता है। भगोडे बहुत मिल जाएँगे, ससार को घृणा करनेवाले बहुत मिल जाएँगे, क्योंकि घृणा ही करना लोग जानते हैं। लेकिन संसार की घृणा से परमात्मा के प्रेम की सुगंध नहीं उठी कभी, नहीं उठेगी कभी। संसार के प्रति तुम्हारा जो प्रेम है, उस प्रेम को परमात्मा की तरफ मोड़ो, मगर संसार के प्रति घृणा का संबंध मत बना लेना, नहीं तो चूक गये-चले भी और चले भी नहीं। एक पैर उठाया और दूसरे पैर में जंजीर बाँध ली।

दूसरा शब्द राग समझ लेना चाहिए, फिर परमात्मा को समझना आसान हो जाएगा। राग का अर्थ होता है--प्रीति। शुद्ध प्रीति। प्रेम। रागशब्द बड़ा अनूठा है। चाहत, अभीप्सा। राग का अर्थ होता है, जिसके बिना रहने में कोई अर्थ नहीं। जिसके साथ मरना भी हो जाए, तो भी सार्थकता है। और जिसके बिना जीना पड़े, तो जीना भी व्यर्थ है। जिसके बिना तुम अपने जीवन को व्यर्थ पाते हो, अर्थहीन पाते हो, उससे तुम्हारा राग है।

किसी का धन से राग है। वह सोचता है, धन के बिना सब व्यर्थ है। हालाँकि उसका राग गलत विषय से लगा है। क्योंकि जिस दिन धन कमा लेगा, उस दिन पाएगा कि कुछ कमाया नहीं, गँवाया। धन तो हाथ आ गया, निर्धनता नहीं मिटी। धन के तो ढेर लग गये और भीतर निर्धनता के गड्ढे और बड़े हो गये।

किसी का पद से राग है। तो सोचता है जब तक प्रधानमंत्री न हो जाऊँ, कि राष्ट्रपति न हो जाऊँ, तब तक, तब तक जीवन असार है; प्रधानमंत्री होकर ही मरना है। प्रधानमंत्री होकर पता चलेगा कि जीवन व्यर्थ गया। बड़ी कुर्सी पर बैठकर तुम बड़े न हो जाओगे। सच तो यह है कि जितनी बड़ी कुर्सी हो, उतने ही तुम्हारे छोटेपन को प्रगट करेगी। बड़ी कुर्सी पृष्ठभूमि बन जाएगी। बड़ी लकीर बन जाएगी। उसके सामने तुम छोटी लकीर हो जाओगे।

इसलिए पद पर पहूंचकर लोग जितने छोटे सिद्ध होते हैं, उतने और किसी तरह से सिद्ध नहीं होते। जहाँ शक्ति होती है वहाँ पता चलता है। शक्ति निश्चित रूप से लोगों के भीतर जो भी भ्रष्ट था उसे प्रगट करने का कारण बन जाती है। क्योंकि मौका मिल गया। इच्छाएँ तो सदा से थीं, लेकिन पूरा करने की सुविधा नहीं थी। सुविधा नहीं थी, तो दुनिया को हम यही दिखाते थे कि इच्छाएँ ही नहीं हैं। क्योंकि सुविधा नहीं है, यह कहने में तो पीड़ा होती है। इच्छाएँ ही नहीं हैं। जब सुविधा मिलती है, तब असलियत प्रगट होती है, सब इच्छाएँ दबी पड़ी थीं, प्रगट होने लगती हैं। जैसे वर्षा आ गयी, सब बीज जो जमीन में पड़े थे, अंकुरित हो गये। सब तरफ घास-पात उगने लगा। ऐसे ही जब शक्ति की वर्षा होती है, तो तुम्हारे भीतर सारी इच्छाएं, दमित इच्छाओं का अनुकरण शुरू हो जाता है। तब आदमी बडा क्षुद्र मालूम होता है। और बड़े-से-बड़े पद पर पहूंचकर भी यह पक्का पता चल जाता है--पक्का पता तभी चलता है--कि हाथ तो कुछ लगा नहीं। और जिंदगी पूरी गँवा बैठे। जिंदगी हाथ से निकल गयी और यह कचरा कमाया। इसका कोई मूल्य नहीं है।

लेकिन राग का अर्थ है--जिससे जीवन में अर्थ आएगा, उस संबंध का नाम राग है। गलत राग होते हैं, सही राग होते हैं। द्वेष सदा गलत होता है, राग सही भी होते हैं, गलत भी होते हैं। धन से राग है तो गलत है। ध्यान से जुड़ जाए तो सही है। पद से राग है तो गलत है, प्रभु से जुड़ जाए तो सही है। मैं इसे फिर दोहरा दूँ  --द्वेष सदा गलत होते हैं, क्योंकि द्वेष ही गलत है, राग सदा सही नहीं होते, और न सदा गलत होते हैं। इसलिए मैने तुमसे कहा कि राग के बहुत रूप हैं। स्नेह, अपने से छोटे के प्रति हो; समान के प्रति हो तो प्रेम, अपने से बड़े के प्रति हो तो श्रद्धा, और सब सीमाओं से मुक्त हो जाए, किसी विशेष के प्रति न हो, इस समस्त अस्तित्व के प्रति हो, तो भक्ति।

राग प्यारा शब्द है, इसके बहुत अर्थ होते हैं। एक अर्थ रंग भी होता है। जहाँ राग है, वहाँ रग भी है। इसीलिए तो राग-रंग शब्‍द है। रंग, यानी उत्सव। जहाँ राग है, वहाँ फूल भी खिलेंगे। जहाँ राग है, वहाँ इंद्रधनुष भी उठेंगे। जहाँ राग है, वहाँ गीत भी होगा, गान भी होगा, नृत्य भी होगा। जहाँ राग है, वहाँ मरुस्थल नहीं होंगे, मरुद्यान होंगे। जहाँ राग है, वहाँ हरियाली होगी।

इसलिए भक्त के जीवन में हरियाली होती है, ज्ञानी के जीवन में रूखा-सूखापन होता है। ज्ञानी का जीवन मरुस्थल जैसा होता है। कहीं कोई हरियाली नहीं, कोई फूल नहीं, कोई सरिता नहीं, कोई झील नहीं। भटक जाओ तो जल के कण को तड़फ जाओ। सब सखा-सूखा। ज्ञानी के जीवन में काव्य नहीं होता। रंग ही नहीं उठते। ज्ञान बेरौनक है। बे-रंग। भक्ति में बड़े रंग उठते है, बड़ी तरंगें उठती है। इसीलिए तो मीरा के शब्दों में जो रस है, वह कुंदकुंद के शब्‍दो में नहीं हो सकता। और कुदकुद भी पहुँच गये। लेकिन पहुँचे हैं मरुस्थल से। उन्हें फूलों का पता ही नहीं--फूल उनके मार्ग में आए ही नहीं।

भक्त की वाणी में तो कभी-कभी इतना रस होता है कि लोग समझने की भूल कर देते हैं। उमर खैयाम के साथ ऐसा हुआ। उमर खैयाम भक्त है; सूफी-भक्त, पहुँचा हुआ फकीर। लेकिन बड़ी भूल हो गयी उसके संबंध में, सारी दुनिया की भूल हो गयी। क्योंकि वह स्त्रियों के गीत गाता है, और मधुशाला के, और मधुशाला के। लोगों ने समझा कि यह तो शराब का ही गुणगान कर रहा है। वह समाधि की बात कर रहा है--समाधि को उसने नाम दिया शराब। क्योंकि समाधि में भी नशा है। ऐसी शराब कि एक दफा पी तो पी, फिर कभी नशा उतरता नहीं, टूटता नहीं, चढ़ा तो चढ़ा, उतरना नहीं जानता। और जब वह प्रेयसी की आँखों की बात कर रहा है, तो भूल मत करना। सूफी फकीर परमात्मा को प्रेयसी की तरह देखते हैं। वह परमात्मा की चर्चा है। वे आंखें किसी स्त्री की नहीं हैं, वे परम परमात्मा की हैं। लेकिन सूफियों की धारणा परमात्मा के संबंध में स्त्री की है। जैसे हिंदुओं की धारणा परमात्मा के संबंध में पुरुष की है। तो हिंदू कहते हैं--परमात्मा पुरुष, और हम सब तो उसकी गोपियाँ हैं।

मीरा गयी वृंदावन। कृष्ण के मंदिर में जाना चाहती थी, दरवाजे पर रोकने का आयोजन था, क्योंकि उस मंदिर में कोई स्त्री को प्रवेश नहीं दिया जाता था। अब यह भी हद हो गयी! दुनिया में बड़ी मूढताएँ होती हैं! कृष्ण का मंदिर और स्त्री को प्रवेश नहीं!  मगर कारण यह था कि जो पुजारी था, उसने व्रत ले रखा था ब्रह्मचर्य का, वह स्त्रियों को देखता नहीं था। कृष्ण के कारण नहीं था बधन, बंधन पुजारी के कारण था। पुजारियों के कारण कृष्ण तक मुसीबत में पड़ जाते हैं!

उसने वर्षों से स्त्री नहीं देखी थी। खबर आयी कि मीरा आती है और कृष्ण के मंदिर में जरूर आएगी। तो वह डर गया होगा। द्वारपाल खड़े कर रखे थे। लेकिन जब मीरा आयी मस्ती में नाचती, तो उसकी मस्ती ऐसी थी कि द्वारपाल भूल गये। वह तो नाचती भीतर प्रवेश कर गयी। उसकी मस्ती ऐसी थी कि रोकने की हिम्मत न पड़ी। उस मस्ती को रोकता भी तो कोई कैसे रोकता। द्वारपाल किंकर्त्तव्यविमूढ़ खड़े रह गये। मीरा तो आयी हवा की तरह और चली भी गयी भीतर। जब चली गयी तब उन्हें होश आया कि यह तो मामला गड़बड़ हो गया।

लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी, मीरा तो जाकर मंदिर में पहुँच गयी थी। पुजारी का थाल हाथ से गिर पड़ा। कृष्ण की पूजा कर रहा था, सच तो यह है मीरा उसे दिखायी नहीं पड़नी चाहिए। जब पूजा में कोई जुड़ा हो तब कौन किसको देखता है। मगर वह पूजा सब उसकी थी जिनको संसार से द्वेष है। धूप से प्रेम नहीं, घर के भीतर रहने में क्रोध है। हाथ से थाल छूट गया, वह तो बहुत क्रुद्ध हो गया। द्वारपाल भी जिसकी मस्ती से खो गये थे, उसकी मस्ती से वह पुजारी अछूता ही रह गया। बिलकुल सूख गया होगा।

एक सीमा होती है। वृक्ष की जड़ें जिंदा हों, पत्ते गिर गये हों और शाखाएँ सूख गयी हों और वर्षा आ जाए तो फिर अंकुर हो जाते हैं। लेकिन अगर जड़ें ही सूख गयी हों, तो फिर वर्षा के आने पर भी कुछ नहीं होता, ठूँठ ठूँठ की तरह रह जाता हे। वह पुजारी ठूँठ रहा होगा। वह तो बड़ा क्रुद्ध हो गया। उसने कहा कि यह कैसे तुमने प्रवेश किया? मैं स्त्रियों को देखता ही नहीं।

मीरा हँसी, और मीरा ने बड़ी  बात कही। मीरा ने कहा--मैंने तो सोचा था कि इतने दिन तुम्हें कृष्ण की भक्ति करते हो गये, अब तक एक बात समझ में आ गयी जाएगी कि पुरुष तो एक ही है, कृष्ण, और तो सब स्त्रियाँ हैं। तुम भी स्त्री हो, मैं भी स्त्री हूँ, अगर कृष्ण को समझे हो तो। मुझे तो कोई दूसरा पुरुष दिखायी नहीं पड़ता। तुम्हें दूसरा पुरुष भी दिखायी पड़ता है?

परमात्मा को या तो पुरुष की तरह सोचो, या स्त्री की तरह सोचो। इससे भेद नहीं पड़ता। लेकिन दोनों हालत में प्रेम का सेतु बने।उमर खैयाम स्त्री की तरह सोचता है। इसलिए उमर खैयाम की वाणी में और भी लालित्य है, और भी मदिरा है, और भी नशा है। मीरा से भी ज्यादा। मीरा में तो रस है, लेकिन मीरा का भगवान तो पुरुष है। तो पुरुष तो पुरुष होगा ही। कृष्‍ण भी हों और कितना ही मोर-मुकुट बाँधकर खड़े हों, तो भी होंगे तो कृष्ण ही! कब धनुष-बाण ले लेंगे हाथ में, क्या पता! वचन भी दे दिया था युद्ध में कि शस्त्र हाथ नहीं लेंगे, लेकिन ले लिया, भूल गये। पुरुष आखिर पुरुष है। आक्रमणता उसके भीतर छिपी हुई वृत्ति है।

तो जो लालित्य उमर खैयाम में है, क्योंकि उसका परमात्मा स्त्री है, जो कामनीयता उमर खैयाम में है, वह मीरा में नहीं है। खूब रस है, मगर थोड़ा सोचो, परमात्मा अगर स्त्री हो, फिर तुम जितना कमनीय चाहो, जितना सुंदर चाहो, फिर कोई सीमा नहीं है।

उमर खैयाम बहुत गलत समझा गया। गलत समझा गया है इसलिए कि उसने ज्ञान की भाषा नहीं बोली राग की भाषा बोली। उसने द्वेष की भाषा नहीं बोली, उसने प्रेम की भाषा बोली। प्रेम इस जगत में मुश्किल से समझ जाता है। क्योंकि लोग इतने अप्रेम से भरे हैं। अप्रेम तो समझ लेते हैं। तुम्हारे लिए भी समझ में आ जाता है कि संसार व्यर्थ है, छोड़ो; तुम्हारे भीतर भी संसार के प्रति घृणा पैदा करना आसान है--घृणा से तो तुम सुबक रहे हो, उबल रहे हो--लेकिन तुम्हारे भीतर प्रेम की एक किरण पैदा करनी बहुत कठिन है। क्योंकि प्रेम से तो तुम्हारा परिचय ही नहीं हुआ।

राग का एक अर्थ है--रंग। रंग यानी इंद्रधनुष। रंग यानी फूल। रंग यानी तितलियाँ। रंग यानी रूप। रंग यानी सौंदर्य। भक्त का मार्ग सौंदर्य का, रूप का, रस का मार्ग है।

राग का एक अर्थ--गीत, गान, लय, लयबद्धता भी है। वह भी बड़ा प्यारा अर्थ है। क्योंकि जहाँ भक्ति है, जहाँ प्रेम है, वहाँ गान है, गीत है, वहाँ वीणा बजेगी, वहाँ कोई पैर में घुंघँरू बाँधकर नाचेगा--पद घुँघरू बाँध मीरा नाची रें--वहाँ कोई तार छेड़ेगा। वहाँ सन्नाटा नहीं होगा, वहाँ संगीत होगा। वहाँ चुप्पी नहीं होगी, वहाँ चुप्पी में भी राग होगा, अनाहत होगा, ओंकार होगा। 

राग, यानी नाद। जहाँ राग है, वहाँ उत्सव है। जहाँ राग है, वहाँ स्वीकार है। जहाँ राग है, वहाँ धन्यवाद का भाव है, अनुग्रह का भाव है। जहाँ राग है, वहाँ रस है, वह परमात्मा रसरूप है। रस का अर्थ होता--जैसे वृक्षों में हरा जीवनरस बहता। वही तो खिलता फूलों में। रस का अर्थ है--जैसे तुम्हारे भीतर श्वाँस में प्राण बहता। वही तो जिलाता तुम्हें, जगाता तुम्हें। रस का अर्थ होता है--जिसके बिना जीवन नहीं, जिसके बिना खिलावट नहीं; जो जीवन का पोषक है। परमात्मा इस जीवन का रस है।

जो संसार से विरस हो गया, जरूरी नहीं कि परमात्मा के रस को पा ले। लेकिन जो परमात्मा के रस में डूब गया, संसार के लिए बचता ही नहीं। उसे यहाँ फिर संसार दिखायी ही नहीं पड़ता, परमात्मा ही दिखायी पड़ता है--उसके ही रस की विभिन्न भावभगिमाएँ, उसके ही रस के अलग-अलग रूप, उसके ही रस के अलग- अलग ढंग। वही स्त्री में, वही पुरुष में, वही पशु में, पक्षी में, वही चाँद-तारों में। 

द्वेष का प्रतिकूल और रस शब्द का प्रतिपादक होने के कारण ही भक्ति का नाम अनुराग है। द्वेष का प्रतिकूल । जरा-सी भी द्वेष की गुंजाइश नहीं है भक्ति में। किसी तरह के द्वेष की गुंजाइश नहीं है। शांडिल्य के सूत्र बड़े अद्भुत हैं, छोटे-छोटे सूत्र, मगर सब कह दिया जो कहने योग्य है, या जो कहा जा सकता है। या जिसे कहने की जरूरत है। ' द्वेष का प्रतिकूल'। हो गयी परिभाषा भक्ति की! और रस  के जो अनुकूल है। द्वेष के प्रतिकूल और रस के अनुकूल, वही भक्ति।

रसस्वी बनो। रसिक बनो। रसाल बनो। रस में डूबों और रस में डुबाओ। इसी रस को उमर खैयाम ने मदिरा कहा है, शराब कहा है। और भक्त एक मद्यप है। भक्त एक पियक्कड़ है। खुद भी ढालता, औरों को भी ढालता। वहाँ रूखापन, सूखापन, नहीं है, वहाँ गणित और तर्क नहीं है। वहाँ जीवन को पकड़ने के लिए बुद्धि के ढांचों से काम नहीं लिया जाता, वहाँ हृदय खोला गया है। वहाँ हृदय की उन्मत्तता है।

द्वेष का जो प्रतिकूल है और रस शब्‍द का जो प्रतिपादक है, उसका नाम ही भक्ति है, इसीलिए भक्ति को अनुराग कहा है।

वह ज्ञान की भाँति अनुष्ठानकर्ता के आधीन नहीं है। 

यह सूत्र आधारभूत सूत्रों में एक है। खूब गहराई से समझना--

' वह ज्ञान की भाँति अनुष्ठानकर्ता के आधीन नहीं है '। ज्ञान तो तुम्हारे हाथ में है, जितना चाहो अर्जित कर लो। जाओ विश्वविद्यालय, रहो काशी में, पंडितों के पास बैठो, शास्त्रों का अध्ययन-मनन करो, तोता बन जाओ, खूब ज्ञान इकट्ठा हो जाएगा, ज्ञान इकट्ठा करना तुम्हारे हाथ में है। इसलिए ज्ञान  तुमसे बड़ा तो हो ती नहीं सकता। ज्ञान तुमसे सदा छोटा होगा। और जरूरत है कुछ तुमसे बड़े की। ज्ञान के ऊपर तुम्हारा हस्ताक्षर होगा। तो ज्ञान कूड़ा-करकट होगा। जिसको तुमने इकट्ठा कर लिया, जिसको तुम इकट्ठा कर पाए, उसमें विराट की गंध नहीं हो सकती।

इसलिए शांडिल्य कहते है, भक्ति तुम्हारे हाथ से बाहर है। भक्ति परमात्मा का प्रसाद है, मनुष्य का प्रयास नहीं।

इन दो शब्दों में सारा भेद है, प्रयास और प्रसाद। तुम भक्ति इकट्ठी नहीं कर सकते, कहाँ इकट्ठी करोगे? भक्ति सीख भी नहीं सकते, कहाँ सीखोगे? सीखी गयी भक्ति झूठी होगी। ऐसे किसी को डोलते देखकर तुम डोलने लगोगे तो मीरा नहीं हो जाओगे। और किसी को नाचते देखकर तुम नाचने लगोगे तो चैतन्य नहीं हो जाओगे। और किसी को लड़खड़ाते चलते देखकर तुम लड़खड़ाकर चलने लगोगे तो उमर खैयाम नहीं हो जाओगे। भीतर तो तुम जानोगे कि मैं बनकर चल रहा हूँ। रस तो बहेगा ही नहीं। डाँवाडोल चलोगे तो भी सँभले रहोगे। और सामने से कार आ जाएगी तो सब भूल जाओगे। उचक कर किनारे पर खड़े हो जाओगे। सत्र रसविमुग्ध्रता चली जाएगी। या रुपयों की एक थैली पास में पड़ी दिखायी पड़ जाएगी, नाच रुक जाएगा। तुम्हारा नाच उधार होगा, बासा होगा। अनुकरण होगा, कार्बन काँपी होगी।

ज्ञान तो आदमी इकट्ठा कर सकता है, क्योंकि ज्ञान है ही उधार। लेकिन भक्ति कोई इकट्ठी नहीं कर सकता, संग्रहीत नहीं कर सकता। भक्ति आती है। तुम बुला सकते हो भक्ति को, निमंत्रण भेज सकते हो, पाती लिख सकते हो, द्वार खोलकर खड़े हो सकते हो, अपनी झोली फैला सकते हो, मगर जब आएगी तब आएगी, तुम्हारे वश में नहीं है। जैसे सूरज निकलता है, तुम अपना द्वार खोलकर रखो, जब सूरज निकलेगा तो उसकी रोशनी तुम्हारे घर कों भर देगी। बस द्वार बंद न रहे, इतना ही कर सकते हो। तुम सूरज को गठरियों में बाँधकर घर के भीतर नहीं ला सकते। तुम्हारे हाथ के बाहर है सूरज। तुम सूरज को आज्ञा नहीं दे सकते कि मुझे अभी रोशनी की जरूरत है, निकलो, अब सुबह होनी चाहिए। सूरज जब निकलेगा, तब निकलेगा। हाँ, तुम जब सूरज निकला हो तब अपना द्वार बंद रख कर सूरज को रोक सकते हो।

इस फर्क को समझ लेना। भक्ति को कोई चाहे तो रोक सकता है, लेकिन ला नहीं सकता। नकारात्मक दृष्टि से तुम क्षमताशाली हो। सूरज निकला रहे, तुम आँख बंद किये रहो तो क्या करेगा सूरज? तुम अँधेरे में रहे आओगे। लेकिन सुरज न निकला हो, तो तुम कितनी ही आँखें फाड़-फाड़कर देखो, तो भी कुछ न होगा। भक्ति आती है, भक्ति भगवान से आती है। तुम सिर्फ पात्र बनो। तुम ग्राहक बनो। तुम स्त्रैण बनो। कर्तृत्व का भाव भक्ति में काम नहीं देगा, बाधा बन जाएगा। भक्ति संकल्प नहीं है, समर्पण है। तुम झुको, प्रतीक्षा करो; पुकारो, रोओ, और राह देखो, जब होगा तब होगा। होता निश्चित है। जब भी तुम्हारा रुदन पूरा हो जाता है, और तुम्हारे आँसू हार्दिक हो जाते हैं, और जब तुम्हारी पुकार वास्तविक हो उठती है, जब तुम्हारा रोआं-रोआं आंदोलित हो उठता; जब तुम्हारे प्राण के कोने-कोने में प्रतीक्षा के अतिरिक्त और कुछ भी नहीं होता, जब तुम सब द्वार खोल देते, सब खिड़कियाँ खोल देते, सब कपाट खोल देते, और तुम कहते--आओ, पुकारते हो, प्रार्थना करते हो, और प्रतीक्षा करते हो--अनंत धैर्य चाहिए भक्त को, क्योंकि कौन जाने कब परमात्मा द्वार पर आए! आधी रात आए, तो भक्त को जागा होना चाहिए। कब द्वार पर दस्तक दे दे, तो भक्त को प्रतीक्षारत होना चाहिए।

जैसे प्रेमी की तुम राह देखते--तुम्हारा प्रेमी आ रहा, या तुम्हारी प्रेयसी आ रही, या मित्र आ रहा, तो तुम सो नहीं पाते। राह पर पत्ता भी खड़क जाता है तुम उठकर बिस्तर पर बैठ जाते हो, बिजली जला लेते, दरवाजा खोलते, शायद जिसकी प्रतीक्षा थी आ गया। जब तुम प्रतीक्षा में रत होते हो तो कोई दूसरा गुजरता है तो तुम बाहर दौड़कर पहुँच जाते हो कि शायद...!

जीसस ने बार-बार अपने शिष्यों से कहा है-चौबीस घंटे राह देखना, क्योंकि कब प्रभु आएगा, वह कौन-सी घड़ी चुनेगा, कुछ हमें पता नहीं। वह किस क्षण पर तुम्हारे द्वार पर आकर खड़ा हो जाएगा, किस रूप में, कुछ हमें पता नहीं। आता है जरूर, आता ही रहा है। जब तुम प्रतीक्षा नहीं कर रहे हो, तब भी आता है। और जब तुम गहरी नींद में सोते हो और घुर्राते हो, तब भी द्वार पर दस्तक देता है। जब तुम सपनों में दबे पड़े रहते हो, तब भी तुम्हारे पास आकर खड़ा होता है। जब. तुम आंख बंद किये रहते, तब भी उसकी रोशनी तुम्हारी बंद पलकों पर गिरती रहती। जब तुम्हारी आँखों में कोई आँसू और कोई प्रार्थना नहीं है, तब भी वह निकट खड़ा है। उसके बिना तुम जिओगे कैसे? एक क्षण न जी सकोगे। तुम उसे याद करो या न करो, वह तुम्हें याद कर ही रहा है। एक क्षण को भी उसकी याद तुम्हारे संबंध में टूट जाए, कि तुम्हारी श्वांस टूट जाएगी। तुम्हारी श्वाँस उसकी याद की खबर है कि उसने अभी तुम्हें भुला नहीं दिया है।

तुम थोड़े ही श्वाँस ले रहे हो, वह तुम्हारे भीतर श्वाँस ले रहा है। तुम्हारे हाथ में थोड़े ही है श्वाँस लेना। जिस दिन श्वाँस बंद हो जाएगी, उस दिन तुम ले सकोगे? जिस दिन वह नहीं लेगा, उस दिन तुम न ले सकोगे। वही तुम्हारे भीतर श्वाँस फूक रहा है, वही तुम्हारे हृदय की धुक-धुक है। वही तुम्हारे शरीर में खून का दौड़ता है। वही तुम्हारा होश है, तुम्हारा चैतन्य है। आया ही हुआ है, मगर तुम बेहोश पड़े हो।

 ज्ञान की भाँति नहीं है भक्ति, कि क्रिया से पा ली, अनुष्ठान से पा ली, कुछ कृत्य कर लिया और पा लिया--सीख लिया, अभ्यास कर लिया। नहीं, आदमी के हाथ के बाहर है। यही तो भक्ति का अपूर्व रूप है। भक्ति पर आदमी के हाथ की कालिख नहीं है। भक्ति पर आदमी का हस्ताक्षर नहीं होता। भक्ति आदमी का कृत्य नहीं है। भक्ति उतरती पार से। आकाशलोक से आती लोक में। समयातीत से, स्थित से उतरती समय में। जैसे दूर से सूरज की किरण आती, ऐसी भक्ति आती है, भक्ति परमात्मा की किरण है। भगवान का आशीष है। तुम्हारा कृत्य नहीं, तुम्हारे कृत्य का फल नहीं। सिर्फ तुम्हारी ग्राहकता चाहिए। तुम तैयार होओ उसे अंगीकार करने को।

इसलिए भक्त को स्त्रैण हो जाना होता है, आक्रामक नहीं; खोज में नहीं, प्रार्थना में। यहूदी भक्तों ने- ठीक बात कही है कि कभी कोई आदमी भगवान को थोड़े ही खोज पाता है, जब आदमी तैयार होता है, भगवान आदमी को खोजता है। यह बात प्रीतिकर है। यह बात बड़ी अर्थपूर्ण है। भगवान आदमी को खोजता है। मगर तुम पात्रता अर्जित करो; वह तुम्हें खोजे, इस योग्य अपने को निखारों, उसका अमत तुम्हारे पात्र में गिरेगा, तुम पात्र को शुद्ध तो कर लो, तुम इसे विष से मुक्त तो कर लो।  वह ज्ञान की भाँति अनुष्ठानकर्ता के आधीन नहीं है। इस छोटे-से वचन मे सारा रसायन भरा है भक्ति का।

'अत एव फलानन्त्यम्।

इस कारण भक्ति का फल आनंत्य है। '

जो तुम्हारे कृत्य से पैदा होगा, उसकी सीमा होगी, उसका अंत आ जाएगा। तुमने एक पत्थर फेंका आकाश में, थोड़ी दूर जाएगा--सौ फीट, दो सौ फीट, तीन सौ फीट, फिर गिरेगा। तुमने जितनी ऊर्जा उस पत्थर में रखी थी, उतनी दूर तक चला जाएगा। फिर गिरेगा, ऊर्जा खतम हो गयी। अनत तक नहीं चलता जा सकता। तुमने एक दीया जलाया, तेल भरा, जितनी देर तक तेल है उतनी देर तक जलेगा, तेल चुक जाएगा, दीया बुझ जाएगा। आदमी जो भी करेगा, उसकी सीमा होगी। इसलिए तुम जो कुछ अपने से पैदा कर लोगे वह एक दिन मरेगा। तुम जो बनाओगे, वह मिटेगा। तुम्हारा बनाया हुआ शाश्वत नहीं हो सकता।

इसलिए शांडिल्य कहते हैं--अत एव फलानन्त्यम्। इस कारण भक्ति का फल अनंत काल तक चलनेवाला है। क्योंकि तुम्हारी उस पर छाप ही नहीं है। उसमें परमात्मा का तेल है, तुम्हारा तैल नहीं। उसके पीछे अनंत का हाथ है, तो अनंत तक चलेगा। तुम्हारा  हाथ होता, तो उसकी सीमा होती।

हमारी सीमा है। हम जो कहें, हम जो करें, उस सब की सीमा है। हम कितने ही मजबूत किले बनाएँ, वे भी धूल-धूसरित हो जाएँगे। चले जाएंगे हजारों साल तक, लेकिन क्या मूल्य है हजारों साल का इस अनंत में! क्षण भर भी तो नहीं। लेकिन जिस चीज के पीछे परमात्मा है, उसका फिर कोई अंत नहीं है।

शांडिल्य यह कह रहे हैं--जान की सीमा है, भक्ति की सीमा नहीं। भक्ति असीम है। सीमित को क्या खोजते हो? खोज में ..ही लगे हो तो असीम को खोजो। सीमित को क्या इकट्ठा करना  जौ चुक जाएगा, उस दीये पर क्या भरोसा! जो न चुके, जो कुछ ऐसा हों बिन बाती बिन तेल---जिसकी रोशनी सदा रहे।ख्याल लेना। कुछ ऐसा खोजो जो  तुम्हारे द्वारा निमित न हो।  

' तद्वत प्रपत्तिशब्दाच्च नज्ञानमितरप्रपत्तिवत्।

ज्ञानीगण भी शरणागति होते हैं, और ज्ञानहीन को भी भक्ति की प्राप्ति हो जाती है। '

शांडिल्य कहते हैं--और इस चिंता में भी मत पड़ना कि ज्ञानी को ही भक्ति की उपलब्धि होती है। ज्ञान से कुछ लेना-देना नहीं है। अज्ञानी को भी उपलब्धि हो जाती है, ज्ञानी को भी उपलब्धि हो जाती है, पुकार चाहिए। अज्ञानी भी पुकार सकता है। अज्ञानी भी रो तो सकता है न, हृदय भर के! सच तो यह है कि अज्ञानी ही, रो सकता है। ज्ञानी को तो थोड़ी अकड़ रहती है तो रो नहीं सकता। ज्ञानी को तो थोड़ा खयाल रहता है कि मैं जानता हैं।

जितना खयाल होता है 'कि मैं जानता हूँ, उतने ही आँसू रुक जाते हैं। ज्ञानी प्रार्थना नहीं कर सकता। ज्ञान ही बाधा बन जाता है। ज्ञानी झुक नहीं सकता। मैं जानता हूँ, यह अकड़ अहकार को मजबूत करती है। शांडिल्य कहते हैं--इस फिकिर में मत पड़ना कि तुम अज्ञानी हो तो कैसे भगवान तुम्हारे पास आएगा? भगवान ने शर्त नहीं रखी है कि ज्ञानियों के पास आऊँगा, कि जिनके पास विश्वविद्यालय का प्रमाणपत्र होगा, उनके पास आऊँगा। कोई शर्त नहीं, भगवान बेशर्त आता है। तुम स्वीकार करने को राजी होओ। सच तो यह है--अज्ञानी ज्यादा सरल होता है। ज्यादा निष्कपट होता है। गाँव के ग्रामीण इसीलिए ज्यादा सरल, ज्यादा निष्कपट, ज्यादा निर्दोष हैं। शहर का पढ़ा-लिखा. आदमी ज्यादा चालबाज है, ज्यादा चालाक है। अगर वह कभी-कभी भोला-भालापन भी दिखलाता है तो वह भी उसकी चाल होती है। उसके भोले- भाले पन में भी पूरा गणित होता है। और गाँव का ग्रामीण आदमी अगर कभी भोला-भाला भी नहीं मालूम होता, तो भी उसके भोले-भालेपन के कारण। कभी बिलकुल ही कठोर मालूम हो सकता है गाँव का ग्रामीण, मगर वह भी उसके भोले- भालेपन का ही हिस्सा है। वह बच्चों की भाँति है।

शांडिल्य कहते है--इस चिंता में पड़ना ही मत, ज्ञानीगण भी शरणागत होते और ज्ञानहीन को भी भक्ति की प्राप्ति हो सकती है। भक्ति का कोई लेना-देना नहीं है ज्ञानी या अज्ञानी से।

और इतना भी ख्याल रखना कि अंतत: ज्ञानी को भी शरणागत होना पड़ता है। जब शरणागत होना ही है, तो यह ज्ञान का बोझ इतने दिन तक और क्यों ढोना! यह गठरी क्यों सिर पर। ज्ञानी को भी अंतत: समर्पण करना होता है, संकल्पवान को भी अंतत समर्पण करना होता है। कितनी ही दूर तक तप तुम्हें ले जाए, ज्ञान तुम्हें ले जाए, एक अंतिम घड़ी आती है जब. तुम्हें तप भी छोड़ना पड़ता है, क्योंकि तप का ही सूक्ष्म अहंकार बाधा बनने लगता है। एक घड़ी आती है, तब तुम्हें निष्कपट भाव से झुक जाना पड़ता है और तुम्हें कहना पड़ता है--मैं कुछ भी नहीं जानता। मैं ही नहीं हूँ तो जानूँगा कैसे? मैं हूँ कौन जो जान सकूँगा, तेरा रहस्य अपरंपार है। वही है ज्ञानी वस्तुत जो एक दिन ज्ञान को भी छोड़ दे। क्योंकि ज्ञान को छोड़े बिना इस जगत के रहस्य से संबंध न हो पाएगा।

जानने को कहाँ संभव है? इतना अपरंपार है रहस्य! विस्मय इतना गहन है! यह ज्ञान तो ऐसे ही है जैसे कोई चम्मच लेकर और सागरों को खाली करने में लगा है। यह हमारा ज्ञान तो ऐसे ही है जैसे कि हमने मुट्ठी में सागर की थोड़ी-सी रेत भर ली, और सोचते हैं सारी रेत हाथ में आ गयी। थोड़े-से शंख-सीप बीन लिये हैं सागर के तट पर, वही हमारे शास्त्र है--शंख-सीप। अनंत शेष है। जितना जानो उतना ही पता चलता है कि कितना कम जानते हैं! जिस दिन आदमी वस्तुत जानता है, उस दिन एकदम अज्ञानी हो जाता है।

सुकरात ने यही कहा है कि जब मैं जवान था, तो सोचता था--सब मैं जानता हूँ। जब मैं प्रौढ़ हुआ, तब मुझे यह अकल आयी कि सब मैं नहीं जानता, थोड़ा-सा जानता हूँ, बहुत जानने को शेष है। और जब मैं बूढ़ा हुआ, तो मुझे यह अकल आयी कि जानता ही क्या हूँ! महा अज्ञानी हूँ'। मुझसे बड़ा अज्ञानी कौन! इतना ही जानता हूँ कि मुझसे बड़ा अज्ञानी कौन! और जिस दिन सुकरात ते यह कहा कि मुझसे बड़ा अज्ञानी कौन, उस दिन देल्फी के देवता ने घोषणा की कि सुकरात महाज्ञानी हो गया। जो लोग सुनने गये थे, उन्होंने लौट कर सुकरात को कहा कि देल्फी के देवता ने घोषणा की है मंदिर में कि सुकरात महाज्ञानी हो गया है। सुकरात ने कहा--यह भी हद्द हो गयी! जिंदगी भर मैं चाहता था कि देल्फी का देवता घोषणा करे कि सुकरात महाज्ञानी है, तब तो की नहीं, और अब जब मुझे. पता चल गया कि मैं कुछ भी नहीं जानता, तब यह घोषणा! तब सुकरात को लगा कि शायद इसलिए यह घोषणा की गयी है, क्योंकि अब मैं जानता हूँ कि मैं कुछ भी नहीं जानता। यह ज्ञानी का लक्षण है।

ज्ञानीगण भी शरणागत होते और ज्ञानहीन को भी भक्ति की प्राप्ति हो सकती है ।

' सा मुख्येतरापेक्षितत्वात्।

वह भक्ति ही मुख्य है, क्योंकि और-और साधनों में इसकी सहायता लेनी पड़ती है। शास्त्रों में एक वचन है, कहते हैं नारद ने विष्णु से पूछा--प्रभु, आप तो सर्वव्यापक  है, पर फिर भी विशेष कर के कहीं रहते होंगे। विशेष कर के कहाँ रहते हैं, किस जगह रहते हैं? विष्णु ने कहा--' नाहं तिष्ठामि वैकुंठे योगिनां हृदयेपि च, मद्भक्ता: यत्न गायति तह तिष्ठागि नारद!' मैं जैसा भक्त के हृदय में प्रीति से रहता हूँ, आनंदमग्न होकर, जैसा रसलीन होकर भक्त के हृदय में रहता हूँ, वैसा मै योगियों के हृदय में नहीं रहता, और वैकुंठ में भी नहीं। मेरा वैकुंठ भक्त का हृदय है। मद्भक्ता यत्र गायति तल तिठठामि नारद। जहाँ मेरे भक्त आनंदित हैं, आह्लाद से भरे हैं; जहाँ मेरे भक्त नाचते और गाते, जहाँ मेरे भक्त लीन होते, वहाँ रहता हूँ। वहाँ विशेषकर रहता हूँ। ऐसा मै योगी के हृदय में भी नहीं रहता। क्यों? क्योंकि योगी के हृदय में थोड़ा योगी भी रहता है। भक्त के हृदय में कोई भी नहीं, सन्नाटा है, शून्य है। वहाँ रहने की खूब जगह है।

योगी के हृदय में तो भगवान को थोड़ी-सी जगह है--योगी खुद भी तो रहेगा न! योगी की अकड़ कि मैंने इतने साधन किये, इतने अनुष्ठान किये, इतने विधि- विधान किये, इतना योग, इतना आसन, प्राणायाम, व्यायाम, न-मालूम क्या-क्या कर रहा हूँ, यह सब भी तो वहाँ रहेगा में  यह गोरखधंधा भी तो वहाँ चलेगा न। और अकड़ ज्ञान की, और अकड़ साधना की, यह अहंकार भी तो जगह रोकेगा न! एकाध कोने में कहीं भगवान को भी जगह देता होगा योगी, लेकिन ज्यादा जगह तो खुद ही घेर लेता है। उस सिंहासन पर भगवान को बैठने की जगह कहाँ है।

लेकिन भक्त के हृदय में? न कोई साधन है भक्ति में, न कोई विधि है भक्ति में', न कोई ज्ञान है भक्ति में, तो अकड़ पैदा होने का उपाय नहीं भक्ति में। भक्त तो विसर्जित हो गया। भक्त तो बचा नहीं। भक्त का हृदय तो कोरा आकाश है। वहाँ भगवान रहें, पूरी तरह से रहें। असल में उस कोरेपन का नाम ही भगवत्ता है। भगवान कुछ अलग नहीं है उस कोरेपन से। वह कोरापन ही भगवत्ता है। तुम्हारे हृदय में जितनी खाली जगह है, उतना ही भगवान का वास है। खाली जगह भगवान है। जो भरी जगह है, वह तुम हो। भरी जगह ससार है, खाली जगह भगवान है। जब तुम्हारा हृदय परिपूर्ण खाली है, इतना खाली कि यह भी कहने को कोई नहीं है कि मैं हूँ, मैं का भाव गया, उसी क्षण--मद्भक्ता यत्र गायंति तत्र तिष्ठामि नारद।

वह भक्ति मुख्य है, शांडिल्य कहते हैं, क्योंकि और साधनों में इसकी सहायता लेनी पड़ती है। ज्ञानी को भी एक दिन अंतत: भक्ति की सहायता लेनी पड़ती है। क्योंकि तुम्हारे प्रयास से जो मिल सकता है, वही मिल सकता है। जो नहीं मिल सकता, नहीं मिल सकता। जो प्रयास की सीमा के बाहर है, वह प्रयास से नहीं मिलेगा। लाख उपाय करो, नहीं मिलेगा। लेकिन एक दिन जब थक जाओगे उपाय कर-कर के, टूट जाओगे उपाय कर-करके, गिर पड़ोगे उपाय कर-करके, तब तुम्हें यह बोध आएगा--कि हे प्रभु, अब तू सँभाल! मैं जो कर सकता था, कर लिया : मुझसे जो हो सकता था, हो गया। अब तू सँभाल! अब मेरे बस के बाहर है, इससे आगे मै नहीं जा सकता। अब तू मेरा हाथ थाम ले।

जिस दिन ज्ञानी, योगी, तपस्वी इस घड़ी में आता है--और यह घड़ी आती ही है, क्योंकि आदमी की बिसात कितनी! थोड़ी-सी। दस पाँच कदम चल ले सकता है, लेकिन फिर? अनंत की यात्रा पर आदमी चुक जाएगा। जहाँ आदमी चुक जाता है, वहीं समर्पण।

तो शांडिल्य कहते हैं--जब समर्पण ही करना है, तो पहले कदम पर ही क्यों नहीं? जब अंतिम कदम पर गिर ही जाना होगा, तो भक्त कहता है हम पहले कदम पर ही गिरे जाते हैं, इतनी झंझट और क्यों लेनी! प्रयास करें ही क्यों, अगर प्रसाद से होता है? अगर झोली फैलाने से मिलता है भगवान, तो हम और अनुष्ठान आयोजन करें ही क्यों? झोली फैला देंगे।

तुम कहोगे, अगर इतना सरल है तो फिर सभी लोग झोली क्‍यों नहीं फैलाते? झोली फैलाना बहुत कठिन है। अहंकार कहता है--झोली, और तुम? फैलाने दो दूसरो को, मैं सिद्ध करके रहूँगा, मैं पाकर रहूँगा, मैं अपने से ही पाकर रहूँगा। अहंकार की यही तो भावदशा है। झोली नहीं फैला सकता। समर्पण नहीं कर सकता। मै और भीख माँगूँ--भगवान से ही सही, मगर में और भीख माँगू! हम भगवान को भी विजय करने चले है। अहंकार सब जगह विजय की भाषा में सोचता है।

ज्ञानी भी एक दिन ज्ञान से थक जाता है। थक कर ज्ञान को छोड़ देता है और अज्ञानी हो जाता है। और संकल्प भी एक दिन संकल्प से थक जाता है और समर्पण हो जाता है। कर्म भी एक दिन ऊब जाता कर्म से, थक कर बैठ जाता है, और वहीं, वहीं असली क्रांति घटती है।

बुद्ध ने छ: वर्षों तक कठोर तपश्चर्या की कठोर, जितनी आदमी कर सकता है! क्षत्रिय थे, जिद्दी थे, हठी थे, सम्राट थे, अहंकारी थे, सब दाँव पर लगा दिया छ वर्षों में। लेकिन आदमी जहाँ तक प्रयास से जा सकता है, उससे आगे नहीं जा सके। सीमा आ गयी। एक दिन सीमा आ गयी। और चूँकि पूरी ताकत लगायी थी इसलिए छ. साल मे आ गयी, अगर ऐसे ही धीरे-धीरे लगायी होती तो शायद छ: जन्मों में नहीं आती। ओर भी पूरी लगायी होती तो शायद छ: महीने में आ जाती। अगर कोई समग्र-रूपेण शक्ति लगा दे तो एक क्षण में भी आ जाती है सीमा। कितनी त्वरा से तुम जाते हो, उतनी ही जल्दी सीमा आ जाती है। धीरे-धीरे जाओ तो देर लगती है आने में। 

सीमा छ: वर्षों में आ गयी, बुद्ध थक कर गिर पड़े। और जिस रात थक कर गिर पड़े और सो गये बोधिवृक्ष के नीचे--साम्राज्य पहले छोड़ दिया था, उस दिन साधना भी छोड़ दी; उस दिन साधना को छोड्कर सो रहे कि अब नहीं होता, अब अपने बस के बाहर है, बात खतम हो गयी उसी रात घट गयी। सुबह आंखें खुलीं और वह जो आदमी खोजने निकला था, था ही नहीं अब भीतर, अब तो वह आदमी था जिसको मिल चुका। सुबह का आखिरी तारा डूबता था और बुद्ध ने उस आखिरी तारे को आकाश में डूबते देखा उसी के साथ उनका भी आखिरी अहंकार डूब गया। उसी क्षण क्रांति घट गयी, उसी क्षण रूपांतरण हो गया।

यही शांडिल्य कह रहे हैं। जिस दिन थक कर गिर जाओगे, जिस दिन थक कर रुकारोगे, जिस दिन छोटे बच्चे की तरह पूकारोगे, उस दिन वह आना है।

चार तिनके उठा के जंगल से

एक बाली अनाज की लेकर

चंद कतरे-से बासी अश्कों के

चंद फाके बुझे हुए लब पर

मुट्ठी भर अपनी कब्र की मिट्टी

मुट्ठी भर आरजूओं का गारा

एक तामीर की लिये हसरत

तेरा खानाबदोश बेचारा

शहर में दर-ब-दर भटकता है

तेरा कंधा मिले तो सर टेकूँ

हर एक ऐसे ही भटक रहा है,

तेरा कंधा मिले तो सर टेकूँ

और कंधा पास है। मगर सर तुम्हारा अकड़ा हुआ है। तुम जब चाहो टेकना, तब टेक लो। परमात्मा तकिया बनने को प्रतिक्षण मौजूद है। मगर तुम पहले अपने से थको और हारों। हारे को हरिनाम।

ओशो रजनीश के प्रवचनों पर आधारित

हरिओम सिंगल 


 

सोमवार, 21 अगस्त 2023

भारत देश ने नमस्‍कार का एक अद्भुत ढंग निकाला।‍

दुनिया मैं वैसा कहीं भी नहीं है।

इसे देश ने कुछ दान दिया है मनुष्‍य की चेतना को, अपूर्व।

यह देश अकेला है जब दो व्‍यक्ति नमस्‍कार करते है,

तो दो काम करते है।

एक तो दोनों हाथ जोड़ते है।

दो हाथ जोड़ने का मतलब होता है: दो नहीं एक।

दो हाथ दुई के प्रतीक है, द्वैत के प्रतीक है।

उन दोनों को हाथ जोड़ने का मतलब होता है, दो नहीं एक है।

उस एक का ही स्‍मरण दिलाने के लिए।

दोनों हाथों को जोड़ कर नमस्‍कार करते है।

और, दोनों को जोड़ कर जो शब्‍द उपयोग करते है।

वह परमात्‍मा का स्‍मरण होता है।

कहते है: राम-राम, जयराम, या कुछ भी,

लेकिन वह परमात्‍मा का नाम होता है।

दो को जोड़ा कि परमात्‍मा का नाम उठा।

दुई गई कि परमात्‍मा आया।

दो हाथ जुड़े और एक हुए कि फिर बचा क्‍या: हे राम।

 एक आदमी की पत्नी मर गई! जब उसे श्मशान

ले जाया जा रहा था, तो पूरे रास्ते बेचारा पति रो

रहा था !

“मुझे अकेला छोड़कर कहा चली गई अब कौन है।

मेरा इस दुनिया में??

पास खड़ी लड़की ने सहेली से कहा- ये अपनी

पत्नी से कितना प्यार करता है। काश इसका पता

मेरे पास होता तो मैं इससे शादी कर लेती!!

रोते हुए पति ने उस लड़की की बात सुन ली!! वह

और भी ज्यादा ऊंची आवाज़ में रोते हुए बोला

“राजू गुप्ता को गली नंबर 4, मकान नंबर 12 में

अकेले छोड़कर कहा चली गई तुम!!”

😭😭😬😝😝😂😂🤣🤣


फनी गुप्ताजी और भाभी जोक्स

गुप्ता जी गुमसुम बैठे थे…

पूछा क्या हुआ.? तो बोले…

भाई अब क्या बताऊँ, आपकी भाभी ने नाक

कटवा दी

मैंने पूछा: वो केसे?

गुप्ता जी: हम दोनों टॉयलेट फिल्म देखने

गए थे, ट्रेफिक के कारण फिल्म में कुछ

देर से पहुंचे

मेंने पूछा: इसमें क्या नाक कटवा दी ?

वो बोले: तेरी भाभी सारे मोहल्ले में कहती

फिर रही है कि…”में और पतिदेव टॉयलेट

गये थे, लेट हो गय तो थोड़ी सी निकल गई”

अब में किस-किस को समझाऊं

😝😝😝😝😝

दो दोस्त सफ़र पर जा रहे थे,

रात हो गयी वो टेंट लगा कर सो गए..

रात को एक दोस्त की नींद खुली,

उसने दुसरे को जगा कर कहा,

आसमान की तरफ तुझे क्या

नज़र आता है?

दूसरा : बहुत सारे सितारे..

पहला : इससे क्या पता चलता है?

दूसरा : आसमान कितना खुबसूरत है …

पहला : अबे न्यूटन की औलाद,

टेंट चोरी हो गया है.!!!

😂😂😂😂😂😂

शक्की पत्नी का शक दूर करने के लिए, पति ने दाढ़ी रख ली,

पूजा,पाठ करने लगा और गीता ,रामायण भी पढने लगा!

गरीबों की मदद करने लगा, सारे गलत काम छोड़ दिये

और प्रभु की भक्ति में लग गया!

अब पत्नी फ़ोन पर, अपने पति

के बारे में, सहेली को बता रही थी:-

कमीना अब स्वर्ग की अप्सराओं के चक्कर में है ‘

😝😝😝🤣🤣🤣

एक आदमी के फ़ोन पर अनजान नंबर

से कॉल आया।

लड़की – क्या आप शादीशुदा हैं?

आदमी – नहीं, पर आप कौन हो ।

लड़की – तुम्हारी बीवी, आज घर आना फिर बताउंगी।

थोड़ी देर बाद फिर अनजान नंबर

से कॉल आया ।

लड़की – क्या आप शादीशुदा हो ?

आदमी – हाँ, पर आप कौन ?

लड़की – तुम्हारी गर्लफ्रेंड, धोकेबाज़ ।

आदमी – सॉरी यार, मुझे लगा मेरी बीवी है।

लड़की – बीवी ही हूँ कुत्ते, आज तो बस

तू घर आजा ।

😝😝😝🤣🤣🤣🤣🤣🤣

जज- तुम्हे तलाक़ क्यों चाहिए ?

पति: जज साहब, मेरी wife मुझ से

लहसन छिलवाती है, प्याज़ कटवाती है,

बर्तन मँजवाती है।

जज: इसमें दिक्कत क्या है ?लहसुन को

थोड़ा गर्म कर लिया करो आसानी से छीले

जायेगें ! प्याज को काटने से पहले फ्रिज में

रखा दिया करो, काटने के समय आँखें नहीं जलेगी !

बर्तन मांजने से 10 मिनिट पहले भरे टब में

डाल दिया करो आसानी से साफ़ हो जायेगें !

पति – समझ गया हजूर ! अर्जी वापिस ही दे दो मेरी

जज: क्या समझे ? ..

पति- यही की, आपकी हालत

मुझसे भी ज्यादा खराब है !!

😂😂🤣🤣🤣

एक लड़की का फोन टायलेट मे गिर गया.

…..

TOILET से “जिन्न्न” प्रकट हुआ..

…..

“जिन्न ” ने लड़की को गोल्ड का

फोन दिया और कहा ये लो तुम्हारा फोन…


लड़की ने ‘कुल्हाडी’ वाली कहानी सुन रखी थी . इसलिए

ईमानदारी का परिचय देते हुए कहा ये सोने का

फोन मेरा नहीं है.

जिन्न:- पगली रुलाएगी क्या ?

धो के देख तेरा ही है।

🤣🤣🤣🤣🤣🤣

पति पत्नि फनी व्हाट्सएप जोक्स

एक बार शराबी रात में शराब पी कर

घर आया आर सोते सोते भगवान को

प्यारा हो गया।

ऊपर जाके उसने दुबारा जिंदगी मांगी तो

मुर्गी के रूप में

भगवान राजी हुए और उसे

वापस भेजा.. जैसे ही वो मुर्गी बन के वापस आया

शराबी ने एक अंडा दीया, और अंडे को देखते ही

उसके होश उड़ गये…

क्योंकि उसका अंडा सोने का था।

खुशी मे उसने जोर लगा के एक और अंडा दीया,

देखा तो वो भी सोने का था।

अब तो खुशी से शराबी ने जैसे ही तीसरे अंडा देने के

लिए जोर लगाया…

वैसे ही उसके सर पे किसी ने

झाडू मारी.. अब पप्पू ने आंखे खोली तो देखा

की उसकी पत्नी उसे झाडू से मारते हुए

चिल्ला रही थी – “उठ जा बेवडे

बिस्तर पर टट्टी पे टट्टी किये जा रहा है

😝😝😝😝😝😝😝😝😝

दामाद ससुर फनी व्हाट्सएप जोक्स

ससुर: मेरी बेटी का ख्याल

रखना, इसकी

आँखों में आंसू ना आने पाये😊

Krishan:- ठीक है प्याज

मैं काट दूंगा पर

बर्तन इसे ही धोने होंगे

😝😝😝😝😝

पति पत्नी से

प्रिये, मैं तुमसे बहुत प्यार करता हूँ।

पत्नी- तो क्या मैं आपको नहीं करती?

मैं तो आपके लिए सारी दुनिया से लड़ सकती हूं।

पति- लेकिन तुम तो दिन-रात मुझसे ही

लड़ती रहती हो?

पत्नी- जानू, आप ही तो मेरी दुनिया हो!

😝😝🤣🤣🤣

पति पत्नि व्हाट्सएप जोक्स

पति : मुझे अपनी बीवी से तलाक

चाहिए वह बर्तन फेंक कर मारती है।

जज: अभी भी मार रही है या पहले से

पति: 5 साल पहले से

जज: तो ईतने साल बाद तलाक क्यों

पति: क्योंकि अब उसका निशाना

पक्का हो गया है।

😝😝😝😝😝😝

पप्पू जंगल में जा रहा था तभी एक सांप ने पैर पर काट लिया।

पप्पू को गुस्सा आया और टांग आगे करके बॉला .-

ले काट ले जितना काटना है काट ले।

सांप ने फिर तीन-चार बार काटा और

थक कर बोला .- अबे तू इंसान है या

भूत?

पप्पू .- मैं तो इंसान ही हूं लेकिन साले

मेरा यहां पैर नकली है।

😝😝😝🤣🤣🤣

व्हाट्सएप फनी जोक्स फॉर पति पत्नि

पत्नी ने मायके से पति को फोन किया – “कैसे हो ?”

पति – “ठीक हूँ…”

पत्नी – “मेरी याद आती है तब क्या करते हो ?”

पति – “तुम्हारी पसंदीदा आइसक्रीम ‘केसर पिस्ता’ खा

लेता हू या ‘अमूल नट्स’ खा लेता हूँ.. और मेरी याद आने

पर तुम क्या करती हो ?”

पत्नी – “मै भी ‘रॉयल स्टैग ‘ का

क्वाटर और तीन सिगरेट

पीकर एक रजनीगंधा खा लेती हूँ।

पति बेहोश ।

😝😝🤣🤣🤣🤣🤣

फनी देशी व्हाट्सएप जोक्स इन हिंदी

एक बार एक विदेशी कुत्ता भारत आ गया…

देशी कुत्तो ने पूछा, भाई आपके वहाँ कोई कमी

है जो आप यहाँ आ गये ?

उसने कहा, मेरे वहाँ का रहन सहन,

वातावरण, खान पान, जीवन स्तर सब कुछ

यहाँ से ज्यादा अच्छा है।

लेकिन भौकने की जैसी

आजादी भारत में है ऐसी

संसार में कहीं नही है।

😝😝😂😂😂😂

मैं: हैलो, पिज़्ज़ा हट?

वह: Yes sir, how can I help you?

मैं: 3 बड़े और 1 छोटा पिज्ज़ा भेज दो।

वहः किसके नाम पर?

मैं: भगवान के नाम पर

😝😝😂😂😂😂

टीचर: तुमने कभी कोई

नेक काम किया है?

Pappu-हाँ सर..

एक बुजुर्ग धीरे धीरे

अपने घर जा रहे थे..

मैंने कुत्ता पीछे लगा दिया

जल्दी पहुँच गया

😂😂🙄🙄😂😂

मच्छर ने आपको काटा … ये उसका जुनून था

वाह वाह वाह…

मच्छर ने आपको काटा… ये उसका जुनून था

फिर आपने वहाँ खुजाया … ये आपका

सुकून था

पर चाह कर भी आप उसे मार नहीं पाये

ग़ौर फ़रमाइये हुजूर …

चाह कर भी आप उसे मार नहीं पाये

क्योंकि उसकी रगों में आप ही का

खून था…!!!

ये कहलाता है खून का रिश्ता।

😂😂😂😂😂😂😂

एक बार संता और बंता रजाई में सो रहे थे।

संता बोला – यार बंता पाद मार और

रज़ाई गरम कर दें.

बंता ने रज़ाई में Potty कर दी और

बोला- ले आग ही लगा दी.

😝😝😝🤣🤣🤣🤣

सांता – शर्ट के लिए एक अच्छा कपडा

दिखाइये..

सेल्स मन – प्लेन में दिखाऊ?

सांता – नहीं हेलिकॉप्टर में दिखा..

साले बंदर की औलाद… यहीं

पे दिखा !!

😝😝😝🤣🤣🤣🤣

पत्नी :- कहाँ पर हो??

पति:- स्कूटर से गिर गया हूँ।

एक्सीडेंट हो गया है। हॉस्पिटल जा

रहा हूँ !!

पत्नी :- ध्यान रखना, टिफ़िन टेड़ा

ना हो जाये, वरना दाल गिर जायेगी

🥱🙁😕😝🤣🤣

1 छोटे बच्चे ने कभी अपना पिछवाडा नही देखा…

1 दिन मेडम ने उसके पिछवाड़े पे खूब मारा..

बच्चा घर के

आइने में पिछवाड़े देखते हुए बोला

अले बाप ले – दो तुकले कर दिए..

👶👶😂😂😂😂

एक बुड्डा आया,

साथ में एक बुढ़िया लाया…

होटेल में जाकर वेटर को बुलाया,

दोनों ने अपना-अपना ऑर्डर मंगवाया,

पहले बुड्ढे ने खाया, बुढ़िया ने बिल

चुकाया, फिर बुढ़िया ने खाया,

बुड्ढे ने बिल चुकाया,

ये देखकर वेटर का सिर चकराया,

वह उनके पास आया और बोला,

‘जब तुम दोनों में इतना प्यार है तो

खाना एक साथ क्यों नही खाया?’

इस पर बुड्ढ़े ने फरमाया,

‘जानी तेरा सवाल तो नेक है।

पर हमारे पास दांतों का सेट सिर्फ एक है।’

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

लड़की 🙋🏻‍♀️ देखने का कार्यक्रम तय हुआ।

लड़के वाले बहुत सीधे लोग थे।

लड़का🧒 — आपकी शिक्षा ?

लड़की🙋🏻‍♀️ — MF. L.A.S.

लड़के ने आगे डिग्री की detail यह सोचकर नहीं

पूछी कि, कहीं लड़की उसे अशिक्षित ना समझे !!

बाद में वे लोग चले आये। और शादी भी हो गई।

शादी के बाद लड़के ने लड़की से पूछा कि ये

ME IAS , क्या होता है🙁

उसने बताया ….

Matric Fail In All Subjects

लड़का 4 दिन से बेहोश है।

😝🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

शराबी: गरम क्या है?

वेटर . चाउमीन.

शराबी: और गरम?

वेटरः सूप.

शराबी:और गरम?

वेटरः उबलता पानी.

शराबी:और गरम?

वेटरः आग का गोला है साले.

शराबीः लेकर आओ,बीडी जलानी है ।

🤣🤣🤣🤣🤣

पिता :- अपनी बेटी से बेटी,

पहले तुम मुझे पापा बुलाती थी,

अब डैड क्यों कहने लगी हो…?

बेटी – वो पापा बोलने से मेरी लिपस्टिक

खराब हो जाती है ना…!!!

😂😂😂😂😂

अगर आप English पढ़ना जानते

हो तो इसे फटाफट पढ़ के दिखाओ

Мy

А Мy

They My

A My They My

They They My

A My

They They A My

A My They They My,


माफ़ करो छुट्टा नहीं है दूसरे ग्रुप

में जाओ।😝😝

मजा आया भीख मांगने मे

नया भिखारी ढूढने के लिए जल्दी

किसी और को फॉरवर्ड कर दो

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

ये होता है प्यार

पत्नी:- कहां जा रहे हो?

पति:- मरने

पत्नी:- कहीं भी जाओ लेकिन

स्वेटर पहनकर जाना। बाहर बहुत ठंड है,

बीमार हुए तो तुम्हारी खैर नही।

😝😝😝🤣🤣

पति-पत्नि में झगड़ा हो रहा था।

पत्नि: मैं पूरा घर संभालती हूँ.. किचन संभालती

हूँ.. बच्चों को संभालती हूँ.. तुम क्या करते हो ?

पति: मैं खुद को संभालता हूँ.

तुम्हारी नशीली आँखें देखकर..

बीवी: आप भी ना ….चलो

बताओ आज क्या बनाऊँ

आपकी पसंद का

😂😂😂🤣🤣🤣🤣



पत्नी : देखो ना, हमारे पड़ोसी ने 50 inch का LED

TV ख़रीदा हैं…

आप भी खरीद कर लाइये ना..??

पति : अरे डार्लिंग.. जिसके पास तुम्हारे जैसी खूबसूरत

बीवी हो..

वो क्यूँ फ़ालतू का वक़्त TV देखने में Waste करेगा.?

पत्नी : ओह.. आप भी ना..

अभी आपके लिए पकोड़े

बनाकर लाती हूँ.?

😁😁😁😂😂😂😂


सड़क पर एक लड़की चक्कर खा कर गिर पड़ी

एक ताऊ चिल्ला कर बोला

“कोई निम्बू सोडा लाओ रे”

एक लड़का भाग कर बीस रुपये खर्च कर नींबू

सोडा ले आया और उसके आते ही ताऊ ने नींबू

सोडा लेकर खुद पी गया और बोला-

‘ मुझसे ऐसे हादसे देखे नही जाते”

😝😝😝🤣🤣🤣

डॉक्टर – मोटापे का एक ही इलाज है।

चिंटू – क्या डॉक्टर…?

डॉक्टर – तुम रोज एक रोटी खाओ।

चिंटू – ये एक रोटी खाने के बाद खानी

है या खाने से पहले…?

डॉक्टर साहब बेहोश….!!

🤣🤣🤣🤣🤣🤣

बॉयफ्रेंड🧒: व्हाट्सएप अपडेट कर लो।

गर्लफ्रेंड🙋🏻‍♀️: कैसे करते हैं?

बॉयफ्रेंड🧒: प्ले स्टोर पर जाओ और

वहां से कर लो।

गर्लफ्रेंड🤷🏻‍♀️: हमारे गांव में प्ले स्टोर नहीं

है, जनरल स्टोर है, वहां से कर लू।

😝😝🤣🤣🤣🤣

टीटी ने पप्पू को प्लेटफॉर्म पे पकड़ लिया,

टीटी – टिकट दिखा,

पप्पू – अरे मैं ट्रेन में आया ही नहीं,

टीटी- क्या सबूत है?

पप्पू – अब सबूत यही है कि

मेरे पास टिकट नहीं है?

😂😂😂😂

टीचर :- टेंस कितने प्रकार के होते हैं।

गोपू:- 3 प्रकार के

Past, Present, Future

टीचर :- बहुत अच्छा, उदाहरण दो

गोपू:- कल आपकी बेटी को देखा था,

आज प्यार करता हूँ,

कल भगा के ले जाऊंगा।

टीचर बेहोश

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

“एक चिड़ियाघर में एक तोते के पिंजड़े के बाहर

लिखा था

इंग्लिश, हिंदी और भोजपुरी बोलने वाला तोता”.

एक आदमी ने इस बात को टेस्ट करने के लिए

तोते से पहले इंग्लिश में पूछा — हू आर यू?

तोता — आई ऍम पैरेट।

आदमी (हिंदी में) — तुम कौन हो?,…

तोता — मैं एक तोता हूँ।

आदमी (इस बार भोजपुरी में)– तु के हव ?,

तोता — तहार बाप सरऊ… एकई बतीया चार बेरी

पुछत हउवे सारे , पटक के लतिया देब….

😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣

तूफानी बारिश में आधी रात को

एक आदमी पिज्जा लेने गया।

पिज्जावाला : आप शादीशुदा हो?

आदमी : ऐसे तूफान में कौन-सी

मां अपने बेटे को पिज्जा लेने भेजेगी।

🤣🤣🤣🤣🤣

घर जाते हुए WhatsApp देख रहा था | पडोस के

घर में कब पहुँच गया पता ही नहीं चला |

और आश्चर्य ये है कि

उस घर की औरत ने चाय बनाकर दी

सीरियल में ध्यान होने के कारण उसे भी

नहीं पता चला…

हद तो तब हो गई जब….

मैं चाय पी रहा था कि उसका पति घर आया

और मुझे देखते ही बोला…

” Sorry गलत घर में आ गया” कहकर बाहर

निकल गया..!

वो बेचारा… Facebook में व्यस्त था!!

😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣

नये संस्कारः

यदि आपके घर कोई पधारें

तो उसे पानी पूछने से पहले कहिये

प्रणाम,

लाइये मैं आपका फोन चार्जिंग पर लगा देँ

कसम से दिल से दुआ देगा सामने वाला….

फिर मिठाई बिस्कुट पूछने से पहले पूछइए

क्या आप WI FI का पासवर्ड लेना चाहेंगे?

मेहमान खुशी से पगला जायेगा !

अतिथि देवो भवः.

😁😁😁😁😁😂😂


मेरे एक शुभचिंतक ने मुझे यह सुझाव

दिया कि wife से बहस से नहीं जीतो,

बल्कि अपनी मुस्कान से हराओ।

मैंने प्रयास किया…..

Wife बोली-बहुत ज्यादा हंसी आ

रही है तुमको ऑजकल??लगता है।

तुम्हारा भूत उतारना पड़ेगा 

____&&&

लड़का शादी के लिए लड़की देखने गया ..

उसने सोचा , क्यों न लड़की से

अंग्रेजी में बात करूँ

उसने लड़की से पूछा

इंग्लिस चलेगी ना …?

लड़की शरमाते हुए बोली – जी प्याज

और नमकीन साथ हो तो देशी भी चलेगी ..

😝😝😝😝😝😝😝

पेपर देते समय एक बच्चा गुमसुम सा था ..

Madam: तुम confused क्यों हो ?

बच्चा: चुप रहा

Madam: क्या तुम पैन भूल गए ?

बच्चा फिर चुप रहा

Madam: क्या रोल नं भूल गए?

बच्चा फिर चुपचाप रहा.

Madam: क्या कैल्कुलेटर भूल गये हो?

बच्चा : अरे चुप हो जा मेरी माँ !!

इधर मै पर्चियां गलत सब्जेक्ट की ले

आया और तुझे पेन पेंसिल की आग लगी है…

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

मास्टर जी – भारत की सबसे खतरनाक

नदी कौन सी है…?

राजू – भावना…!

मास्टर (चौंक कर) – वो कैसे..?

राजू – क्योंकि,

सब इसमें बह जाते हैं…!

😂😂😂😂

“”इसे पढ़ना मना हैं”

(खतरा)

जहाँ लिखा होता हैं, थूकना मना हैं.

लोग वहीं थूकते हैं।

जहाँ लिखा होता हैं, कचरा फेकना मना हैं.

लोग वहीं कचरा फेकते हैं।

जहाँ लिखा होता हैं, गाड़ी खड़ा करना मना हैं.

लोग वहीं गाड़ी खड़ा करते हैं।

जहाँ लिखा होता हैं, इस काम को नही करना हैं.

लोग उसी काम को जानबूझ के करते है।

अब आप अपने को ही देख लीजिए,

सबसे ऊपर लिखा हैं”इसे पढ़ना मना हैं”. लेकिन पढ़ेगें

जरूर….. ।।”

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

टीचर और संजू व्हाट्सएप जोक्स

स्कूल में एक दिन टीचर संजू से :-

तुम बड़े होकर क्या बनोगे?

🧒संजू :- मेम मै बड़ा होकर सी. ए

(CA) बनूँगा, सभी महानगरों मे मेरा

बिजनेस चलेगा, हमेशा हवाई यात्रा

करूंगा, हमेशा 5 स्टार होटल मे

ठहरूँगा, हमेशा 10 नौकर मेरे आसपास

रहेंगे, मेरे पास सबसे महंगी कार होगी,

मेरे पास सबसे महंगे…

👨‍🏫टीचर :- बस संजू बस!!

बच्चों आप सब को इतना लम्बा जवाब

देने की आवश्यकता नही है, सिर्फ एक

लाइन में जवाब देना…

अच्छा पिंकी तुम बताओ तुम बड़ी

होकर क्या बनोगी?

💃पिंकी :- संजू की पत्नी.

😝😝🤣🤣🤣🤣🤣🤣

अध्यापक – ताजमहल किसने बनाया?

संता – जी, कारीगर ने !

अध्यापक – मेरा मतलब, बनवाया किसने था ?

संता- जी, ठेकेदार ने

🤣🤣🤣🤣🤣

👩‍🏫टीचर:- एक तरफ अकल और

दूसरी तरफ पैसा हो तो तुम

क्या चुनोगे?

छोटू:- पैसा,

टीचर:- गलत मैं तो अकल चुनती।

छोटू:- सही कहा आपने टीचर

जिसके पास जिस चीज

कि कमी होगी वो वही चुनेगा।

😜😜🤣🤣

छोटू को 2 घंटे तक

मुर्गा बनना पड़ा।

😂😂😂😂😂😂😂

एक लड़की अपने ब्वॉयफ्रेंड को अपने घर

आने का रास्ता बता रही थी.!!

“देखो, बिल्डिंग के अंदर आकर बाईं तरफ़ लिफ़्ट है.!!

लिफ़्ट में आकर अपनी कोहनी से 9 नम्बर का बटन दबाना

जब नौवें फ़्लोर पर आ जाओ तो राइट हैंड पर

दूसरा फ़्लैट हमारा है।

यहाँ आकर अपनी कोहनी से घंटी का बटना

दबाना, मैं दरवाज़ा खोल दूंगी

ब्वॉयफ्रेंड: लेकिन स्वीटहार्ट ये सब बटन मैं

उंगली से दबाऊंगा तो ज़्यादा आसानी होगी🙄

लड़की: ओह माई गॉड!!!…

मतलब तुम खाली हाथ आ रहे हो?!!!!😨😨

😜😜😜😜😜😜😜

लड़का:- मां दिवाली आने वाली है.

इस बार पटाखे इस दुकान से लुंगा!

मां:-हरामजादे, ये पटाखों की दुकान नहीं

लड़कियों का हॉस्टल है।

लड़का:- मुझे क्या पता,,

एक दिन पापा कह रहे थे कि यहां एक एक

धांसु पटाखे है..

😂😂😂😂😂😂

पप्पु अपने ससुराल में गुरुजी का प्रवचन सुनने गया।

गुरुजी बोले, “जो-जो स्वर्ग जाना चाहता है, वह

अपना हाथ ऊपर करे”।

पप्पु की बीवी और सास ने हाथ ऊपर उठाया ।

गुरूजी ने पप्पु जी से पूछा, “क्या तुम स्वर्ग नहीं

जाना चाहते?”

पप्पु,” गुरुजी, यह दोनों चली जायेंगी तो यही पर

स्वर्ग हो जायेगा…”

गुरूजी अपने चेलों से बोले “ईस ज्ञानी पुरूष को

अपनी टीम में शामील करो ।

😝😝😝😝

अलग-अलग देशों में पति-पत्नी सोते समय एक दूसरे

को कैसे संबोधित करते हैं…?

देखिये

अमेरिका : गुड नाईट डार्लिंग

ब्रिटेन : स्वीट ड्रीम्स डार्लिंग

जापान : गुड नाईट माई लव

कनाडा : लव यू हनी, स्वीट ड्रीम्स

और…

*इंडिया😘

मेन गेट को तालो लगा दियो ?

सिलेंडर ऑफ कर दियो ?

दूध/दही फ्रिज में रख दियो ?

मोटर बंद कर दी कि नी ?

आंगन की लाइट ऑफ कर दी ?

तो चाल सौ जा फेर… सवेरे जल्दी उठनो है।

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

एक लड़की गोलगप्पे खा रही थी,

15-20 खा चुकी थी,

फिर बॉयफ्रेंड से पूछा- डार्लिंग, 10 और खा लूँ

लड़का गुस्से से- नागिन, खा ले,

लड़की ने जोरदार थप्पड़ मारा,- “नागिन

किसको बोला”??

लड़का- मार क्यूँ रही है?? मैने कहा- ना गिन,

खा ले..

😝😝😂😂😂😂🤣🤣

CA की पत्नी ने पुछा – क्यों जी, ये

महंगाई दर क्या होती है ?

CA – पहले तुम्हारी कमर 28 थी

और वजन था 45 किलो

अब तुम्हारी कमर है 38

और वजन है 75 किलो.

अब तुम्हारे पास सबकुछ पहले से

ज्यादा है फिर भी वैल्यू कम है।

यही मंहगाई दर है.

Moral – अर्थशास्त्र उतना

कठिन नहीं है यदि उदाहरण

देकर समझाया जाए.

😂😂😂😂😂😂

एक बच्चे ने सारे सवालों के जवाब दिए

फिर भी मौखिक परीक्षा में फेल हो गया…क्यों?

सवाल के जवाब कुछ इस तरह थे..

सवाल: – टीपू सुल्तान की मृत्यु किस युद्ध में हुई थी ?

जवाब: – उसके आखिरी युद्ध में.

सवाल: – तलाक का प्रमुख कारण क्या है।

जवाब:- शादी.

सवाल – गंगा किस स्टेट में बहती है ?

जवाब – लिक्विड स्टेट

सवाल:- महात्मा गांधी का जन्म कब हुआ था?

जवाब – उनके जन्मदिन के दिन.

सवाल – 6 लोगों के बीच 8 आम को तुम कैसे

बांटोगे ?

जवाब – मैंगो शेक बनाकर.

भारत में पूरे साल सबसे ज्यादा बर्फ कहां गिरती है ?

जवाब – दारू के ग्लास में…..

😝😆🤪🤣🤣🤣💯

बेटी – मैं पड़ोसी से प्यार करती हूँ

और उसके साथ भाग रही हूँ !

बाप – थैंक्स…. मेरे पैसे और समय

दोनों बच गए.

बेटी – मैं लैटर पढ़ रही हूँ….

जो, मम्मी रखकर गई हैं …..!

बाप बेहोश…

😝🤪😂😂🤣

रोगी : डॉक्टर साहब, आपने

सिर, बदन और जोड़ो में होने

वाला दर्द बिलकुल ठीक कर दिया

अब एक तकलीफ रह गयी है।

कि मुझे पसीना नहीं आता।

डॉक्टर : चिंता मत करें, मेरा

बिल देखकर आपकी यह

तकलीफ भी दूर हो जाएगी

😬😁😁😂😂😂😂😂😂

गर्लफ्रेंड: मेरा मोबाइल माँ के पास

रहता है।

बॉयफ्रेंड: अगर पकड़ी गई तो?

गर्लफ्रेंड: तुम्हारा नंबर, ‘बैटरी लो

नाम से रखा है। जब भी तुम्हारा फोन

आता है तो माँ कहती है,

‘लो चार्ज कर लो।”

बॉयफ्रेंड अभी भी कोमा में है!

😂😂😂😂🤣🤣🤣

ट्रेन में…

प्रेमिका – जानू, मेरे सिर में बहुत दर्द है।

प्रेमी ने लड़की के सिर को चूमते हुए

पूछा; अब सही हुआ?

प्रेमिका – हां, अब बिल्कुल सही हो

गया…

पास में ही खड़ा एक डॉक्टर बोला-

लानत है मेरी एमबीबीएस की डिग्री पर

😂😂😂😂🤣🤣🤣

लडका :- wow इतना बड़ा घर ???

लडकी :- हाँ हम पैसे वाले है .!!

लडका :- wow इतनी बड़ी कार ??

लडकी :- हाँ हम पैसे वाले है .!

लडका :- Oh my God इतना सोना भी है?

लडकी :- हाँ हम पैसे वाले है .

लडका :- ये लो लैटर !

लडकी :- ये क्या है ???

लडका :- हम INCOME_TAX वाले हैं।

लडकी कोमा में

😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣🤣

लड़का लड़की देखने गया:

उनको बात करने के लिए

अकेले बैठा दिया गया

लड़की डरते डरते:

भैया आप कितने भाई बहिन हो?

लड़का:अभी तक तीन थे

अब चार हो गए

😝😝😂😂😂🤣🤣

कुछ लोग Whatsapp पर बस

दो ही स्टेटस पोस्ट करते हैं।

पहलाः– Good Morning

दूसराः– Good Night

ऐसा लगता है, जैसे Whatsapp की

दुकान का शटर खोलने और बंद

करने की जिम्मेदारी इनकी है और

माल खरीदने बेचने की जिम्मेदारी हमारी

😆😆😆😂😂😂😂

लड़का- तू whatsappपर है क्या ???

लड़की- नहीं मैं तो मेरे घर हूँ ।

लड़का – मेरा मतूलब है, whatsapp

यूज करती है क्या ?

लड़की – नही मैं तो गोरी होने के लिए

क्रीम यूज करती हूँ!!

लड़का – अरे पगली!!! whatsapp

चलाती है क्या ???

लड़की- नहीं पगले! मेरे पास साईकिल

है वहीं चलाती हूं।

लड़का – मेरी मां! whatsapp चलाना

आता है क्या ?

लड़की- तू चला लेना! मैं पीछे बैठ

जाऊँगी?

😆😂🤣🤣🤣🤣🤣

जापान मे 2 भाई रहते थे ।

एक का नाम “जो ” था।

दुसरे का नाम “वो ” था।

एक रात “जो ” को बाथरूम मे भूत दिखा ।

“जो ” डर गया और उसने “वो “को आवाज लगाई

“वो ” दौड़ते हुए बाथरूम मे आया और भूत को

देखते ही उसका हार्ट फेल हो गया। और “वो “

मर गया।

बस उसी दिन से कहावत हो गई ।

“जो ” डर गया।

“वो ” मर गया ।

😁😁😆😆😂😂😝🤣🤣

एक कड़वा सच :-

जब कन्या अपने, पिता के घर होती है,

“रानी” बन के रहती है.

पहली बार ससुराल जाती है,

“लक्ष्मी”,बनकर जाती है.

और ससुराल में काम करते-करते

“बाई” बन जाती है,

इस तरह लडकियां “रानी-लक्ष्मी-बाईं”

बन जाती है…!!

और फिर वो पति को अंग्रेज समझ कर बिना

तलवार के ही इतना परेशान कर देती है कि

बेचारा वो पति, अंग्रेज न हो कर भी

“अंग्रेजी” लेना शुरू कर देता है।

😁😁😝😝🤣🤣🤣🤣

पहला दोस्त:

यार, मेरी बीवी गुस्सा बहुत करती है !

दूसरा दोस्त:

मेरी भी पहले करती थी, अब नहीं करती।

पहला दोस्त: तुमने क्या इलाज किया ?

दूसरा दोस्त:

एक दिन गुस्से में थी, मैंने कह दिया कि

बुढ़ापे में गुस्सा आ ही जाता है!

बस वो दिन है और आज का दिन,

तेज आवाज़ में भी बात नहीं करती!

😁😁🤭🤭😂😂😂

कक्षा दसवीं की परीक्षा मे

प्रश्न पूछा गया –

“माल्यार्पण करना” का अर्थ बताओ

होनहार छात्र ने लिखा –

सरकारी बैंकों द्वारा गरीब जनता की

गाढी कमाई माल्या को अर्पण

करने को ही माल्यार्पण कहते है।

और बच्चा सीधे MBA

के लिये सेलेक्ट हो गया।

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣


GF: बेबी?

BF: या डिअर

GF: तुम हमेशा से मेरे साथ थे, जब मेरा वो

भयानक एक्सीडेंट हुआ तब भी,

जब मेरे पाचवे सेमेस्टर में 3 सब्जेक्ट में जीरो

आए थे तब भी,

जब मुझे किडनी में पथरी हुई थी तब भी,

और जब मुझे पापा ने गुस्से में घर से निकाल

दिया था तब भी

BF: Aaawww love you baby 

हमेशा तुम्हारे साथ रहूँगा

GF: अरे नई रे मेरे को लग रहा है की शायद तू

ही पनोती है!

😝😝😂😂😂🤣🤣🤣🤣

डॉक्टर – आपको क्या बिमारी है ?

मरीज़ – पहले आप वादा करो की हंसोगे नहीं ।

डॉक्टर – OK Promise

मरीज़ ने अपनी टांगे दिखाई जो माचिस की तीली

जितनी पतली थी ।

डॉक्टर को यह देख के हंसी आ गयी।

मरीज़ – आपने ना हंसने का वादा किया था।

डॉक्टर – अच्छा Sorry

अब तकलीफ बताओ।

मरीज़ – डॉक्टर साहब, यह सूज गयी है ।

डॉक्टर – हाहाहाहा भाग साले

तू आया ही हंसाने के लिए है।

😝😝😂😂😂😂😂

ग्राहक- तुम्हारी भैंस की एक आंख

खराब है, फिर भी तुम

इसके र25000 मांग रहे हो ।

आदमी- तुम्हें भैंस दूध के लिए चाहिए या

नैन मटक्का के लिए चाहिए?

😝😆😝😂😂😂

मालिक: टाइम कितना हो रहा है?

नौकरः मुझे टाइम देखना नहीं आता।

मालिकः घड़ी देखकर बताओ कि बड़ी सुई और छोटी सुई कहां है?

नौकर: दोनों सुइयां घड़ी में हैं।

😝😝😝🤣🤣🤣

मालिक ने नौकर से कहा मच्छर मार

दो बहुत हो गए हैं…।

नौकर आलस में पड़ा रहा…।

थोड़ी देर बाद भी मच्छर गुनगुना रहे थे.।

मालिक ने फिर नौकर से कहा मच्छर

मारे नहीं क्या …?

नौकर ने मालिक से कहा

मच्छर तो कब के मार दिये,

ये तो उनके विधवा पत्नियों के रोने

की आवाज है।

😆😆😝😝😂😂😂🤣🤣

लडकी पप्पू से : आप का कुत्ता तो

टाइगर जैसा दिखता है,

क्या खिलाते हैं आप !

पप्पू : ये कमीना टाइगर ही है,

प्यार व्यार के चक्कर में पड़ गया

शकल कुत्ते जैसी हो गई है।

🤣🤣🤣🤣🤣🤣

एक भैंस जंगल में घबराई हुई

भागी जा रही थी,

एक चूहे ने पूछा क्या हुआ बहन,

कहां भागी जा रही हो

भैंस– जंगल में हाथी को

पकड़ने पुलिस आई हुई है

चूहा–तो तुम क्यों भाग रही हो,तुम

तो हाथी नहीं हो

भैंस– ये इंडिया है मियां,पकड़े गए

तो 20 साल ये साबित करने में लग

जायेंगे,कि मैं हाथी नहीं भैंस हूं..

हट तेरी की

ये सुनकर चूहा भी भागने लगा

😂😂😂😂😂🤣🤣

पप्पू – आपकी बीवी दिखाई नहीं दे

रहीं हैं??

बॉस – नहीं मैं उसे पार्टी में नहीं

लाता!!

पप्पू – क्यूँ सर

बॉस – वो गॉव की हैं ना!!

पप्पू – ओहह, माफ़ करना

मुझे लगा केवल आपकी हैं!!

पप्पू अस्पताल में!!

😬😬😝😂🤣🤣🤣

पप्पू ने अमरुद लिए तो उसमें

से कीड़ा निकला

पप्पू अमरुद वाले से: इसमें

तो कीड़ा है।

अमरुद वाला:- ये किस्मत की बात है।

क्या पता अगली बार मोटरसाइकिल निकल जाए

पप्पू : 2 किलो और दे दो।

😂😂😂😂😂😂😝

एक टकला बिना कॉलर की टीशर्ट में

बीवी से पूछता है – कैसा लग रहा हूं?

बीवी – अजी छोडो भी

टकला – अरे बता ना!!

बीवी – अजी रहने दो, अब मैं क्या बताऊ!!

टकला – अरे बता भी, तुझे मेरी कसम

बीवी – ऐसे लग रहे हो जैसे

फटे हुए मौजे से अंगूठा बाहर निकल

आया हो।।।।।

😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣😂

अंग्रेज सिपाही से,- इस आदमी का कान काट दो

आदमी – नही मेरा कान मत काटो

नही तो मैं अंधा हो जाऊँगा

अंग्रेज- बेवकूफ़ कोई कान काटने से अँधा होता है।

आदमी – अरे बेवकूफ़ कान काट देगा तो

चश्मा क्या तेरे बाप के कान पर लगाउँगा

😝😝😂😂😂🤣🤣🤣

एक चीता सिगरेट पीने ही वाला था कि अचानक

चूहा वहाँ आया और बोला,,

“भाई छोड़ दो नशा, आओ मेरे साथ, देखो जंगल

कितना खूबसूरत है। “चीता चूहे के साथ चल दिया।

आगे हाथी कोकीन ले रहा था, चूहा फिर बोला,

“भाई छोड़ दो नशा, आओ मेरे साथ, देखो जंगल

कितना खूबसूरत है।

“हाथी भी साथ चल दिया।

आगे शेर व्हिस्की पीने की तैयारी कर रहा था,

चूहे ने उसे भी वही कहा। शेर ने ग्लास एक साइड में

रखा और चूहे को 5-6 थप्पड़ मारे।

हाथी बोला: अरे भाई क्यों मार रहे हो इस बेचारे को?

शेर बोला, “ये साला रोज़ भांग पीके ऐसे ही सबको

पूरी रात जंगल घुमाता है।

😂😂😂🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

मास्टर जी – बच्चो बताओ काल कितने प्रकार के होते है ..

छोटा चिरकुट- काल तीन प्रकार के होते हैं।

मास्टर जी – शाबाश।

अब पप्पू तुम बताओ 3 प्रकार के काल कौन से है .

पप्पू – जी डायल कॉल , रिसीव कॉल और मिस कॉल ….

मास्टर जी पाठशाला छोड़कर गेंहू काटने चले गये

😂😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣

बेटा : मम्मी आप जैसे मुझे

मारती हो वैसे नानी भी आपको

मारती थी क्या?

मम्मी : बिलकुल मारती थी

बेटा : तो ये खानदानी गुंडागर्दी

कबतक चलेगी!

😝😝😂😂😂😂😂

एक बार एक व्यक्ति ने मौत के बाद स्वर्ग का

दरवाज़ा खटखटाया तो अन्दर से आवाज

आयी,”क्या तुम शादीशुदा हो?”

आदमी: जी हां।

अन्दर से फिर आवाज़ आयी,” तुम अन्दर आ सकते

हो, तुमने शादी करके दुनिया में काफी सजा पायी

है।”

उसके बाद दूसरे आदमी ने दरवाजा खटखटाया तो

अन्दर से आवाज आयी ,”क्या तुम शादीशुदा हो?”

दूसरा आदमी: जी हां, मेरी दो बार शादी हो चुकी है।

अन्दर से आवाज़ आयी,” भाग जाओ, यहां

बेवकूफों के लिए जगह नहीं है।”

😝😝😝😂😂😂🤣🤣🤣

एक खरगोश रोज़ एक लोहार की

दुकान पर जाता और पूछता गाजर है???

लोहार इंकार कर देता।

एक दिन लोहार

को बहुत गुस्सा आया और उसने

पकड़कर खरगोश के दांत तोड़ दिए।

और कहा अब तू”गाजर खा के दिखा?

फिर ?फिर क्या अगले दिन खरगोश

आया और पूछने लगा

“गाजर का हलवा है क्या???”

इसे कहते हैं attitude

😝😝😝😂😂😂🤣🤣🤣

हमारे पिताजी के समय में दादाजी गाते थे

मेरा नाम करेगा रोशन, जग में मेरा राज दुलारा,

हमारे ज़माने में हमने गाया

पापा कहते है बड़ा नाम करेगा,

अब हमारे बच्चे गा रहे हैं…

बापू सेहत के लिए

तू तो हानिकारक है!

😝😝😝😝😂😂😂

पप्पू दारू पी के

ताला खोलने लगा, हाथ कापने

की वजह से ताला नहीं खुल रहा था।

बंटी- मैं खोल दूँ?

पप्पू- मैं खोल लूँगा, तू घर को पकड़

साला बहुत हिल रहा है।

😝😝🤣🤣🤣🤣🤣

भारत में कुल 22546464372 लोग

आलसी हैं ।।

इनमें से तो कुछ तो इतने

आलसी हैं कि

उन्होंने अभी ऊपर लिखी संख्या भी

नहीं पढ़..!!

ना मुन्ना ना… अब मत पढ़ तेरी गिनती

इसमें हो गयी है…..

😝😝🤣🤣🤣🤣🤣

पप्पु – यार बिटु मेरा रिजल्ट तू देख के आजा !

अगर एक Subject में फेल हुआ तो

बोलना “जय श्री राम”….

अगर दो में फेल हुआ तो बोलना “राधे राधे”

अगर तीन में फेल हुआ तो बोलना “ब्रम्हा विष्णु महेश”

बिटु – (result निकलवाकर )

पप्पु- क्या हुआ ?

बिटु – बोलो साँचे दरबार की जय ।।।

सब में फेल

😝😝😂😂😂😂😂😂

नेपाली नौकर : (सुबह सुबह)- ओ शाब जी!!

मोटर खराब हो गई।।

साहब जी बड़ा परेशान अब क्या करुं??

इस कम्बख्त मोटर को भी सुबह ही खराब

होना था।

नौकरः क्या करूं शाब जी फैंक दें इशको क्या?

साहब जी : पागल है क्या, करवाता हूं शाम तक ठीक.

नौकर : ठीक है शाब जी तो फिर आज

आलू में मोटर के बदले गोबी डाल देता

हूँ शाब जी …..

साहब : दे चप्पल…दे चप्पल

😝😝😝😂😂😂🤣🤣🤣🤣

सड़क के इस पार एक पंजाबी भाई की दुकान थी।

सडक के उस पार एक बनिये का नया स्टोर खुला

और साइन बोर्ड लगा कि मक्खन 100 रुपये !

अगले दिन पंजाबी भाई की दुकान पर साइन बोर्ड

था, मक्खन 90 रुपये !

उसके अगले दिन बनिए के साइन बोर्ड पर

मक्खन 80 रुपये !

इसी चक्कर की बिना पर और दो दिन बाद बनिए

के साइन बोर्ड पर मक्खन 60 रुपये टंगा था!

इस सिलसिले पर निगाह रखने वाले एक मित्र

तब पंजाबी भाई के पास पहुंचे और समझाया कि

भाई, ‘वो बनिया बड़ी पैसे वाली पार्टी है, वो घाटा

खाकर भी लंबे समय तक अपना मक्खन या माल

बेच सकते हैं। तुम उसके सामने ज्यादा समय तक

टिक नहीं पाओगे।

पंजाबी भाई ने मित्र को देखा, उसकी तरफ झुके

और राजदाराना लहजे में कहा – प्राजी,मैं ते

मक्खन बेचदा ही नहीं

🤓😝😜🤣🤣🤣🤣

एक लड़का एक इंजीनिरिंग में पढ़ने वाली लड़की

के घर के बाहर रोज खड़ा रहता था,

लड़की समझ गयी कि वो उससे बहुत प्यार करता

लड़की ने बात अपने घर वालों को बताई,

उन्हें भी लड़का पसंद आ गया,

और शादी की तैयारी होने लगी

लड़की ने सोचा कि लड़के को भी शादी के

बारे में बता देना चाहिए,

सो वह हिम्मत करके लड़के के पास गयी,

और कान में बोली – मुझे पता है तुम मुझसे बहुत प्यार

करते हो, मैंने बात कर ली है अब हमारी शादी हो जाएगी,

लड़का(घबराकर)- माफ़ करना बहन जी,

मैं तो आपके घर के पास इसलिए खड़ा रहता हूँ

क्यूंकि आपके Wi-Fi में पासवर्ड नहीं है,

मस्त नेट चलता है

😝😝😝🤣🤣🤣🤣

पुलिस – तुम्हारे सामने चोर उस लड़की का.

पर्स छीन रहा था और तुमने उसकी

कोई मदद नहीं की।

लड़का – में उस लड़की को जानता हूँ,

उसका WhatsApp स्टेटस है –

“I can handle my problems.

Mind your own business…

Don’t underestimate the power

of woman.”

पुलिस – फिर ठीक है मरण दे….

😂😂😂😂😂😂😂😂😂

आज एक बूढऊ हमारे पासवाले

स्कूल के सर से बोल रहे थे-

मास्साब, स्कूल खुले तो कई दिन हुई

गये..पर बो गोरी वाली

मैडम दिखी नहीं अब तक?

सर बोले- भाई साहब, उनको

ट्रांसफर हो गओ।

सज्जन बोले – हे भगवान.. जे मो’दी

कोऊ को खुश नई देख सकते ।

🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣🤣

एक शहरी लड़का नदी में बत्तखों पर

निशाना लगा रहा था

निसाना चुक गया और पानी भर रही एक

देहाती महिला का घड़ा फुट गया।

वह उस स्त्री के पास गया और बोला

‘sorry for that’

उस औरत ने एक झन्नाटेदार थप्पड़ मारा,

“दहिजरा के नाति ! एक तौ घड़ा फोरि

दिहिस

ऊपर से कहत है ‘साडी फार देब “, अरे हम

तोहार करेजा निकार लेब ।।

😝😝😝🤣🤣🤣

मायके गई हुई पत्नी ने अपने पति को

फोन किया और कहा कि ….

अब मुझे ले जाओ…

पति : कुछ दिन और रह लो..

पत्नी : नहीं जी… भैया ,भाभी,

बहन, मम्मी, पापा सब से दो – दो तीन

तीन बार लड़ाई कर ली…

लेकिन…

तुम्हारे जैसा मज़ा नहीं आता…

😝😝😬😬😂😂🤣

टीचर- अच्छा बच्चों बताओ

ड्राइवर और कंडक्टर में

क्या फर्क होता है?

गुरुजी, कंडक्टर सो गया तो

किसी का टिकट नहीं कटेगा.

लेकिन अगर ड्राइवर सो गया तो

सब का टिकट कट जाएगा

😬😝😂🤣🤣🤣

गधा: मेरा मालीक मुझे

बहुत पीटता है।

कुत्ताः तुम भाग क्यो नही

जाते

गधा: मालिक की खुबसुरत लडकी जब पढाई नही

करती तो मालिक कहता हैं की

“तेरी शादी गधे से कर दुंगा”

बस इसी उम्मीद से टीका हुं

😁😁😝😂😂🤣🤣

प्रेमिका- क्या तुम मुझसे प्यार करते हो?

प्रेमी- हाँ।

प्रेमिका- लेकिन तुम्हें तो मेरी कोई परवाह

ही नहीं है।

प्रेमी- प्यार करने वाले किसी की

परवाह नहीं करते।

😁😁😂😂😂

एक आदमी

रविवार को डॉक्टर के पास गया

आदमी: डॉक्टर साहेब मेरी पत्नी मुझे

कुछ समझती ही नही है

हर समय चिडचिड करती रहती है।

मेरी ज़रा भी नही सुनती

क्या आप उसे शांत कर सकते है?

डॉक्टर- अबे यह सब इतना आसान

होता तो क्या

मैं रविवार को क्लिनिक खोल कर

बैठा होता।

😐😬😝😝😂🤣🤣

एक परिवार मे 5 बहने थी..

एक का नाम था -: टूटी

दूसरी का नाम -: फटी

तीसरी का नाम -: फीकी

चौथी का नाम -: मरी

पांचवी का नाम -: भूतनि

एक दिन उनके घर पर लड़की देखने के

लिये मेहमान आए!

मम्मी ने पूछा, आप कुर्सी पर बैठेगें या नीचे

चटाई पर?

मेहमान:- कुर्सी पर

मम्मी :- टूटी!! कुर्सी लेकर आओ

मेहमान :- नहीं नहीं, हम चटाई पर बैठ

जायेंगे

मम्मी :- फटी!! चटाई लेकर आओ

मेहमान :- रहने दीजिए, हम जमीन पर ही

बैठ जायेंगे मेहमान जमीन पर बैठ गये

मम्मी :- आप चाय पीऐँगे या दूध?

मेहमान :- चाय

मम्मी :- फीकी!! चाय लेकर आओ

मेहमान :- नहीं नहीं, चाय रहने दो, हमें दूध

ले आओ

मम्मी :- मरी!! भेस का दूध ले के आओ

मेहमान :- रहने दीजिये हमें कुछ भी नहीं

चाहियें

सिर्फ लड़की दिखाईये

मम्मी :- बेटियों!! भूतनि को लेकर आओ

मेहमान:- बेहोश!

😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣🤣

संता बड़ी धीरे धीरे फोन पे

बात कर रहा था,

बीवी – इतनी धीमी आवाज में

किससे..बात कर रहे हो ?

संता – अरे बहन है,

बीवी – तो इतना धीरे क्यों

बात कर रहे हो ?

संता – तेरी बहन है!

😝😝😂😂🤣🤣

पति: क्या बात है. आज

घर बड़ा साफ है।

क्या whatsapp बंद है

तुम्हारा?

पत्नी: नहीं वह तो

चार्जर नहीं मिल रहा था

तो ढूंढ़ने के चक्कर में

सफाई हो गई।

😬😬😂😂😂😂

लड़की अपने बॉयफ्रेंड से लड़ रही थी.

लड़की – मुझे ब्रेकअप चाहिए.

लड़का – नहीं मेरी जान.

लड़की – मैंने जो गिफ्ट दिए वो वापस करो.

घडी, जींस, शूज, बेल्ट सब दो वापस मेरा,

लड़का- ठीक है तुझे जो इतने दिन बाइक पे

बैठा के घुमाया उसका पेट्रोल वापस कर.

लड़की – जानू इतनी जल्दी गुस्सा क्यों करते हो,

मैं मजाक कर रही हूँ.

😁😁😂😂😝🤣🤣

“एक लड़के ने एक लड़की को

प्रपोज किया तो लड़की ने मना

कर दिया।

लड़के ने कहा : मैं एक महीने तक

तुम्हारे घर के नीचे खड़ा रह कर

तुम्हारा इंतजार करूंगा।

एक महीने बाद लड़की ने उस

लड़के से कहा, ‘आई लव यू।’

लड़का: रहने दो, अब तुम्हारी

पड़ोसन सेट हो गई है।”

😝😝😂😂🤣🤣🤣

65 साल के बुजुर्ग ने अस्पताल में

डॉक्टर से कहा :-

डॉ साहब मै ज्यादा पैसे देने को तैयार

हूं पर मेरे इलाज के पूरे समय नर्स जरा

सुंदर रखना।

डॉक्टर :-अंकल इस उम्र में आप ऐसी बात कर

रहे है..?

अंकल :- डॉक्टर, आप ग़लत समझ

रहे हैं, मेरे दो बेटे हैं।

नर्स सुंदर होगी तो, दोनों कमीने

सुबह-शाम दो बार मेरे हाल पूछने

आएंगे…!!

😬😝😝😂😂🤣🤣

एक औरत अपनी पड़ोसन को बता

रही थी

“तुझे पता है, 20 साल तक मेरी

कोई औलाद नहीं हुई”

पड़ोसन हैरानी से : “तो फिर तूने

क्या किया ?”

औरत : “फिर मैं 21 साल की हुई तो

मेरे पापा ने मेरी शादी कर दी …

फिर जा के मुन्ना हुआ

पड़ोसन खड़े खड़े बेहोश हो गयी

😂😂😂😂😂🤣🤣🤣🤣

आईने के सामने खड़ी पत्नी ने अपने

पति से पूछा,

मैं बहुत ज़्यादा मोटी लग रही हूं क्या?

लॉक डाउन में झगड़ा न हो जाए,

ये सोच पति मुस्कुराकर बोला,

अरे नहीं बिल्कुल भी नहीं…

पत्नी खुश हो गई और बोली,

“ठीक है, तो फिर मुझे अपनी बांहों में

उठाकर फ्रिज तक ले चलो, मुझे

आइसक्रीम खानी है।

परिस्थिति नियंत्रण के बाहर जाती देखे

पति बोला, तुम यहीं रुको….

“मैं फ्रिज उठा कर लाता हूँ..!!

😬😝😝😂😂🤣🤣🤣

एक महिला तीन बच्चों के साथ

एक बस में यात्रा कर रही थी !!

कंडक्टर : मैडम इन बच्चों का टिकिट

लगेगा,

उम्र बताओ ..??

महिला : पहले वाले की २ साल,

दूसरे वाले की ढाई साल,

औरे तीसरे कि तीन साल..!!

कंडक्टर : मैडम टिकिट चाहे मत लो

पर गैप तो 9 महीने का रखो..

महिला : करमफुटे 

बीच वाला जेठानी का है..!!

तू टिकिट काट.., ज्ञान मत बांट .!

😝😝😂😂🤣🤣🤣

डॉक्टर : तबियत कैसी है..?

मरीज़ : पहले से ज्यादा खराब है.

डॉक्टर : दवाई खा ली थी.?

मरीज़ खाली नहीं थी भरी हुई थी..

डॉक्टर : मेरा मतलब है दवाई ले ली थी.?

मरीज़ : जी आप ही से तो ली थी.

डाक्टर : बेवकूफ़ !! दवाई पी ली थी.?

मरीज़ नहीं जी, दवाई नीली थी..

डॉक्टर : अबे गधे !! दवाई को पी लिया था.?

मरीज़ नहीं जी., पीलिया तो मुझे था.

डॉक्टर : उल्लू के पट्टे ! दवाई को खोल के मुँह में रख लिया था.?

मरीज़ : नहीं आप ही ने तो कहा था कि फ्रिज में रखना..

डॉक्टर : अबे क्या मार खायेगा..?

मरीज़ नहीं दवाई खाऊंगा.

डॉक्टर : निकल साले, तू पागल कर देगा.

मरीज़ : जा रहा हूँ, फिर कब आऊँ..?

डॉक्टर : मरने के बाद..

मरीज़ मरने के कितने दिन बाद.?

डॉक्टर बेहोश।

😝😝😂😂🤣🤣🤣🤣

एक आदमी जख्मी हालत में पुलिस स्टेशन

पहुँचा।

हवलदार—” क्या हुआ?

आदमी—” बीवी ने पिटाई की।”

हवलदार—” क्यों ? “

आदमी—” उसके मम्मी-पापा हमारे घर पर आए

तो उसने मुझसे कहा कि, बाहर से उनके लिए

कुछ ले आओ।”

हवलदार—” तो ? “

आदमी—” मैं टैक्सी ले आया। “

😝😝😝😂😂🤣🤣🤣

लड़की: पापा मुझे आपसे बहुत जरूरी बात करनी है

पिता: बोलो बेटा

लड़की: मै एक लड़के से प्यार करती हूं और वो अमेरिका

में रहता है

पिता: लेकिन बेटा तुम उससे कहा मिली

लड़की: website पर हमारी पहचान हुई

facebook पे हम दोनों दोस्त बने

skype पर उसने मुझे प्रोपोज़ किया

whatsapp पर दो महीने तक प्यार किया

पिता: ओह रियली.. तो अब Twitter पर शादी करलो

flipkart से बच्चे मँगवालो

gmail से रिसीव कर लो

और

फाइनली अगर पति पसंद न आया तो

olx पर बेच डालो

😂

सृष्टि की रचना

 परमात्‍मा ने दुनियां को बनाया। अब इस प्रश्‍न का उठना स्‍वाभाविक है: और वेद भी यही पूछते हैं कि उसने दुनियां को क्‍यों बनाया? इस अर्थ में वेद महान है। वे कहते है कि शायद उसे भी मालूम नहीं है क्‍यों? उस से उनका तात्‍पर्य  परमात्‍मा  से है। शायद इसका सृजन भोलेपन में ही हुआ, ज्ञान से नहीं। शायद वह सृजन नहीं कर रहा था। शायद वह उस बच्‍चे की तरह खेल रहा था जो रेत के घरौंदे बनाता है। क्‍या बच्‍चों को मालूम होता है कि वे घरौंदे किसके लिए बना रहे है। 

परमात्‍मा ने इस दुनिया को बनाया। उसने यह काम छह दिनों में समाप्‍त किया। अंत में उसने स्‍त्री को बनाया। स्‍वभावत: प्रश्‍न उठता है कि क्‍यों? उसने स्‍त्री को अंत में क्‍यों बनाया। स्‍त्री परमात्‍मा की सर्वश्रेष्‍ठ कृति है, परिपूर्ण है। पुरूष के सृजन के अनुभव के बाद ही उसने स्‍त्री की रचना की। पुरूष तो पुराना मॉडल है। परमात्‍मा ने स्‍त्री के रूप में अधिक परिष्‍कृत मॉडल तैयार किया।

 कुछ का मानना है कि पुरूष तो परमात्‍मा की अंतिम रचना है। परंतु पुरूष ने उससे इस प्रकार के प्रश्न पूछने शुरू किए, कि तुमने दुनिया को क्‍यों बनाया। या तुमने मुझे क्‍यों बनाया। परमात्‍मा इतना परेशान हो गया कि पुरूष को परेशान करने के लिए, उसने उलझन में डालने के लिए उसने स्त्री का सृजन किया।जब से परमात्‍मा ने पुरूष से कुछ नहीं सुना। 

परमात्‍मा ने स्‍त्री की रचना पुरूष के बाद क्‍यों की। पुरूष कहते है कि पुरूष तो परमात्‍मा की परिपूर्ण कृति है। तुमने यूनानी और रोमन मूर्ति कला में पुरूषों की मूर्तियां तो अवश्‍य देखी होगी, किंतु स्‍त्री की नग्‍न मूर्ति बहुत कम दिखाई देती है। सिर्फ पुरूष, अजीब बात है। इसका कारण क्‍या था। क्‍या उन लोगों को स्‍त्री में सौंदर्य दिखाई नहीं देता था। वास्‍तव में वे पुरूष-तानाशाह थे।

 परमात्‍मा ने पुरूष को बनाया और पुरूष ने दार्शनिक प्रश्‍न पूछने शुरू कर दिए। परमात्‍मा ने स्‍त्री को बनाया, ताकि वह पुरूष को व्‍यस्‍त रख सके। बस तब से पुरूष कद्दू या केले ख़रीदता रहता हे। और जब तक वह घर पहुंचता है वह इतना थक जाता है कि जब  उसकी पत्‍नी उसके साथ महत्‍वपूर्ण विषयों पर चर्चा करना चाहती है,तो वह मोबाइल के पीछे अपने को छिपा लेता है। स्‍त्री उसको निरंतर भगाती रहती है कि अब यह करो, वह करो।

आपने कभी ऊंची एड़ी की जूती पहने हुए  महिलाओं को देखा है। वह एड़ी इतनी ऊंची होती है कि रस्‍सी पर चलने वाला आदमी भी उन जूतियों को पहन कर चलने की कोशिश करे तो चल नहीं सकेगा, गिर जाएगा। क्‍या आपको मालूम है कि ऊंची एड़ी वाली जूतियों को क्‍यों चुना गया? एक अति धार्मिक समाज ने बहुत ही अधार्मिक कारण के लिए, अश्‍लीलता के लिए इनको चुना है। क्‍योंकि जब एड़िया ऊंची होती है तो नितंब उभरे रहते है। हम कारण को जानने की तो कोई कोशिश ही नहीं करते। महिलाएं ऊंची एड़ी की जूती पहन कर सोचती है कि वे बहुत ही सभ्‍य और शालीन दिखाई देती है। यह बहुत ही अभद्र है। उनको समझ में यह नहीं आता कि वह अपने नितंब का मुफ्त-प्रदर्शन कर रही है। और दूसरे इसका मजा ले रहे है, और तंग कपड़ों में तो उनकी नग्‍नता स्‍पष्‍ट प्रदर्शित होती है। तंग कपड़ों में स्त्रीयां नग्‍नता से ज्‍यादा अच्‍छी दिखाई देती है। क्‍योंकि चमड़ी तो चमड़ी है। अगर काई तीस साल की है तो चमड़ी भी तीस साल की होगी। तीस साल को गुजरते उसने देखा है। इसी लिए वह बाजार से खरीदी गई नई पोशाक की तरह कसी हुई नहीं हो सकती। अब तो कपड़े बनाने वाले चमत्‍कार कर रहे है। वे स्‍त्रियों को इतना मनमोहक बना रहे है कि परमात्‍मा भी सेब खा लेता।

समझ रहे हैं आप, समझने में कुछ देर लगती है। हां,सांप की तो जरूरत ही न पड़ती, कपड़े बेचने वाला सेल्‍समैन ही काफी था। बस, मिसेस ईव के लिए एक तंग पोशाक और परमात्‍मा खुद ही सेब खा लेता और मिसेस ईव के साथ शाम को ड्राइव के लिए चला जाता।

परमात्‍मा ने पुरूष की रचना की, और क्‍योंकि पुरूष अकेला था, उसे एक साथी की जरूरत थी, तो परमात्‍मा ने ईव को बनाया। ऐसा कहानी में बताया जाता है मूल स्‍त्री का नाम ईव नहीं था। उसका नाम लिलिथ था। परमात्‍मा ने लिलिथ को बनाया परंतु लिलिथ ने तो पहले क्षण से ही समस्‍या उत्‍पन्‍न कर दी। 

 शुरूआत ऐसे हुई कि सूर्य अस्‍त हो रहा था। रात हो रही थी और उनके पास केवल एक ही पलंग था, यह समस्‍या थी। उस समय आनं लाइन पर सामान मगांने की सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

 झगडा तो बिस्‍तर में जाने से पहले ही शुरू हो गया। भले ही उसकी जानकारी उसको हो या न हो। उसने झगड़ा किया और अदम को बिस्‍तर से बाहर फेंक दिया। कितनी महान औरत थी वह, अदम ने उसको बाहर फेंकने की बार-बार कोशिश की। पर फायदा क्‍या था। अगर वह सफल हो भी जाता तो भी वह वापस आकर उसे बाहर फेंक ही देती। उसने कहा: इस बिस्‍तर में केवल एक ही सो सकता है, यह दो के लिए नहीं बना है।भगवान ने इसको दो के लिए नहीं बनाया था, यह डबल बेड़ नहीं था। 

वह सारी रात झगड़ते रहे और सुबह अदम ने भगवान से कहा: मैं तो बहुत खुश था...  हालाकि वह था नहीं। परंतु रात भर के दुःख के कारण उसको अपना विगत जीवन सुखी लग रहा था। उसने कहा: इस स्‍त्री के आने के पहले मैं इतना सुखी था। और लिलिथ ने भी  कहा: मैं भी बहुत सुखी थी। मैं तो जीना ही नहीं चाहती। बहुत सी बातों का आरंभ उसी से हुआ होगा।  क्‍योंकि उसने कहा, मैं जीना नहीं चाहती। एक जीवन के लिए एक रात ही  काफी है। मुझे मालूम है कि हर रात बार-बार उसी की पुनरावृति होगी। अगर तुम मुझे डबल बेड भी दे दो तब भी कोई फर्क नहीं पड़ेगा। हम दोनों में झगड़ा होता ही रहेगा। क्‍योंकि प्रश्‍न तो यह कि मालिक कौन है। इस बर्बर व्‍यक्‍ति को मैं अपना मालिक नहीं बनने दूंगी।

परमात्‍मा ने कहा: अच्‍छा, उन दिनों, ये बिलकुल आरंभ के दिन थे, सृष्‍टि के बाद का यह पहला ही दिन था। जरूर रविवार रहा होगा, ईसाइयों के अनुसार। परमात्‍मा रविवार की छुटटी के मूड में ही रहा होगा क्‍योंकि उसने कहा: ठीक है, मैं तुम्‍हें गायब कर दूँगा। लिलिथ गायब हो गई, और तब परमात्‍मा ने आम की पसली से ईव को बनाया।

यह पहला आपरेशन था। देवराज इसको नोट कर लो। परमात्‍मा पहला सर्जन था। आज के तथाकथित वैज्ञानिक इसे माने या न माने, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। उसने बहुत बड़ा काम किया। उसके बाद से अब तक ओर किसी सर्जन ने ऐसा नहीं किया, कोई कर भी नहीं सकता। केवल एक पसली से उसने स्‍त्री को बना दिया। भगवान को ऐसा नहीं करना चाहिए। केवल एक पसली.....।अब बाकी की कहानी यह है कि हर रात सोने से पहले ईव आदतन ही पसलियों को गिनती है यह देखने के लिए कि बाकी सब पसलियाँ सही सलामत है या नहीं। और दुनिया में दूसरी कोई औरत तो नहीं है। यह जानने के बाद वह अच्‍छी तरह से सो जाती है।

बड़ी अजीब बात है.....अगर दूसरी औरत हो तो वह अच्‍छी तरह से क्‍यों सो नहीं सकती? किंतु कहानी का यह अंत ठीक नहीं है। पहली बात तो यह है कि इसमें पुरूष ताना शाही है। दूसरी बात यह है कि यह परमात्‍मा के अनुरूप नहीं है। तीसरी बात यह है कि इसमें कल्‍पना की कोई उड़ान नहीं है। और बहुत अधिक तथ्‍यात्‍मक है। कभी-कभी तो केवल इशारा ही करना चाहिए। निष्‍कर्ष यह है कि परमात्‍मा ने पहले पुरूष को बनाया क्‍योंकि वह नहीं चाहता था कि सृजन के समय किसी प्रकार की कोई दखलंदाजी हो।

परमात्‍मा ने जगत न तो पुरूष प्रधान समाज के अनुसार बनाया है और न ही नारी मुक्‍ति आंदोलनकारीयों के अनुसार बनाया है। इन दोनों के मत परस्‍पर विरोधी है। उसने स्‍त्री को सही मॉडल के रूप में बनाया। और हर कलाकार का यही विचार है कि स्‍त्री बहुत अच्‍छी मॉडल है। अगर तुम उनके चित्रों को देखो तो तुम्‍हे भी यह विश्‍वास हो जाएगा कि वह बढ़िया मॉडल है। किंतु बस वहीं पर रूक जाओ। वास्‍तविक स्‍त्री को छूना मत। चित्र ठीक है, प्रतिमाएं भी ठीक हैं। परंतु वास्‍तविक स्‍त्री तो उतनी अपूर्ण है जितना कि उसे होना चाहिए। स्त्रीयां अपूर्ण है, पुरूष अपूर्ण है। और जब दो अपूर्णताएं मिलती है तो तुम अंदाज लगा सकते हो कि उसका परिणाम क्‍या होगा।

परमात्‍मा है या नहीं है, यह तो एक कहानी है। जीवन सरल भी है और जटिल भी, दोनों। ओस की बूंद की तरह सरल और ओस की बूंद की तरह जटिल। क्‍योंकि ओस की बूंद सारे आकाश को प्रतिबिंबित करती है। और उस के भीतर सारे सागर समाए हुए है। और वह हमेशा तो रहेगी नहीं, बस कुछ क्षण और फिर मिट जाएगी सदा के लिए। मैं सदा के लिए, जोर दे रहा हूं। फिर उसको वापस नहीं लाया जा सकता उन सब तारों और साग़रों के साथ।

ओशो रजनीश के प्रवचनों पर आधारित

हरिओम सिंगल 

Internet में safe और secure कैसे रहें

Internet में safe और secure कैसे रहें? ये सवाल प्राय सभी internet users के मन में एक न एक बार तो जरुर आया होगा. ऐसा इसलिए क्यूंकि आजकल के इस digital ज़माने में जहाँ सभी चीज़ें online में ही उपलब्ध हैं वहीँ भला criminals कैसे पीछे रहें. अब तो ये internet इन लोगों के लिए स्वर्ग सा बन गया है क्यूंकि यहाँ बहुत ही कम मेहनत बहुत ज्यादा पैसे कमाया जा सकता है. इसलिए हम आप जैसे सीधे साधे लोगों को थोड़ी बहुत सतर्क होकर काम करना होगा, नहीं तो हमारी मेहनत की कमाई हमारी थोड़ी असावधानी के चलते एक ही झटके में इन cyber criminals के द्वारा चोरी कर ली जाएगी.

इस internet ने पूरी तरह से हमारे जीवनसैली को ही बदलकर रख दिया है, वो चाहे news पढना हो, या कोई entertainment को enjoy करना, या कोई research करना, हमारे holidays को online book करना, चीजों की खरीदारी करना और बेचना और ऐसे बहुत सारे हमारे दैनिक कार्य. ऐसे में खुद को internet या cyber ही space में protect करना बहुत ही complex है अपने घर के दरवाजे को lock करने की तुलना में. Technology के विकास से हमारे उपकरण भी सब develop हो गए हैं जिससे हम आजकल Smartphones, Tablets जैसे उपकरणों का इस्तमाल कर रहे हैं जिन्हें हम आसानी से अपने साथ ले जा सकते हैं और ये internet-connected devices हमारे online risks को और भी बढ़ा दे रहे हैं.

Internet/Online में खुद को Safe और Secure कैसे रखें जानिए हिन्दी में?

ये World Wide Web (WWW) बहुत ही शानदार resource है हमारे लिए, लेकिन जैसे सभी शानदार चीज़ के साथ risk भी होती है इसलिए इसके साथ भी risks मौजूद हैं. लेकिन यहाँ एक ख़ुशी की खबर ये हैं की यदि हम कुछ security measures का ठीक ढंग से पालन करें तब हम बहुत ही आसानी से इन online threats को बहुत हद तक कम कर सकते हैं. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को Internet में safe और secure कैसे रहें के विषय में जानकारी प्रदान करूँ जिससे की आपको Online सुरक्षित रहने में आसानी हो. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.


1. Firewall check जरुर करें

सुनने में भले ही ये Firewall थोडा अजीब सा लगता हो लेकिन ये आपके Computer के security के लिए बहुत ही जरुरी चीज़ हैं. इसे चालू करना भी उतना ही आसान है. यदि आप एक Windows-based system का इस्तमाल कर रहे हैं तब आपको control panel जाना होगा फिर वहां type करना होगा “firewall” search box में. अगर आपकी firewall “on” या “connected,” हो तब तो आपको कुछ भी नहीं करना है वरना इसे on करना होगा. ये Firewall बहुत से criminals को आप तक पहुचने नहीं देंगे. इसके साथ अपने computer के resources को किसी दुसरे के साथ कभी भी share न करें जिन्हें आप नहीं जानते हों.

2. Data Back Up जरुर करें

अपने data का backup करना एक बहुत ही बुद्धिमानी का कार्य है. क्यूंकि ऐसा बहुत बार होता है की किसी ऐसे कारन जैसे की computer crash या कोई electrical outage या surge के कारन ,या किसी lightning storm के कारन बहुत बार हमारे data ख़राब हो जाते हैं. ऐसे में अगर हम इनका backup रखेंगे तब data को फिर से पाने में हमें आसनी होगी. वहीँ आजकल ransomware से internet users बहुत प्रभावित हैं जो की हमारे system को encrypt कर देता है जिससे हमें अपने data से हाथ धोना पड़ता है. इन सभी परेशानियों से बचने के लिए हमें अपने data का backup जरुर बनाना चाहिए.


3. Rogue Websites से दूर बनाये रखें

एक rogue website को ढूंड पाना थोडा कठिन है क्यूंकि ये आम websites के तरह ही दीखते हैं लेकिन यदि आप कुछ चीज़ों के ऊपर ध्यान दें तब आप आसानी से ऐसे website से दूर रह सकते हैं. हमेशा आपको address bar में green lock को खोजना चाहिए जहाँ की code prefix में “https://” लिखा हुआ होना चाहिए at URL के starting में जब आप कोई banking sites visit कर रहे हैं, या कहीं अपना credit card data भर रहे हैं या कहीं अपना web mail access कर रहे हैं. इसके अलावा shopping sites से भी थोडा सतर्क रहें. इसके अलावा कभी भी email में आये links को न खोलें बल्कि उनके official website में ही जाकर उन्हें open करें.

ये World Wide Web (WWW) बहुत ही शानदार resource है हमारे लिए, लेकिन जैसे सभी शानदार चीज़ के साथ risk भी होती है इसलिए इसके साथ भी risks मौजूद हैं. लेकिन यहाँ एक ख़ुशी की खबर ये हैं की यदि हम कुछ security measures का ठीक ढंग से पालन करें तब हम बहुत ही आसानी से इन online threats को बहुत हद तक कम कर सकते हैं. इसलिए आज मैंने सोचा की क्यूँ न आप लोगों को Internet में safe और secure कैसे रहें के विषय में जानकारी प्रदान करूँ जिससे की आपको Online सुरक्षित रहने में आसानी हो. तो बिना देरी किये चलिए शुरू करते हैं.


4. लुभावने Deals से दूर रहें

अगर आपके सामने कभी भी कुछ ऐसे deals आयें जिन्हें की विस्वास कर पाना आपके पक्ष में भी संभव नहीं है तब ऐसे में इनसे दुरी बनाए रखें क्यूंकि ये deals अक्सर clickbat होते हैं, ये customer को अपने sites की और आकर्षित करने के लिए ही होते हैं. ये spammy links भी हो सकते हैं.


5. अपने Sensitive Information share न करें

चाहे कुछ भी हो जाये लेकिन कभी भी अपने sensitive information किसी untrusted website में reveal न करें. इसके साथ अपने bank details, credit card number, social security number कभी किसी के साथ share न करें. और social media profile में अपने विषय में पूरी जानकारी कभी भी प्रदान न करें, क्यूंकि अगर आपका account यदि hack हो जाता है तब आपके सभी जानकारी hackers के हाथ में आ जाएगी.

6. Unknown Emails को मत खोलें

कोई भी email जो की किसी unknown या suspicious source से आया हो, उन्हें कभी भी न खोलें. इसके साथ कभी उन attachments को न खोलें जो की इन emails के साथ आती हैं. ये links अक्सर spammy होते हैं ये hacking और phishing के लिए इस्तमाल किये जाते हैं. इनसे हमेशा दुरी बनाये रखें.


7. अपने Mobile Life को protect करें

हमारे mobile devices भी उतने ही vulnerable हैं online threats के प्रति जितने की हमारे laptops और computers हैं. यहाँ तक की mobile devices में ज्यादा नए risks होते हैं, जैसे की risky apps और dangerous links जो की आपके mobiles में text message के रूप में आते हैं. इन्हें click करने से पहले बहुत careful रहें और strangers के द्वारा भेजे गए messages को कभी भी respond न करें. अगर आप app download करना चाहते हैं तब केवल official app stores से ही करें वो भी users’ reviews पढने के बाद. इसके अलावा अपने smartphones में security software install करें और उन्हें समय समय में update जरुर करें.

8. हमेशा up-to-date रहें

अगर आप अपने computers और Mobile Phones को हमेशा update रखेंगे तब आप ऐसे में 90% तक की security threats को पैदा होने से पहले ही ख़तम कर सकते हैं. इसलिए मेरी मानें तो अपने Systems में automatic updates को enable कर लें.

9. खुद को Educate करें

एक बात में आपको साफ़ तोर से कह देना चाहता हूँ की दुनियाभर के सभी protection भी आपको खुद से बचा नहीं सकते हैं. इसलिए आपको खुद ही खुद बहुत से चीज़ों को सीखना होगा और उन्हें सही तरीके से apply करना होगा.


उन attachments को कभी न खोलें जिनके विषय में आप भी sure न हों. ये attachments ही सबसे common तरीके होते हैं malware के spread होने का.

कभी भी इन phishing scams में न पड़ें. थोड़ी बुद्धिमानी दिखाएँ. ये Phishing के जरिये ही online accounts को अक्सर hack किया जाता है.

कभी भी ऐरे गैरे links को click न करें.

कभी भी बिना देखे “free” software को install न करें क्यूंकि इन “free” packages के साथ अक्सर spyware, adware, भी साथ आते हैं.

इसके साथ कभी भी किसी के साथ passwords share न करें और हमेशा खुद को online security news से update रखें.


शुक्रवार, 18 अगस्त 2023

shakarpara

Ingredients for shakarpara

शक्कर पारे बनाने के लिए सामग्री 

 All purpose flour 1 cup 

मैदा 1 कप

Suji /fine rava -1 cup 

सूजी 1 कप

Milk 1/4 cup,

 दुध1/4 कप

Powdered sugar 1/2 cup 

पावडर शुगर 1/2 कप

Ghee 1/4 cup

 घी 1/4 कप

 Baking soda 2 pinch

बेकिंग सोडा २ पिंच 

Oil for frying

तेल तलने के लिए

For making homemade Shakkarpara In a bowl mixed Suji & Maida

घर पर शक्कर पारे बनाने के लिए एक बाउल में सूज़ी ओर मैदा मिलाएं।

Add 2 pinch baking soda,mix

दो चुटकी बेकिंग सोडा डालकर मिलाएं।

Mixed together milk & powdered sugar Mix all ingredients

दूध तथा चीनी पाउडर मिलाकर सारी सामग्री मिला लें।

Keep all ingredient aside for 30 minutes

मिश्रित सामग्री को 30 मिनट के लिए एक तरफ रख दें।

 Divided the dough in two equal portions

Made Shakkarpara |

आटे को दो बराबर भागों में बांटकर शक्कर पारे बना लें 

Fried these Shakarpara |

शक्कर पारे तल लें।

मजबूत मांसपेशियों

  मांसपेशियां बनाने के सहायक उपाय -

मांस पेशियों को बढ़ाने तथा वजन बढ़ाने के लिए कुछ लोग  जिम ज्वाइन कर लेते हैं। परन्तु आहार का ज्ञान न होने के कारण मनवांछित फल प्राप्त नहीं होता। विशेषज्ञों का कहना है कि मांसपेशियों का निर्माण 20 प्रतिशत व्यायाम और 80 प्रतिशत पोषण पर निर्भर करता है।इसका मतलब है कि जरूरत से ज्यादा वर्कआउट करने से ज्यादा मांसपेशियां नहीं बन पाएंगी। वास्तव में, बड़े पैमाने पर लाभ देखने के लिए आपको प्रत्येक मांसपेशी समूह पर प्रति सप्ताह केवल 3 से 4 बार कसरत करने की आवश्यकता है। इस से कम या अधिक करने से आप पूरे लाभ से वंचित  रह सकतें है।

 जब आप जिम या गैरेज में नहीं होते हैं तो आपके शरीर, आपकी मांसपेशियों को आराम करने और स्वस्थ होने की आवश्यकता है। आपकी मांसपेशियां कितनी अच्छी तरह आराम करती हैं और स्वस्थ हो जाती हैं, यह आपके आराम तथा नींद की गुणवत्ता और मात्रा और आपके पोषण पर निर्भर करता है, यानी आहार और बिल्डिंग ब्लॉक्स की गुणवत्ता जो आप अपनी मांसपेशियों को खिलाने के लिए उपयोग कर रहे हैं।

दूसरे शब्दों में, जब आप जिम में कसरत कर रहे होते हैं तो आपकी मांसपेशियां विकसित नहीं होती हैं। वे बढ जाती हैं।  आपका वर्कआउट पूरा हो जाने के बाद  उनको मजबूत बनाने के लिए विशेष आराम तथा आहार की जरूरत होती है।

आराम की अवधि  के दौरान भी आपको  वर्कआउट करने की ज़रूरत रहती है। क्योंकि, आपकी मांसपेशियों को बढ़ने और मजबूत होने के लिए कुछ तनाव और खिंचाव से गुजरना पड़ता है, ताकि वे आपकी अगली कसरत को संभालने के लिए तैयार हो सकें। इसके लिए आपको प्रत्येक मांसपेशी समूह पर प्रति सप्ताह केवल 3 से 4 बार काम करने की आवश्यकता होती है, उन वर्कआउट को उच्च-तीव्रता  और अच्छी तरह से निष्पादित करने की आवश्यकता होती है।

बेशक, नियमित रूप से वर्कआउट करना समीकरण का एक और बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है। खैर, अंदाज़ा लगाइए... उन उच्च-तीव्रता वाले वर्कआउट को प्रभावी ढंग से पूरा करने के लिए, सप्ताह के बाद सप्ताह , और महीने के बाद महीने, आपको चलते रहने के लिए सही प्रकार के ईंधन की आवश्यकता होती है।  हम फिर से पोषण पर वापस आ गए हैं। अब, आप देख सकते हैं कि क्यों 80 प्रतिशत मांसपेशियों का निर्माण उचित पोषण से होता है।

आपके वर्कआउट की गुणवत्ता और आपके पोषण की गुणवत्ता साथ-साथ चलती है। एक के बिना दूसरे का काम नहीं चल सकता. और, यदि उनमें से कोई  एक भी गायब या कमी है, तो आप उस तरह के परिणाम नहीं देख पाएंगे जो आप चाहते हैं।

 चूँकि यह पोस्ट मांसपेशियों के निर्माण की प्रक्रिया के पोषण संबंधी पक्ष के बारे में है, हम इसी पर ध्यान केंद्रित करेंगे...।

प्रोटीन पर्याप्त नहीं है-

हम सभी मांसपेशियों के निर्माण के लिए पर्याप्त प्रोटीन के सेवन के महत्व से अवगत हैं।प्रोटीन आपके शरीर की मांसपेशियों को वृद्धि के लिए आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करता है।  आपको प्रत्येक दिन शरीर के वजन के हिसाब  से प्रति पाउंड एक ग्राम तक प्रोटीन की आवश्यकता होती है। इसका मतलब है कि 150 पाउंड वजन वाले व्यक्ति को प्रति दिन 150 ग्राम तक प्रोटीन की आवश्यकता होगी।

इतनी मात्रा लेने से उसका वर्तमान वजन बना रहेगा। यदि  आप अपना वजन 170 पाउंड  करना चाहता है उसे वांछित मांसपेशीय लाभ प्राप्त करने के लिए प्रति दिन 170 ग्राम तक प्रोटीन की आवश्यकता होती है।

बेशक, समस्या यह है कि ज्यादातर लोग केवल प्रोटीन की खपत पर ध्यान केंद्रित करते हैं, यानी मांसपेशियों के प्राथमिक निर्माण खंड... और वे इसे बनाने के लिए शरीर को उचित रूप से ऊर्जावान बनाए रखने के महत्व को नजरअंदाज करते हैं या इसके बारे में जानते नहीं हैं।  मांसपेशियों को बनाए रखने के लिए उन्होंने बहुत वर्कआउट किया है

आप देखिए, प्रोटीन के सेवन से आपकी मांसपेशियां तभी बढ़ेंगी जब आपका वर्कआउट नियमित होगा...और उच्च गुणवत्ता और उच्च तीव्रता वाला होगा।

 नियमित आधार पर उच्च-गुणवत्ता और उच्च-तीव्रता वाले वर्कआउट को जारी रखने का एकमात्र तरीका अपने शरीर को अच्छी तरह से ऊर्जावान बनाए रखना है...जब चाहे आप जिम में हों, चाहे बाहर भी हों।

इस रिपोर्ट में हम उन अन्य प्रमुख पोषक तत्वों के बारे में बात करने जा रहे हैं जिनकी आमतौर पर कमी होती है।

यदि आप जिम में घंटों बिताने और खुद को जबरदस्ती प्रोटीन खिलाने से थक गए हैं, और फिर भी पर्याप्त तेजी से मांसपेशियां बनाने में सक्षम नहीं होने पर, नीचे दिए गए सुझावों पर ध्यान दें...

हाइड्रेटेड रहना

अगर वे नियमित रूप से कसरत नहीं करते हैं, तो भी ज्यादातर लोग अक्सर अपनी दैनिक गतिविधियों में शामिल होने से निर्जलित हो जाते हैं, क्योंकि वे दिन के दौरान पर्याप्त तरल पदार्थ नहीं पीते हैं। यदि आप कुछ पीने के लिए प्यास लगने तक प्रतीक्षा करते हैं, तो आमतौर पर बहुत देर हो चुकी होती है, आपका  शरीर पहले से ही कुछ हद तक निर्जलित है।

इसलिए, पूरे दिन तरल पदार्थों का सेवन करके अपने शरीर को अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रखना ही एक रास्ता है। शुरूआत में  आपको  दिन में अधिक बार बाथरूम जाना पड़ सकता है। लेकिन, बदले में, आपको अधिक ऊर्जा मिलेगी, सिरदर्द कम होगा, और आपका शरीर बेहतर काम करेगा और कुल मिलाकर अधिक स्वस्थ रहेगा। हाइड्रेटेड रहने से आपको मांसपेशियों को अधिक कुशलता से बनाने में मदद मिलेगी... और वर्कआउट के दौरान आप बहुत जल्दी थकने से बचेंगे। 

कमजोर वर्कआउट के बराबर कमजोर परिणाम होते हैं।

बेशक, यदि आप ऐसे व्यक्ति हैं जो नियमित रूप से कसरत करते हैं जैसा कि आपको अधिकतम मांसपेशियों के विकास के लिए करना चाहिए। तो आपका शरीर स्पष्ट रूप से सामान्य से थोड़ा अधिक गति करेगा, इसलिए अन्य व्यक्तियों की तुलना में आपको अधिक तरल पदार्थ का उपयोग करना पड़ेगा। इसलिए, पूरे दिन हाइड्रेटेड रहना और भी महत्वपूर्ण है...और विशेष रूप से वर्कआउट से पहले, दौरान और बाद में...ताकि आप उच्च-गुणवत्ता, उच्च-तीव्रता वाले वर्कआउट कर सकें। अन्यथा, आपको मांसपेशियों में लाभ नहीं दिखेगा। आपके वर्कआउट के दौरान  बीच बीच में  थोड़ा थोड़ा पानी पीने की सलाह  दी जाती है।  ध्यान  रखें कि  इतना न पी लें कि आपका पेट फूलने लगे।  बहुत कम मात्रा में पियें , एक या दो घूंट ।पर्याप्त रूप से हाइड्रेटेड हुए बिना वर्कआउट करना आपके लिए खतरनाक भी हो सकता है। निर्जलित एथलीटों के लिए कसरत के बीच में गिर जाना और खुद को गंभीर रूप से घायल करना कोई असामान्य बात नहीं है।

 जब मैं तरल पदार्थ का उल्लेख करता हूं तो मैं सोडा, कॉफी, अल्कोहल या यहां तक कि कई बोतलबंद,डिब्बाबंद उच्च-चीनी वाले जूस के बारे में बात नहीं कर रहा हूं।

जब भी जरूरत हो तो सादे पानी का सेवन करें। अगर आप पानी को स्वादिष्ट करके पीना चाहते है, तो आप  इसमें थोड़ा सा नींबू (या नारंगी या अन्य फल) भी निचोड़ सकते हैं।

यदि आप इससे ओर अधिक लाभ  प्राप्त करना चाहते हैं, तो मैं सलाह दूंगा कि आप नारियल पानी पीने का प्रयास करें। वर्कआउट के बाद हाइड्रेटर के रूप में नारियल पानी विशेष रूप से बहुत अच्छा है क्योंकि यह शरीर के लिए  आवश्यक  मिनरल की आपूर्ति भी करता है अन्य पोषक तत्वों और इलेक्ट्रोलाइट्स के साथ इसकी आवश्यकता होती है।और, इसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है. निःसंदेह, आप इसे किसी भी समय ले सकते हैं, न केवल कसरत के बाद, यहां तक कि अपने भोजन के साथ या उसके बाद भी।

मेरा सुझाव है कि आप जितना संभव हो सके, उतना प्राकृतिक और शुद्ध नारियल पानी का ही सेवन करें । खासकर जब आपको फल तथा उनके जूस में स्वाद कम आ रहा है।

यदि आप स्वादयुक्त या मिश्रित नारियल पानी का उपयोग करने का निर्णय लेते हैं, तो मिश्रण में मिलाए जाने वाले अतिरिक्त कैलोरी, चीनी और अन्य सामग्रियों से सावधान रहें।

महत्वपूर्ण: आपको इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि आप अपने आप को जरूरत से ज्यादा हाइड्रेट न करें । हर घंटे एक या दो घूंट तरल पदार्थ पीना अच्छी आदत है । 

तरल का सेवन मौसम पर भी निर्भर करता है।यदि  अत्यधिक गर्म दिन हो, या यदि आप दिन भर दौड़ते रहते हैं, तो आप को क्षतिपूर्ति के लिए अपने तरल पदार्थ का सेवन बढ़ाना पड सकता हैं।

सहनशक्ति बढ़ाना

यदि आपके शरीर में ऊर्जा का भंडार कम है तो सप्ताह दर सप्ताह उच्च गुणवत्ता वाले वर्कआउट करना मुश्किल हो सकता है। आपके लिए अपने आप को जिम में वर्कआउट के लिए तैयार करना मुश्किल हो जाता है और फिर एक घंटे (या अधिक) तीव्र पुश अप, खींचना और उठाना कठिन हो सकता है।

अगर आपका शरीर पहले से ही ऊर्जावान हो या हो जाने के लिए तैयार हो। तो चीजें बहुत आसान हो सकती हैं जब आपका शरीर संग्रहित वसा, प्रोटीन ,मांसपेशियों के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट का भी उपयोग करता है तो ओर भी आसानी हो जाती है।

ऊर्जा।

हालाँकि, आपके शरीर में ऊर्जा का सबसे आसानी से उपलब्ध स्रोत ग्लाइकोजन है, जो भंडारण के रूप में ग्लूकोज या चीनी है।आपने दिन में पहले या पिछली रात में जो भोजन किया है, वह आपके शरीर को सामान्य रूप से कार्य करने के लिए आवश्यक ग्लाइकोजन रिजर्व की आपूर्ति जारी रख सकता है। लेकिन, जब आप अपने दिन में उच्च तीव्रता वाला वर्कआउट शामिल करते हैं, तो आप उस आरक्षित राशि का उपयोग बहुत तेजी से करना शुरू कर सकते हैं। और, जैसे-जैसे आपका ग्लाइकोजन भंडार कम होता जाता है, आपका शरीर अधिक से अधिक धीमा हो सकता है । इसलिए, अपने उच्च तीव्रता वाले वर्कआउट के दौरान अपने ऊर्जा भंडार को बनाए रखने के लिए, आपको पहले से योजना बनाने और अपने पूरे वर्कआउट के दौरान अपनी ग्लाइकोजन आपूर्ति को उपलब्ध रखने की आवश्यकता है।

अपने वर्कआउट से कम से कम कुछ घंटे पहले उच्च गुणवत्ता वाला भोजन करना यहां एक अच्छा विचार है, क्योंकि यह आपकी आपूर्ति को बनाए रख सकता है और आपको वह सहनशक्ति प्रदान कर सकता है जिसकी आपको आवश्यकता होगी।

कुछ प्रोटीन के साथ-साथ, उस भोजन में कार्बोहाइड्रेट का उच्च गुणवत्ता वाला स्रोत होना भी महत्वपूर्ण है। आप स्पष्ट रूप से अपने आप को इतना अधिक नहीं भरना चाहेंगे कि आप कसरत न कर सकें। लेकिन, आप बहुत कम खाना भी नहीं चाहेंगे। हर कोई अलग है इसलिए आपको प्रयोग करना होगा और पता लगाना होगा कि आपके लिए सही मात्रा क्या है।

मल्टी-ग्रेन ब्रेड, पास्ता, या पत्तेदार-हरी सब्जियाँ सभी यहाँ अच्छी तरह से काम कर सकती हैं, साथ ही कुछ उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन जैसे ग्रिल्ड बेक्ड सैल्मन, अंडे, या यहाँ तक कि लीन चिकन या टर्की भी।

इसके बाद, मैं सलाह  दूंगा  कि आप अपने वर्कआउट से कम से कम 30 मिनट से एक घंटे पहले सही नाश्ता करें।बादाम एक बेहतरीन प्री-वर्कआउट स्नैक है जो आपकी गहन गतिविधि को जारी रख सकता है।

बादाम एक आदर्श नाश्ता है क्योंकि इसमें स्वस्थ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, साथ ही कुछ स्वस्थ वसा होते हैं, जिनके बारे में हम जल्द ही और बात करेंगे। साथ ही, बादाम में ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है। इसलिए, वे धीमी गति से जलते हैं और आपको लंबे समय तक पोषण दे  सकते हैं उदाहरण के लिए, सीधी चीनी या यहां तक कि कुछ फलों के विपरीत।

सिर्फ 6 से 12 बादाम प्री-वर्कआउट स्नैक के रूप में चमत्कार कर सकते हैं। इसके बाद पर्याप्त पानी पीना सुनिश्चित करें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि वर्कआउट के दौरान आपका दम न घुटे या आपको खांसी न हो, बादाम खाने के बाद पानी जरूर पिएं । वरना गले अटके बादाम के टुकड़े आपको परेशान कर सकतें हैं।

बादाम का सेवन आपको छोटे वर्कआउट या दौड़ के दौरान ऊर्जा प्रदान करने के लिए अच्छा काम कर सकता है... या यहां तक कि उन  परिस्थितियों के दौरान भी जहां आपको भूख लग रही है क्योंकि आपने खाना नहीं खाया है, लेकिन आपको एक घंटे के भीतर वर्कआउट करना होगा ताकि आप ऐसा कर सकें। वास्तविक भोजन न करें।

कसरत के बाद मांसपेशियों का निर्माण

वर्कआउट के बाद आप क्या खाते हैं और कितनी जल्दी खाते हैं , आपके मेगा मसल्स के लाभ में भारी अंतर ला सकता है।पहले में पोषक तत्वों का सही संयोजन होना जरूरी  है।।गहन कसरत खत्म करने के 15 मिनट में पोषक पदार्थ का सेवन आपकी मांसपेशियों के लाभ में काफी सुधार कर सकते हैं।

यदि आप अपने वर्कआउट के बाद सही पोषक तत्वों का सेवन करने के लिए बहुत लंबे समय तक इंतजार करते हैं, तो आपकी    मांसपेशियों का निर्माण नहीं होगा।  हो सकता है कि आपकी कुछ मांसपेशियाँ भी कम होने लगें जो पहले ही हो चुकी हैं ।कसरत खत्म करने के 15 मिनट के भीतर उपभोग करने के लिए पोषक तत्वों का यह आदर्श संयोजन क्या है?

इसमें एक भाग प्रोटीन और 1.5 भाग कार्बोहाइड्रेट होता है। प्रोटीन स्पष्ट रूप से आपकी मांसपेशियों के लिए निर्माण सामग्री है। और, इस प्रोटीन को सही मात्रा में कार्बोहाइड्रेट के साथ मिलाने से आपके शरीर को प्रोटीन को अधिक कुशलता से अवशोषित और उपयोग करने में मदद मिलती है।

कई एथलीट कसरत के बाद पेय, शेक या पूरक खरीदते हैं जो अधिकतम मांसपेशियों की पुनःपूर्ति और विकास के लिए प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का आदर्श अनुपात देने का वादा करते हैं।आप ऐसा कर सकते हैं और यह पता लगाने का प्रयास कर सकते हैं कि कौन सा शेक या पेय आपकी विशेष आवश्यकताओं के लिए सही है।

मानो या न मानो, दूध में प्राकृतिक रूप से सही प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट अनुपात होता है जिसकी आपको कसरत के बाद के पोषण के लिए आवश्यकता होगी। आप शायद कह रहे होंगे, ठीक है! मुझे पहले से ही पता था कि दूध मेरे लिए अच्छा है।शायद आपने दूध का सेवन किया भी होगा। लेकिन, मैं आपको दूध को अपने प्राथमिक प्रोटीन स्रोत के रूप में उपयोग करने के लिए नहीं कह रहा हूँ। यदि आप चाहें तो ऐसा कर सकते हैं।

मैं विशेष रूप से आपको सलाह दे रहा हूं कि आप अपने वर्कआउट के तुरंत बाद दूध को अपने पोस्ट-वर्कआउट पोषण के रूप में उपयोग करें।जहां तक संभव हो सके, पहले 15 मिनट के भीतर।

आप अपना वर्कआउट खत्म करने के तुरंत बाद सबसे पहले कुछ घूंट पानी पीना चाह सकते हैं। और, फिर, घर वापस जाने से पहले, शॉवर लेने से पहले, खाने के लिए बाहर जाने से पहले, या जो कुछ भी आप अपने वर्कआउट के बाद करने की योजना बनाते हैं, उससे पहले लगभग 12 से 24 औंस दूध ,आपके शरीर के आकार के आधार पर पी लें।आमतौर पर, लोग इस  में कम वसा वाले या बिना वसा वाले दूध का उपयोग करना पसंद करते हैं।

व्यक्तिगत रूप से मैं संपूर्ण दूध  पसंद करता हूं क्योंकि यह एक संपूर्ण भोजन है।

लेकिन, यदि आप कम वसा, गैर वसा या स्किम मिल्क का उपयोग करना चाहते हैं, तो यह आपकी पसंद है। बेशक, यदि आप सोया दूध, चावल का दूध, या बादाम का दूध पसंद करते हैं, तो यह भी ठीक है। बस यह सुनिश्चित करें कि यह आपके शरीर को बहुत अधिक मात्रा के बिना, सही मात्रा में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का संयोजन प्रदान कर रहा है


अतिरिक्त सामग्री


आपको ऊर्जा प्रदान करने के लिए इन वैकल्पिक स्रोतों को अधिक मात्रा में पीना पड़ सकता है दो आवश्यक पोषक तत्वों की सही मात्रा।


अधिक मांसपेशियों के लिए अधिक वसा...


यदि आप पहले से नहीं जानते हैं, तो खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से मौजूद अच्छी वसा और खराब वसा होती है।यदि आप कुछ बड़ी मांसपेशियों के साथ सर्वोत्तम स्वास्थ्य के लिए प्रयास कर रहे हैं,अपने आहार में स्वस्थ वसा को शामिल करना  बहुत जरूरी है।


मेरा पहला पसंदीदा जैतून का तेल है, जिसे पहले से ही आश्चर्यजनक पोषक तत्वों में से एक माना गया है।

कई वर्षों से,  इसे हृदय-स्वस्थ आहार के हिस्से के रूप में भी अनुशंसित किया जाता है।  अब आप जैतून के तेल से मिलने वाले लाभों की सूची में "मांसपेशियों की अवधारण" को भी जोड़ सकते हैं।


इसके पीछे के विज्ञान के बारे में ज़्यादा जाने बिना, जैतून का तेल हमारे शरीर की मांसपेशियों को ख़राब होने से रोकता है। मैं केवल एक्स्ट्रा-वर्जिन जैतून तेल का उपयोग करने की सलाह देता हूं, जो स्वास्थ्यवर्धक है और आपके शरीर को विटामिन ई की ठोस खुराक भी प्रदान करता है।


विटामिन ई आपके शरीर को उस मांसपेशी द्रव्यमान को बनाए रखने में मदद करने के लिए भी जाना जाता है जिस पर आप काम कर रहे हैं।अतिरिक्त-कुंवारी जैतून के तेल की ड्रेसिंग वाला सलाद, या इस तेल से पकाया गया भोजन अच्छा रहेगा।


मेरा अगला पसंदीदा अच्छा वसा मछली का तेल है, जो आपके शरीर को ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रदान करता है।यदि नियमित रूप से लिया जाए तो यह अच्छी वसा वास्तव में आपके  शरीर की खराब वसा को कम करने में आपकी मदद कर सकती है। आप पूछ सकते हैं कि यह आपको अधिक मांसपेशियां बनाने में कैसे मदद करता है? आपके शरीर की खराब वसा  कम करने से, आपके समग्र स्वास्थ्य में सुधार होगा। इसका मतलब है, मांसपेशियों के निर्माण की प्रक्रिया सहित आपके शरीर के सभी कार्य बेहतर हो जाएंगे और अधिक कुशल हो जाएंगे।

कम खराब वसा वाला शरीर आपको अधिक आसानी से और कुशलता से चलने-फिरने में भी मदद करेगा। आप अधिक वजन उठाने में भी सक्षम हो सकते हैं, यानी बिना थके उच्च तीव्रता वाले वर्कआउट कर सकते हैं। आइए इसके  फ़ायदे को न भूलें: आपके शरीर पर कम वसा ही आपको अधिक मांसल बनाएगी, खासकर यदि आप "छेनी हुई एब्स" सिक्स-पैक लुक के लिए जा रहे हैं। वास्तव में, आपके शरीर की प्रत्येक प्रमुख मांसपेशी अधिक प्रमुख हो जाएगी जब उसे स्पष्ट करने के लिए कम वसा होगी। आप ओमेगा-3 मछली के तेल की वो खुराक लें जिसमें डीएचए और ईपीए दोनों हो। इसे पैकेज पर  चिपकाए गये लेबल पर चेक कर लें ।




याद रखें, मेगा मसल फॉर्मूला सरल है: उच्च तीव्रता वाले नियमित रूप से वर्कआउट, प्रभावी ढंग से किए गए । इसमें दैनिक आधार पर कुछ उच्च गुणवत्ता वाले प्रोटीन का सेवन शामिल करें और आप अधिकांश लोगों की तुलना में, जो लगातार घंटों बर्बाद करते रहते हैं ,जल्द ही कुछ प्रभावशाली मांसपेशियों का लाभ देखेंगे। 


नियमित आधार पर अधिक उच्च-तीव्रता वाले वर्कआउट करने,   के साथ यह आवश्यक है कि आप अपने शरीर को हाइड्रेटेड रखें, शरीर को नियमित रूप से ऊर्जावान रखें, और मांसपेशियों के लाभ को बनाए रखें जो आपने पहले ही वर्कआउट से हासिल कर लिया है ।

यदि बताई बातों पर अमल करेंगे तो आप को बहुत अच्छे परिणाम प्राप्त होंगे। अन्य लोग आश्चर्यचकित रह जायेगे  कि उनकी मांसपेशियां बड़ी या मजबूत क्यों नहीं हो रही हैं।


“तू करता वहीं है जो तू चाहता है। होता वहीं है जो मैं चाहता हूं। इसलिए तू वो कर जो मैं चाहता हूं। फिर होगा वहीं जो तू चाहता है।” मनुष्य की इच...